एक्टर सुनील थापा के निधन पर भावुक हुईं प्रियंका चोपड़ा:कहा- जब मैंने पिता को खोया, तब आपने संभाला, आप हमेशा मेरे कोच सर रहेंगे
फिल्म मैरी कॉम और सीरीज द फैमिली मैन-3 में नजर आ चुके एक्टर सुनील थापा का 6 फरवरी को 68 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलने के बाद मैरी कॉम एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा भावुक हो गईं। उन्होंने बताया है कि जब उनके पिता का निधन हुआ, तब सुनील थापा ने उन्हें संभाला था। प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में फिल्म मैरी कॉम के कुछ सीन्स का वीडियो शेयर कर भावुक होकर लिखा है, आप हमेशा मेरे कोच सर रहेंगे। जब मैंने अपने पिता को खो दिया था, तब आपने मुझे संभाला। आपने मुझे प्यार दिया और कई कठिन दिनों में मेरा साथ दिया, बिना यह जाने कि आप मेरे लिए कितने मायने रखते थे। आपकी गर्मजोशी भरी झप्पी और आपकी हंसी हमेशा मेरी यादों का हिस्सा रहेंगी। आगे प्रियंका ने लिखा है, ‘बहुत कम उम्र में चले गए, लेकिन कभी भुलाए नहीं जाएंगे। उस समय आपकी दयालुता के लिए धन्यवाद, जब मैं पूरी तरह टूट चुकी थी। शांति से विश्राम करें, सुनील थापा। मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं परिवार और प्रियजनों के साथ हैं।’ एक्टर सुनील थापा के निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, नॉर्विक अस्पताल के चेयरपर्सन राजेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सुनील थापा को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। शुक्रवार सुबह 7:44 बजे किए गए ईसीजी में उनकी मौत की पुष्टि हुई। सुनील थापा नेपाली एक्टर थे, जिन्होंने 300 से ज्यादा नेपाली फिल्मों के साथ-साथ कई बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्मों में भी काम किया। फिल्म मैरी कॉम में सुनील ने कोच की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वो फिल्म एक दूजे के लिए (1981), खामियाजा (2019) जैसी कई फिल्मों का हिस्सा रहे हैं।
जापान चुनाव, PM ताकाइची बोलीं- हारी तो इस्तीफा दे दूंगी:465 में से 300 सीटें मिलने की उम्मीद; ट्रम्प ने भी समर्थन दिया
जापान में रविवार को लोअर हाउस के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसमें प्रधानमंत्री साने ताकाइची को बड़ी जीत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बर्फबारी के कारण मतदान प्रतिशत घटने की आशंका जताई जा रही है। यहां रविवार को 27 से 28 इंच तक बर्फबारी होने का अनुमान है। ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने अक्टूबर में पद संभाला था। ओपिनियन पोल के अनुसार, उनकी कंजर्वेटिव गठबंधन (लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और जापान इनोवेशन पार्टी) को संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की 465 सीटों में से 300 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। फिलहाल गठबंधन के पास 233 सीटें हैं, और अगर यह 310 सीटें जीत लेता है तो ऊपरी सदन में विपक्ष के नियंत्रण के बावजूद कानून पास करने की ताकत मिल जाएगी। ताकाइची ने कहा है कि अगर गठबंधन बहुमत खो देता है तो वह इस्तीफा दे देंगी। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी ताकाइची को समर्थन जता चुके हैं। ताकाइची ने चीन के खिलाफ रुख मजबूत किया ताकाइची ने चीन के खिलाफ मजबूत रुख अपनाते हुए सैन्य खर्च बढ़ाया है, आर्थिक पैकेज और टैक्स कटौती की घोषणा की है। उन्होंने खाद्य पदार्थों पर 8% सेल्स टैक्स को दो साल के लिए निलंबित करने का वादा किया है ताकि बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत मिले। रणनीतिक सलाहकार कंपनी एफजीएस ग्लोबल के मैनेजिंग डायरेक्टर सेइजी इनाडा के मुताबिक, ‘अगर ताकाइची बड़ी जीत दर्ज करती हैं, तो उन्हें टैक्स में कटौती जैसे अहम फैसलों को लागू करने की आजादी मिलेगी।’ ट्रम्प बोले थे- तकाइची शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 फरवरी को एक पोस्ट में साने ताकाइची को पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने तकाइची को मजबूत, शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता कहा, जो अपने देश से सच्चा प्यार करती हैं और जापान के लोगों को निराश नहीं करेंगी। ट्रम्प ने बताया कि वह 19 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस में ताकाइची से मुलाकात करेंगे। यह समर्थन जापान के 8 फरवरी 2026 के चुनाव से ठीक दो दिन पहले आया है। यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने जापान के किसी नेता को चुनाव में खुलकर समर्थन दिया है। सोशल मीडिया पर साने ताकाइची का क्रेज बढ़ा सोशल मीडिया पर साने ताकाइची को लेकर ‘सानाकात्सु’ नाम का ट्रेंड भी चर्चा में है। इसमें उनके इस्तेमाल किए गए सामान, जैसे हैंडबैग और संसद में इस्तेमाल किया जाने वाला गुलाबी पेन, युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए हैं। एक हालिया सर्वे में 30 साल से कम उम्र के 90% से ज्यादा मतदाताओं ने ताकाइची के पक्ष में रुझान दिखाया, हालांकि यह वर्ग आमतौर पर कम मतदान करता है। जापान में बर्फबारी से मतदान घटने का अनुमान उधर, रविवार को उत्तरी और पूर्वी जापान में 70 सेंटीमीटर तक बर्फबारी का अनुमान है। निआगाता प्रांत के नागाओका जैसे इलाकों में सड़कों के किनारे एक मीटर से ज्यादा बर्फ जमी हुई है। ऐसे में कई मतदाताओं के लिए घर से निकलना मुश्किल हो सकता है। जापानी कम्युनिस्ट पार्टी के स्वयंसेवक ताकेहिको इगाराशी के मुताबिक, उनकी पार्टी समर्थकों को फोन कर रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था भी कर रही है। पिछले कुछ चुनावों में लोअर हाउस का टर्नआउट करीब 55% के आसपास रहा है। अगर इस बार मतदान और घटता है, तो संगठित वोटिंग ब्लॉक्स का असर और बढ़ सकता है। वोटिंग 289 सिंगल-सीट सीटों पर सीधे मुकाबले से होगी, जबकि बाकी सीटें प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन से तय होंगी। पोलिंग रात 8 बजे बंद होगी, जिसके बाद एग्जिट पोल के आधार पर शुरुआती अनुमान जारी किए जाएंगे। ताकाइची ने संसद भंग कर चुनाव की घोषणा की थी यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि यह न केवल जापान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा असर डालेगा। 2024 के चुनाव में LDP को भारी नुकसान हुआ था और पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की सरकार अल्पमत में आ गई थी। उसके बाद 2025 में LDP की प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में ताकाइची ने जीत हासिल की और जापान इनोवेशन पार्टी के साथ गठबंधन बनाकर सरकार बनाया। जनवरी 2026 में जब संसद सत्र शुरू होने वाला था, ताकाइची ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को भंग कर दिया और 8 फरवरी को चुनाव की घोषणा की। यह फैसला उस समय लिया गया जब उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 प्रतिशत से ऊपर थी। ताकाइची का दावा है कि यह चुनाव उनके कंजर्वेटिव एजेंडे के लिए जनादेश प्राप्त करने का माध्यम है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना, इमिग्रेशन रिफॉर्म्स और चीन पर निर्भरता कम करना शामिल हैं। विपक्ष ने महंगाई को मुद्दा बनाया, ताकाइची का फोकस सुरक्षा पर उम्मीदवारों की बात करें तो LDP ने 285 सिंगल-सीट डिस्ट्रिक्ट्स और 52 प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उनके गठबंधन साथी इशिन नो काई ने 33 सीटों पर दांव लगाया है। ताकाइची खुद टोक्यो से चुनाव लड़ रही हैं और उनकी लोकप्रियता का फायदा पूरी पार्टी को मिलने की उम्मीद है। विपक्ष में सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस (CRA) प्रमुख है, जिसमें कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (CDP) और कोमेइतो (जो पहले LDP का साथी था) शामिल हैं। CRA ने 159 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। विपक्षी नेता यूरिको कोइके (कोमेइतो) और CDP के प्रमुखों ने अर्थव्यवस्था, महंगाई और सोशल वेलफेयर पर फोकस किया है, जबकि ताकाइची ने राष्ट्रीय सुरक्षा और इमिग्रेशन को मुख्य मुद्दा बनाया है। PM शिगेरू इशिबा ने इस्तीफा क्यों दिया शिगेरू इशिबा सितंबर 2024 में पीएम बने थे। वे पार्टी में 'आउटसाइडर' थे, यानी उनका कोई गॉडफादर नहीं था। उन्होंने वादा किया था कि महंगाई और आर्थिक समस्याओं को ठीक करेंगे, लेकिन उनका समय मुश्किल भरा रहा। 1. चुनावी हार का झटका: अक्टूबर 2024 के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) चुनाव में LDP-कोमेइतो गठबंधन बहुमत हार गया। फिर जुलाई 2025 के ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) चुनाव में भी बुरी हार हुई। पार्टी को 1955 के बाद पहली बार दोनों सदनों में बहुमत गंवाना पड़ा। 2. पार्टी का दबाव: हार के बाद पार्टी के अंदरूनी लोग इशिबा पर इस्तीफे का दबाव डालने लगे। इनका आरोप है कि इशिबा 'बहुत उदार' हैं, जबकि पार्टी को कंजर्वेटिव लीडर चाहिए। इशिबा ने 7 सितंबर 2025 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा- मैं पार्टी में फूट नहीं चाहता। अब नई पीढ़ी को मौका दूंगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others





















