नवरात्रि पर झंडेवालान जाने से पहले जान लें ये नया रूट, दिल्ली पुलिस ने जारी की विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी
Delhi Traffic Advisory: दिल्ली में नवरात्रि के दौरान झंडेवालान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसे देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यातायात एडवाइजरी जारी की है. पुलिस के मुताबिक, 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक मंदिर और उसके आसपास की सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ जुट सकती है. इससे रानी झांसी रोड और आसपास की प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे इस दौरान रानी झांसी रोड से गुजरने से बचें और जरूरत के मुताबिक वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें.
रानी झांसी रोड पर बढ़ सकता है ट्रैफिक का दबाव
नवरात्रि के दौरान झंडेवालान मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस वजह से मंदिर के आसपास पैदल चलने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है. भारी भीड़ के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और जाम की स्थिति बन सकती है.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें. खासकर उन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, जिन्हें नई दिल्ली, करोल बाग, तीस हजारी या आईएसबीटी की तरफ जाना है. पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे रानी झांसी रोड का इस्तेमाल कम से कम करें और बताए गए वैकल्पिक रास्तों से अपनी मंजिल तक पहुंचें.
इन रास्तों से कर सकते हैं सफर
ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग जगहों से आने वाले वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक रास्ते बताए हैं. इनका इस्तेमाल करके लोग जाम से बचने की कोशिश कर सकते हैं.
- नई दिल्ली से करोल बाग जाने वाले वाहन: ऐसे वाहन चालक पंचकुइयां मार्ग और बग्गा के रास्ते जा सकते हैं.
- तीस हजारी से वंदे मातरम मार्ग और करोल बाग जाने वाले वाहन: इनके लिए न्यू रोहतक रोड का विकल्प दिया गया है.
- नई दिल्ली से आईएसबीटी जाने वाले वाहन: ऐसे वाहन चालक मिंटो रोड और राजघाट के रास्ते अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं.
पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा के दौरान ट्रैफिक संकेतों और पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें. इससे रास्तों पर यातायात को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी.
इन जगहों पर किया जाएगा ट्रैफिक डायवर्जन
झंडेवालान मंदिर में नवरात्रि के दौरान भीड़ को देखते हुए कुछ प्रमुख स्थानों पर वाहनों का रास्ता बदला जा सकता है.
1. पंचकुइयां गोल चक्कर: नई दिल्ली से रानी झांसी फ्लाईओवर की तरफ जाने वाले वाहनों को पंचकुइयां गोल चक्कर से बग्गा की ओर डायवर्ट किया जाएगा. इसके बाद वाहन चालक फैज रोड का इस्तेमाल कर सकते हैं.
2. झंडेवालान गोल चक्कर: अजमेरी गेट की तरफ से आकर रानी झांसी फ्लाईओवर की ओर जाने वाले वाहनों को झंडेवालान गोल चक्कर से डीबीजी रोड की तरफ भेजा जाएगा. यहां से वाहन चालक फैज रोड के रास्ते आगे बढ़ सकते हैं.
इन डायवर्जन का उद्देश्य मंदिर के आसपास भीड़ को नियंत्रित करना और यातायात को व्यवस्थित रखना है. हालांकि, सड़क पर वाहनों की संख्या और श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुसार यातायात की स्थिति बदल सकती है.
घर से निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सड़क पर लगे डायवर्जन संकेतों पर ध्यान देने की अपील की है. वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें और पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें.
नवरात्रि के दौरान झंडेवालान मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी आसपास की सड़कों पर भीड़ को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए. यातायात से जुड़ी ताजा जानकारी और सहायता के लिए लोग दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @dtptraffic से अपडेट ले सकते हैं.
ध्यान दें: यह ट्रैफिक एडवाइजरी 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक नवरात्रि समारोह के मद्देनजर जारी की गई है. इस अवधि में रानी झांसी रोड और आसपास की सड़कों पर निकलने से पहले वैकल्पिक रास्तों की जानकारी जरूर लें.
दिल्ली मेट्रो और ट्रेनें रद्द करने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, रविवार को होगी विशेष सुनवाई
दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों की सेवाएं रद्द करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई के लिए पहुंचेगा. इस मामले में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियां जारी रखी गईं, जिससे दिल्ली में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. अदालत इस मामले पर रविवार को विशेष सुनवाई करेगी.
यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया. याचिकाकर्ता ने अदालत से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है.
मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर सवाल
दरअसल, दिल्ली में CJP और विपक्षी दलों की ओर से 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया था. इस प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई और आवाजाही पर निगरानी रखी गई. इसी दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कुछ ट्रेन सेवाओं को रद्द करने का मुद्दा सामने आया.
याचिका में कहा गया है कि इन पाबंदियों के कारण दिल्ली में लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया और रेल सेवाओं को रद्द करने की कार्रवाई जारी रही.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों के दौरान क्या आम लोगों की जरूरतों का पर्याप्त ध्यान रखा गया. दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग रोजाना मेट्रो और ट्रेनों के जरिए अपने काम पर जाते हैं. छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और दूसरे यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन काफी महत्वपूर्ण है.
9 अक्टूबर के आदेश का दिया गया हवाला
याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को कहा था कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए. अदालत ने सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलाने पर जोर दिया था, ताकि सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी भी न हो.
याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद परिवहन सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं. याचिका में इन कदमों को अदालत के आदेश की कथित अवहेलना बताया गया है. अब रविवार को होने वाली सुनवाई में इस मुद्दे पर दलीलें रखी जाएंगी.
तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपनी याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन पाबंदियों से राजधानी में आम जनजीवन प्रभावित हुआ और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में मुश्किलें आईं. हालांकि, ये याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं. अदालत ने अभी इन आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है.
रविवार की सुनवाई पर टिकी नजरें
इस मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी. सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल उठ सकता है कि 9 अक्टूबर के आदेश का पालन किस तरह किया गया और सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियां लगाने के पीछे क्या आधार था.
दरअसल अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की विशेष सुनवाई पर हैं. अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और संबंधित अधिकारियों से कोई जवाब मांगती है या नहीं, यह सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा. फिलहाल मामला अदालत के विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई उसके निर्देशों पर निर्भर करेगी.
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