एलन मस्क रखें ध्यान, भारत कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं : राम माधव
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर एलन मस्क और राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर अब सियासत तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव ने दोनों को आड़े हाथों लिया है।
राम माधव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, एलन मस्क को ध्यान में रखना चाहिए कि भारत कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है, जहां वह जैसे चाहे बयान दे सकें। भारत में स्पेक्ट्रम और टेलीकॉम से जुड़े सभी मामले कानून और नियमों से चलते हैं। यह मोदी सरकार है और यहां सब कुछ पारदर्शी तरीके से और नियमों के अनुसार होगा।
उन्होंने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, मैं यह समझना चाहता हूं, क्योंकि राहुल गांधी हम पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर ट्रंप और मस्क के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाते थे, हमें सरेंडर वाली सरकार कहते थे। अब वह खुद क्यों सरेंडर हो गए हैं? वह इतनी जल्दी में क्यों हैं कि एलन मस्क को स्पेक्ट्रम मिल जाए?
राम माधव ने कहा कि भारत की कोई भी लीडिंग टेलीकॉम कंपनी हो, वह भी स्टारलिंक के साथ प्रतिस्पर्धा में है। जो भी नियम हैं, बिना किसी भेदभाव के नियम के अनुसार ही सब होगा।
उन्होंने कहा कि सबसे मजेदार बात राहुल गांधी के उतावलेपन की है। जो राहुल गांधी पहले कहते थे कि भारत के प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और बिजनेसमैन मस्क के सामने सरेंडर कर गए, वही राहुल गांधी आज खुद सरेंडर हो गए हैं। राहुल गांधी क्यों उतावले हो रहे हैं और कह रहे हैं कि एलन मस्क को स्पेक्ट्रम दिला दिया जाए।
राम माधव ने कांग्रेस संचार महासचिव जयराम रमेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो जयराम रमेश पहले कहते थे कि स्टारलिंक देश की सिक्योरिटी के लिए खतरा बन सकता है, वहीं उनके नेता राहुल गांधी एलन मस्क की सिफारिश कर रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय भ्रष्टाचारी स्पेक्ट्रम तंत्र चलाया गया था। यह मोदी सरकार है, यहां सब कुछ नियम-कायदे से चलता है। कोई भी कितना भी बड़ा हो, उसे भी नियम के दायरे में रहकर ही ट्रीट किया जाएगा।
दरअसल, एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?
इसी पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा था, भारत में आपका स्वागत है, एलन।
--आईएएनएस
वीकेयू/एबीएम
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JSSC CGL मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, परीक्षा रद्द करने पर सुनवाई हुई पूरी
JPSC JSSC Scam: झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य और सरकारी नौकरियों की बहाली से जुड़े दो बड़े मामलों पर राज्य की न्यायपालिका में हलचल तेज हो गई है. झारखंड हाई कोर्ट ने बहुचर्चित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत में चली लंबी और गंभीर बहस के दौरान अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के वकीलों ने अपने-अपने पक्ष रखे.
एक तरफ जहां अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने की प्रक्रिया और निर्णय पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए परीक्षा में सामने आए भ्रष्टाचार और पेपर लीक का हवाला देकर रद्दीकरण के कदम को पूरी तरह जायज ठहराया है. इस फैसले के सुरक्षित होने के साथ ही पूरे राज्य के प्रतियोगी छात्रों की नजरें अब हाई कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिक गई हैं. इसके साथ ही झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी से जुड़े विज्ञापन रद्दीकरण विवाद पर भी अदालत में सुनवाई आगे बढ़ रही है, जिससे राज्य का भर्ती परिदृश्य इस समय बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है.
अदालत में पूरी हुई सुनवाई और फैसला सुरक्षित
झारखंड हाई कोर्ट के समक्ष जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार और आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लगातार सुनवाई चल रही थी. दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने अपनी विस्तृत दलीलें अदालत की पीठ के सामने रखीं. प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि महीनों की कठिन तैयारी और मेहनत के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन बिना ठोस और पारदर्शी जांच के पूरी परीक्षा को एक झटके में रद्द कर देना लाखों निर्दोष और मेधावी युवाओं के साथ घोर अन्याय है.
अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि कुछ केंद्रों पर या कुछ लोगों द्वारा गड़बड़ी की गई थी, तो केवल दोषियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी, न कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही समाप्त कर दिया जाता. सभी पक्षों को विस्तार से सुनने और जरूरी दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने सुनवाई की प्रक्रिया पूरी घोषित कर दी और इस अहम मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अब अदालत का यह सुरक्षित निर्णय ही तय करेगा कि परीक्षा रद्दीकरण का फैसला मान्य रहेगा या फिर आयोग को इस पर नए सिरे से विचार करना होगा.
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