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Kuno National Park: कूनो में फिर गूंजी किलकारी, मादा चीता आशा ने पांच शावकों को दिया जन्म; भारत में इतनी हुई चीतों की संख्या

Kuno National Park: मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक खुशखबरी सामने आई है. यहां नामीबियाई मादा चीता ‘आशा’ ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है. यह खबर सिर्फ कूनो के लिये ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिये बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस सफलता से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि भारत में चीते धीरे-धीरे खुद को फिर से बसाने लगे हैं.

भारत में चीतों की संख्या 35 हुई

कूनो नेशनल पार्क में आशा के पांच नवजात शावकों के जन्म से भारत में इन तेज जानवरों की कुल संख्या अब 35 हो गयी है. वहीं, भारत में जन्मे शावकों की संख्या 24 तक पहुंच गयी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिये गर्व और खुशी का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-जागरूक नेतृत्व के तहत संरक्षण प्रयासों का परिणाम है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और इसे कूनो के लिये एक गौरवपूर्ण पल बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सफलता में वन विभाग के कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की मेहनत का बड़ा हाथ है. उन्होंने कहा कि अब मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है.

दूसरी बार मां बनी ‘आशा’

विशेष बात यह है कि चीता ‘आशा’ दूसरी बार मां बनी है, जिसने पहले भी स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था. यह भारत में चीतों के आठवें सफल जन्म के रूप में दर्ज किया गया है. इस उपलब्धि को संरक्षण यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. इसके अलावा, 28 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से आठ और चीते लाये जाने का प्रस्ताव है. ऐसे समय पर शावकों का जन्म होना भविष्य के लिये सकारात्मक संकेत है और इससे कूनो की जैव विविधता और चीतों की आबादी दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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बुजुर्ग आबादी का संकट: चीन के फर्जी अस्पतालों में इंश्योरेंस फ्रॉड उजागर

नई दिल्ली/बीजिंग, 7 फरवरी (आईएएनएस)। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन में फर्जी मानसिक अस्पताल और इंश्योरेंस फ्रॉड में बढ़ोतरी से यह पता चलता है कि देश बुजुर्ग आबादी से निपटने में काफी संघर्ष कर रहा है।

द डिप्लोमैट ने हाल ही में एक घोटाले का फाश किया, जिसमें निजी मनोरोग अस्पताल सरकार से बड़ी मात्रा में मेडिकल फंड हड़पने के लिए गलत बयानी कर मरीजों को भर्ती कर रहे थे।

बीजिंग न्यूज का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में शियांगयांग और यिचांग शहरों में दर्जनों साइकियाट्रिक अस्पतालों का जिक्र किया गया है, जो या तो कम फीस पर या मुफ्त में इनपेशेंट भर्ती की सुविधा देते हैं।

यह ऐसे समय में हुआ है जब चीन में इलाज आमतौर पर मेडिकल इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत कवर होता है, जहां मरीजों से आमतौर पर उनके इलाज की लागत का एक निश्चित प्रतिशत भुगतान करने की उम्मीद की जाती है।

हालांकि, एक अंडरकवर रिपोर्टर ने प्रति दिन प्रति मरीज लगभग 140 युआन के इलाज को रिकॉर्ड किया और उसमें से अधिकतर का सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस से पुर्नभुगतान क्लेम किया।

जबकि इनमें से कुछ में मरीजों की संख्या नाममात्र की थी। कुछ में 100 से ज्यादा थे। मरीज मुख्य रूप से शराबी और बुजुर्ग थे जो मुफ्त खाने और रहने की उम्मीद में आए थे।

इसके अलावा, रिपोर्टर ने अस्पतालों के हालात बेहद खराब पाए, जहां शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार आम था। मरीजों को अस्पताल की सफाई करने, दूसरे मरीजों को नहलाने और दूसरे छोटे-मोटे काम करने के लिए भी मजबूर किया जाता था।

खास बात यह है कि कुछ अस्पतालों ने मरीजों के भर्ती होने के बाद उन्हें छोड़ना मुश्किल कर दिया था, और यह कई साल तक चलता।

रिपोर्ट में कहा गया है, यह चीन की मौजूदा बुजुर्गों की देखभाल प्रणाली की सीमाओं को उजागर करता है, जो यह मानती है कि ज्यादातर बुजुर्गों की देखभाल उनके परिवार वाले घर पर करेंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है, घोटाले के लिए भर्ती किए गए कई बुजुर्ग ग्रामीण इलाकों से आए थे, जहां पेंशन बहुत कम है और सरकारी सेवाएं कमजोर हैं। इसके अलावा, अनगिनत गांव खाली हो गए हैं क्योंकि काम करने की उम्र के लोग दूसरी जगहों पर काम ढूंढ रहे हैं, जिससे कई बुजुर्ग अपने परिवारों से अलग-थलग पड़ गए हैं।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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