Noida का Jewar Airport अब Narendra Modi International Airport कहलाएगा, Yogi Cabinet ने फैसले पर लगाई मुहर
उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से नई पहचान देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा (जेवर)’ रखने का प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री ने लोकभवन के मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी। इस फैसले पर जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश मंत्रिपरिषद का आभार जताया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 25 वर्ष की सार्वजनिक सेवा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि सात अक्टूबर को इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे हुए हैं। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद ने उनके योगदान के अभिनंदन में विशेष प्रस्ताव भी पारित किया।
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उधर, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के फैसले को क्षेत्र के विकास से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक एयरपोर्ट के नामकरण का निर्णय नहीं, बल्कि उस नेतृत्व के सम्मान का प्रतीक है, जिसके मार्गदर्शन में जेवर को वैश्विक विमानन और औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने कहा कि कभी मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला जेवर आज अंतरराष्ट्रीय निवेश, औद्योगिक विकास, रोजगार और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस विकास यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। धीरेंद्र सिंह ने क्षेत्र के किसानों और स्थानीय नागरिकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जेवर के विकास में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित नाम वाला एयरपोर्ट आने वाले समय में विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की पहचान बनेगा।
पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश प्रशासनिक शिथिलता, असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पारदर्शी और तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया, जिससे कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल में सुधार हुआ।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून, दिल्ली-मेरठ और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत ट्रेन सेवा और लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को भी उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि दादरी में पूर्वी और पश्चिमी समर्पित मालवाहक रेल गलियारों का जंक्शन प्रदेश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ा रहा है। वाराणसी में मल्टीमॉडल इनलैंड पोर्ट टर्मिनल और फ्रेट विलेज, लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल असेंबली यूनिट, रक्षा औद्योगिक गलियारा तथा प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाएं प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को विस्तार दे रही हैं।
किसानों, गरीबों और युवाओं के लिए योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों के खातों में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भेजी गई है। उन्होंने 86 लाख लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसली ऋण और गन्ना किसानों को किए गए भुगतान का भी विवरण दिया।
आवास, खाद्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के संबंध में उन्होंने बताया कि प्रदेश में 65 लाख से अधिक गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन, स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शौचालय और उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिए गए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी कार्ड और मुफ्त उपचार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में एम्स, स्वास्थ्य मेलों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी काम हुआ है। रोजगार के संबंध में उन्होंने साढ़े नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियों, निजी क्षेत्र में नियुक्तियों और युवाओं को स्मार्टफोन एवं टैबलेट वितरित किए जाने की जानकारी दी।
उद्योग, महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक विरासत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में रक्षा उत्पादन, वस्त्र उद्योग और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क, रक्षा औद्योगिक गलियारा और ब्रह्मोस परियोजना को उन्होंने औद्योगिक विकास की प्रमुख पहलों में शामिल किया। उनके मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों से एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जबकि पीएम स्वनिधि और स्वामित्व योजना के माध्यम से रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं तथा ग्रामीण परिवारों को सहायता मिली है।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, काशी तमिल संगमम और महाकुंभ जैसी पहलों को प्रदेश की पहचान से जोड़ा। उन्होंने ओडीओपी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और कृषि उत्पादन में उत्तर प्रदेश की भूमिका का भी उल्लेख किया।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की सार्वजनिक सेवा यात्रा का अभिनंदन करते हुए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत-2047 के संकल्प को दोहराया है। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पत्रकार वार्ता में दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और अनिल कुमार भी मौजूद रहे।
हम आपको बता दें कि जेवर एयरपोर्ट के नामकरण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे आगे की औपचारिक प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव के अंतिम क्रियान्वयन और नाम के आधिकारिक उपयोग की स्थिति संबंधित सरकारी अधिसूचना एवं आवश्यक मंजूरियों के बाद स्पष्ट होगी।
पूरा ट्रांसपोर्ट बंद नहीं कर सकते, मेट्रो और ट्रेन रद्द करने पर दोबारा करें विचार, CJP प्रोटेस्ट से पहले पाबंदियों पर सरकार को SC का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के उस फ़ैसले पर गंभीर चिंता जताई, जिसमें उसने दिल्ली मेट्रो को शनिवार को 57 स्टेशन बंद करने का निर्देश दिया था। शनिवार को ही राजधानी में CJP की एक रैली होनी है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि इस कदम से उन नागरिकों के अधिकारों पर असर पड़ेगा जो इन सेवाओं का इस्तेमाल करने के हकदार हैं। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध करने के अधिकार और दूसरे नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कई सीनियर वकीलों - जिनमें कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर शामिल थे - की दलीलें सुनीं। इन वकीलों ने शनिवार के विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस द्वारा लगाई गई कड़ी पाबंदियों पर सवाल उठाए।'
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वकीलों ने मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनें रद्द करने, आवाजाही पर रोक लगाने और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) व होटलों को दिए गए उन निर्देशों पर चिंता जताई, जिनसे लोगों को इकट्ठा होने या दिल्ली आने से रोका जा सकता था। सिब्बल ने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय राजधानी में ऐसी पाबंदियां कैसे लगाई जा सकती हैं, जबकि सिंघवी ने तर्क दिया कि जब कोई घटना ही नहीं हुई है, तो इतने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाने को सही नहीं ठहराया जा सकता। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन कदमों का बचाव करते हुए कहा कि इनका मकसद कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। बेंच ने कहा कि इन पाबंदियों से आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं और इस बात पर ज़ोर दिया कि विरोध करने के अधिकार और ज़रूरी सुविधाओं तक आम लोगों की पहुँच के बीच संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत है।
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जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा हमें विरोध करने के इच्छुक नागरिकों के अधिकारों और आम जनता के बुनियादी सुविधाओं तक पहुँचने के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत है।" उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर पुलिस की कार्रवाई ज़रूरत से ज़्यादा (disproportionate) लग रही थी।
कोर्ट ने सभी तरह की पाबंदियों पर सवाल उठाए
सुनवाई के दौरान, वकीलों ने तर्क दिया कि पाबंदियां विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी हद से ज़्यादा थीं। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो बंद होने, दिल्ली की सीमाओं पर जांच और होटलों को नई बुकिंग न लेने के निर्देशों का हवाला दिया।
सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और ट्रेनों के रद्द होने से लाखों यात्रियों पर असर पड़ेगा, न कि सिर्फ़ उन लोगों पर जो विरोध-प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को आने-जाने की आज़ादी और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने का अधिकार है। वकीलों ने पुलिस की उन सलाहों पर भी चिंता जताई जिनमें लोगों से बाहर न निकलने या सार्वजनिक जगहों पर इकट्ठा न होने के लिए कहा गया था। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या होटलों और पेइंग गेस्ट आवासों में पुलिस के जाने और पूछताछ करने के दावों को रिकॉर्ड पर रखा गया है।
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