गरबा से ग्लोबल मार्केट तक…गुजरात की सखी मंडल की महिलाएं पारंपरिक कला से बना रहीं पहचान
गुजरात में नवरात्रि के उत्सवी माहौल के बीच ग्रामीण महिलाएं अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को कारोबार में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. सखी मंडल और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाएं कढ़ाई, मिरर वर्क, चनिया-चोली और पारंपरिक आभूषणों के जरिए अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचा रही हैं.
वाइब्रेंट नवरात्रि, अहमदाबाद हाट और सरस मेले जैसे मंच इन महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने, ग्राहकों से जुड़ने और आमदनी बढ़ाने का अवसर दे रहे हैं. भावना स्वयं सहायता समूह की सदस्य शर्मिष्ठा पटेल के मुताबिक, उनका समूह कुर्ती, ब्लाउज, चनिया-चोली और कढ़ाई वाले दूसरे उत्पाद तैयार करता है. समूह की महिलाएं गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, पुणे, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद बेचती हैं.
समाज में पहचान मजबूत करने का अवसर
सखी मंडल से जुड़ने का फायदा केवल कारोबार तक सीमित नहीं है. इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, स्वरोजगार और समाज में सम्मान हासिल करने में भी मदद मिल रही है. सखी मंडल की सदस्य मोनिका व्यास के अनुसार, इस पहल ने महिलाओं को अपनी पसंद का काम करने और परिवार के साथ-साथ समाज में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर दिया है.
इस पहल को गुजरात सरकार के मिशन मंगलम कार्यक्रम का समर्थन प्राप्त है. इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है. अहमदाबाद हाट में कच्छ की पारंपरिक कढ़ाई और हस्तनिर्मित उत्पाद ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं. नवरात्रि के दौरान पारंपरिक परिधानों और सजावटी वस्तुओं की मांग बढ़ने से महिला उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने का अतिरिक्त अवसर मिल रहा है.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम योगदान
इस तरह गुजरात की महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक बाजार से जोड़कर न केवल पारंपरिक कला को सहेज रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी अहम योगदान दे रही हैं.
निशानेबाजी के लीजेंड जसपाल राणा के जीवन पर आई नई किताब, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया विमोचन
Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में एक बेहद खास और भावनात्मक कार्यक्रम देखने को मिला. राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देश के प्रतिष्ठित और मशहूर निशानेबाज जसपाल राणा के परिवारजनों ने आत्मीय भेंट की. इस मुलाकात के दौरान खेल जगत में देश का परचम लहराने वाले जसपाल राणा के जीवन, संघर्ष और ऐतिहासिक उपलब्धियों पर लिखी गई विशेष पुस्तक मुख्यमंत्री को सौंपी गई. मुख्यमंत्री ने अत्यंत सम्मान के साथ इस महत्वपूर्ण पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया और खेल के मैदान में जसपाल राणा के अभूतपूर्व योगदान को याद किया. इस मौके पर खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए एक नई ऊर्जा का संचार हुआ.
परिवार ने भेंट की जीवन पर आधारित अनूठी किताब
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस संक्षिप्त मगर गरिमामय कार्यक्रम के दौरान जसपाल राणा की धर्मपत्नी श्रीमती रीना राणा, उनके सुपुत्र युवराज राणा और सुपुत्री देवांशी राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे. परिवारजनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अभिवादन करते हुए उन्हें पुस्तक की पहली प्रति सप्रेम भेंट की. इस पुस्तक का शीर्षक ‘मैवरिक जसपाल: द मैन हू चेंज्ड इंडियन शूटिंग’ रखा गया है. यह किताब केवल एक खिलाड़ी के पदकों की गिनती नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस और बेबाक अंदाज का दस्तावेज है जिसने कभी भारतीय निशानेबाजी की पूरी रूपरेखा ही बदलकर रख दी थी. मुख्यमंत्री ने पुस्तक के कवर और उसकी विषयवस्तु को बड़ी रुचि के साथ देखा और पूरे परिवार को इस बेहतरीन पहल के लिए दिल से बधाई दी.
कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प का दूसरा नाम
पुस्तक का विमोचन करने के उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी असाधारण प्रतिभा, दिन-रात की कड़ी मेहनत, कठोर अनुशासन और अटूट संकल्प के दम पर भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है. जब देश में शूटिंग के लिए आधुनिक सुविधाएं और माहौल नहीं हुआ करता था, उस दौर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराकर यह साबित कर दिया था कि प्रतिभा किसी भी रुकावट से बड़ी होती है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी यह यात्रा आज के दौर के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है. उन्होंने दिखाया कि अगर इंसान के भीतर लगन हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.
उत्तराखंड की माटी का चमकता हुआ सितारा
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जसपाल राणा केवल देश की शान नहीं रहे, बल्कि उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड का मान भी पूरी दुनिया में बढ़ाया है. उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर खेल के सबसे बड़े फलक तक पहुंचने का उनका सफर हर युवा के दिल में जोश भर देता है. राज्य सरकार सदैव ऐसे महान विभूतियों के योगदान का सम्मान करती है जिन्होंने अपनी मिट्टी का नाम रोशन किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के उदीयमान खिलाड़ियों को जसपाल राणा के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि कैसे दबाव के पलों में भी खुद को शांत रखकर सटीक निशाना लगाया जाता है. उनका समूचा जीवन राष्ट्र सेवा और खेल के प्रति निष्ठा का एक अद्भुत उदाहरण है.
युवा पीढ़ी के लिए बनेगी मार्गदर्शक
विमोचन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह दृढ़ विश्वास जताया कि यह नई पुस्तक पाठकों और विशेष रूप से युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगी. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी जब इस किताब को पढ़ेगी, तो उन्हें यह समझ आएगा कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे कितने सालों का कड़ा अभ्यास, त्याग और मानसिक संतुलन छिपा होता है. यह पुस्तक खेल के मैदान के बाहर की उन चुनौतियों से भी रूबरू कराएगी जिनका सामना हर उभरते हुए एथलीट को करना पड़ता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक में संजोए गए अनुभव और संस्मरण नई पीढ़ी को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहेंगे.
सार्थक प्रयास के लिए परिवार को दीं शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने जसपाल राणा के परिवार के इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि किसी लीजेंड की यादों, उनके संघर्षों और उनकी जीवन यात्रा को शब्दों में पिरोकर समाज के सामने लाना एक अत्यंत पुनीत और जरूरी कार्य है. इससे आने वाली पीढ़ियां अपने नायकों को कभी भूलती नहीं हैं. मुख्यमंत्री धामी ने रीना राणा, युवराज और देवांशी को अपना आशीर्वाद और असीम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेलों और खिलाड़ियों के सम्मान के लिए सदैव तत्पर है. इस आत्मीय मुलाकात के बाद परिवारजनों ने भी मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया.
यह भी पढ़ें: SIR पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन का विरोध राजनीतिक हताशा का परिचायक : CM धामी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






