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Explainer: महज 6 शब्दों से कैसे CJP के साथ जुड़ गए थे लाखों युवा? कॉकरोच से 'राष्ट्रीय नेता' बन गए अभिजीत दिपके

Abhijit Dipke: दिल्ली इस समय छावनी बनी है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर मंतर पर शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी. लेकिन सुबह दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने एयरपोर्ट से ही सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास, रांका समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया. पिछले प्रदर्शन से सबक लेकर दिल्ली पुलिस ने इस बार काफी सख्ती बरती थी. इसके चलते अभिजीत दिपके केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया तक सुर्खियों में छाए हुए हैं. बता दें कि ये सिलसिला महज 6 शब्दों के आव्हान से शुरू हुआ था. आइए विस्तार से जानते हैं पूरा किस्सा....

बता दें कि पूरी कहानी शुरू होती है गत 15 मई से. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत या अन्य पेशों में प्रवेश करने वाले लोगों पर टिप्पणी की थी. उन्होंने ऐसे लोगों के लिए कथित तौर पर ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. हालांकि, एक हिस्से में इस टिप्पणी को बेरोजगार युवाओं से जोड़कर पेश किया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया. 

अगले दिन ही यानी 16 मई को जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी का मकसद आम बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाना नहीं, बल्कि फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की आलोचना करना था. इसी विवाद के बाद युवा अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन शुरू किया, जो बाद में युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले एक चर्चित विरोध मंच के रूप में सामने आया.

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महज 6 शब्दों से दिपके बने नेशनल लीडर

31 वर्षीय अभिजीत दिपके इस साल मई में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद चर्चा में आए थे. उन्होंने पोस्ट में महज 6 शब्द लिखे थे.- “क्या होगा अगर सारे तिलचट्टे एक साथ आ जाएं?” यह पोस्ट सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उस टिप्पणी के संदर्भ में थी, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर ‘तिलचट्टों’ से की गई थी.

दिपके की पोस्ट तेजी से वायरल हुई और इसके बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से ऑनलाइन आंदोलन शुरू हुआ. इसमें बड़ी संख्या में युवा जुड़ने लगे. देखते ही देखते यह आंदोलन सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया और युवाओं से जुड़े कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन होने लगे.

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंची आग

राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दिपके को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. दिपके ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने वाली टिप्पणी पर सोशल मीडिया पोस्ट किया था. उनकी यह पोस्ट वायरल हो गई और इसी से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक ऑनलाइन आंदोलन शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले गया. इस आंदोलन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भी प्रदर्शन किए थे.

जंतर मंतर 2.0 से पहले हिरासत में आए दिपके

दिपके शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक नए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे. इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जानी थी. मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवालों के बीच यह प्रदर्शन बुलाया गया था. दिपके का विमान जैसे ही नई दिल्ली पहुंचा, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया. उनके साथ CJP के दो अन्य वरिष्ठ नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया.

विमान में पुलिस अधिकारियों से बात करते हुए दिपके ने कहा कि मुझे गिरफ्तार करने के लिए लाया गया है, तो गिरफ्तार कर लो. मैं तुम लोगों से नहीं डरता. हालांकि, वीडियो में एक पुलिस अधिकारी उन्हें यह कहते हुए दिखाई दिया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा, बल्कि उनका सहयोग मांगा जा रहा है.

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कौन हैं दिपके?

दिपके दलित परिवार से आते हैं. उन्होंने अमेरिका में जनसंपर्क (पब्लिक रिलेशंस) में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और फिर भारत लौट आए. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता ने उन्हें समाज से जुड़े मुद्दों पर ठोस काम करने का अवसर दिया. हालांकि, उनके मुताबिक, इस आंदोलन से जुड़ने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकियां भी मिली हैं.

मेडिकल परीक्षा में पेपर लीक से लेकर बेरोजगारी तक उठाए मुद्दे

CJP आंदोलन ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी भूमिका निभाई. इस मामले से करीब 20 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए थे. इसके बाद आंदोलन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज किए. प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था.
इसके बाद से दिपके और उनके समर्थक सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दों पर अभियान चला रहे हैं. आंदोलन से जुड़े लोग इसे पारंपरिक राजनीतिक पार्टी के बजाय जनता के मुद्दों पर दबाव बनाने वाला समूह बताते हैं.

मतदाता सूची में बदलाव को लेकर नया विवाद

CJP ने अब मतदाता सूची में संशोधन को लेकर सवाल उठाए हैं. आंदोलन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था. यह विवाद पिछले महीने इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद फिर चर्चा में आया. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के दो अधिकारियों ने मतदाता सूची में संशोधन, पंजीकरण प्रक्रिया और आयोग के डिजिटल सिस्टम को लेकर कई बार चिंताएं जताई थीं. 

आलोचकों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए. वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह आंकड़ा मसौदा संशोधन के दौरान चिह्नित प्रविष्टियों को भी शामिल करता है. आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं. आयोग ने यह भी कहा है कि आंतरिक चर्चा के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य बात है.

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