पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे
पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों का ऐसा मानना है कि हमलावर ड्रोन इन जालों में फंस सकते हैं। इससे ड्रोन हमले में होने वाला नुकसान 40 से 50% तक कम किया जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस तरीके को पूरी तरह भरोसेमंद मानने से इनकार किया है। आतंकी गोलीबारी से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे पुलिस के मुताबिक, जाल लगाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि आतंकियों ने हमले का तरीका बदल दिया है। अब वे गोलीबारी और मोर्टार के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में 29 जुलाई को सबसे घातक हमलों में से एक हुआ था। बम से भरे ड्रोन से पुलिस चौकी पर हमला किया। इसमें 11 पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद कई घंटे तक चली मुठभेड़ में 15 हमलावर भी मारे गए। पुलिस के मुताबिक, इस साल खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं। इसी वजह से यह जिला प्रांत के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल है। ऐसे हमलों से बचने के लिए हंगू पुलिस ने कम लागत वाला तरीका अपनाया। पुलिस चौकी की छत और चारदीवारी के बीच कई मीटर ऊपर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए। इससे चौकी के ऊपर एक तरह की जालीदार छत बन गई। एक चेकपोस्ट पर करीब 1 लाख रुपए खर्च हंगू के जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब के मुताबिक, एक सामान्य पुलिस चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 1.4 लाख रुपए खर्च होते हैं। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, हंगू के अलावा कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे कम से कम 5 और संवेदनशील जिलों में भी पुलिस चौकियों और चेकपोस्ट पर ये जाल लगाए गए हैं। प्रांत के कुछ इलाकों में सेना के ठिकानों पर भी ‘एंटी-ड्रोन जाल’ लगाए गए हैं। पुलिस ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रांतीय सरकार से अतिरिक्त पैसे भी मांगे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों को इस तरीके पर भरोसा नहीं इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने इसे नासमझी वाला सस्ता तरीका बताया। उनके मुताबिक, आतंकियों का निशाना हमेशा पुलिस स्टेशन या चेकपोस्ट ही नहीं होते। ड्रोन का इस्तेमाल बड़े और जरूरी ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जाता है, ताकि हमले का असर ज्यादा दिखाई दे और लोगों में डर पैदा हो। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन के हवा में उठते ही उसे रोकने की क्षमता रखती हैं। यूक्रेन में भी इस्तेमाल हुआ है ऐसा तरीका पेशावर के आतंकवाद और सुरक्षा विशेषज्ञ फिदा अदील ने बताया कि मछली पकड़ने वाले जाल से ड्रोन रोकना कोई नया तरीका नहीं है। सेना पहले से ही सामान और ठिकानों को छिपाने के लिए ऐसे जाल इस्तेमाल करती रही है। यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन को रोकने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, अदील के मुताबिक, विस्फोटक से भरे ड्रोन के खिलाफ जाल कितना काम करेगा, यह उसके डिजाइन और उसे लगाने के तरीके पर निर्भर करता है। उन्होंने पुलिस के 40 से 50% नुकसान कम होने के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि असली हमले या सही परीक्षण के बिना इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हो सकती। --------------------- यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने अब सऊदी अरब को सीधे सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच पाकिस्तान और तुर्किये भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य बल तैनात करने की तैयारी में हैं। पूरी खबर पढ़ें…
फ्रांस में शिक्षकों की कमी को लेकर आंदोलन हिंसक हुआ:धमाके में 15 साल के छात्र का हाथ उड़ा; 5 हजार गिरफ्तार, 87% गिरफ्तार नाबालिग
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र सड़कों पर उतर गए हैं। सितंबर में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। छात्र स्कूलों में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी का विरोध कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में छात्रों ने सैकड़ों स्कूलों को बंद कराया। आंदोलन के दौरान कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले पिछले हफ्ते 14 साल के ईडन नाम के छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ था और उसे बड़ी सर्जरी करानी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान कम से कम 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 87% नाबालिग हैं। मंगलवार को देशभर में सबसे बड़े प्रदर्शन का ऐलान मंगलवार को छात्रों के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन की तैयारी है। प्रमुख छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लिसेन ने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। शिक्षकों के संगठनों ने भी अपने सदस्यों से प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके मुकाबले कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षा कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ कदमों की घोषणा की है। उन्होंने स्कूलों में बदलाव लाने का वादा किया है। हालांकि, हिंसा को लेकर उन्होंने साफ कहा है कि सरकार नरमी नहीं बरतेगी। प्रदर्शन के दौरान कई जगह स्कूलों की नाकेबंदी की गई और कूड़ेदानों में आग लगाई गई। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे के मुताबिक आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों को जला दिया गया या उनमें तोड़फोड़ की गई। 21 सितंबर को छोटे से विरोध से शुरू हुआ आंदोलन आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों की मांग थी कि स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर की जाए। स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक दूसरे इलाकों में भी विरोध शुरू हो चुका था। इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी आंदोलन में शामिल हो गए। छात्र नेता मानेस नडेल के मुताबिक, जब शुरुआती स्कूल में हड़ताल खत्म हुई, तब तक दूसरे इलाकों में आंदोलन फैल चुका था। उनका दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूल पहले कभी किसी आंदोलन में शामिल नहीं हुए थे। स्कूलों में छात्र बढ़े, शिक्षक घटे फ्रांस में एक साथ कई मोर्चों पर संकट फ्रांस में इस समय विरोध सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरे भी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारी: सरकार के खर्च कम करने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें डर है कि बजट कटौती का असर उनकी सैलरी और दूसरी सुविधाओं पर पड़ेगा। शिक्षक: स्कूलों में शिक्षकों की कमी और काम के बढ़ते दबाव के साथ सरकार की बजट नीतियों का विरोध कर रहे हैं। फायर फाइटर: बेहतर संसाधन, फंडिंग और काम करने की सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। गर्मियों में लगी बड़ी जंगल की आग के बाद उनके पास पर्याप्त संसाधन होने का मुद्दा भी उठा है। स्वास्थ्यकर्मी: सरकारी खर्च और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को पर्याप्त संसाधन मिलने चाहिए। मछुआरे: डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। महंगे ईंधन से मछली पकड़ने का खर्च बढ़ गया है, इसलिए उन्होंने बंदरगाहों और ईंधन टर्मिनलों को रोक दिया है। ईरान युद्ध से ईंधन महंगा हुआ फ्रांस की परेशानी में महंगे ईंधन ने भी इजाफा किया है। ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। स्थिति संभालने के लिए G7 देशों ने अपने भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उम्मीद है कि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें जल्दी कम होंगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी मुश्किल- पैसा कहां से लाएं फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है। यह देश की सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119% के बराबर है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने से इस कर्ज को संभालने का खर्च भी बढ़ रहा है। 2027 में कर्ज पर ब्याज चुकाने का खर्च करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। फ्रांस की आबादी बूढ़ी हो रही है। इसलिए पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण रक्षा खर्च भी बढ़ा है। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें… स्पेन में किराएदार को घर से निकालने पर सरकार गिरी:87 साल की महिला महंगा किराया नहीं चुका पाई; 8 महीने पहले चुनाव होंगे स्पेन में 87 साल की एक महिला को घर से निकालना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। महंगे किराए और लोगों को घर से निकाले जाने के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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