अमेरिका की आई सामत! ईरान संघर्ष के बीच रूस का बड़ा एलान, राष्ट्रपति पेजेश्कियन से मिले पुतिन
US Iran Conflict: अमेरिका ईरान के बीच साल की शुरूआत से संघर्ष चल रहा है. हालांकि एक बार फिर दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर चर्चा चल रही है. इसी बीच रूस ने बड़ा एलान किया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को तुर्कमेनिस्तान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों और क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की. पुतिन ने भरोसा दिलाया कि क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने में मदद के लिए रूस अपनी पूरी ताकत लगाने को तैयार है.
रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक की शुरुआत में पुतिन ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा मुद्दा क्षेत्र में जारी संघर्ष है. उन्होंने कहा कि रूस जानता है कि ईरान इस संघर्ष को खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है. पुतिन ने दावा किया कि यह संघर्ष ईरान की गलती के बिना शुरू हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से विवाद सुलझाने के लिए नए प्रस्ताव पेश किए हैं.
???? President #Putin to @drpezeshkian during their meeting in Turkmenistan:
— MFA Russia ???????? (@mfa_russia) October 8, 2026
We know that Iran is making concrete efforts to end the conflict that broke out in the region through no fault of its own.
???? Russia is ready to help you resolve this situation.https://t.co/Aa6picbXkF pic.twitter.com/CZ5MBQ8mo7
क्या बोले रूसी राष्ट्रपति पुतिन?
पुतिन ने आगे कहा कि राष्ट्रपति महोदय, आप हमारी स्थिति को जानते हैं. हम इस संकट को सुलझाने में आपकी मदद के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि इस बैठक से रूस और ईरान के आपसी संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चर्चा करने का मौका मिला है.
पुतिन ने कहा कि हाल ही में बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेता मिले थे. अब इस बैठक में उन्हें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, क्षेत्र के हालात पर चर्चा करने और मौजूदा समस्याओं के समाधान के रास्ते तलाशने का अवसर मिला है. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच हुए बुनियादी समझौते के बाद से उनके संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं. रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पुतिन ने दोनों देशों के बीच सहयोग को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने वाला बताया.
वेंस बोले-वीजा लेकर अमेरिका में काम करने वाले बंधुआ मजदूर:भारत का जवाब- अमेरिकी अर्थव्यवस्था यही संभाल रहे; H-1B वीजा लेने वालों मे 71% भारतीय
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया है। भारत ने वेंस के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रवासियों की अहम भूमिका रही है। भारत ने यह भी कहा कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, रिसर्च और रोजगार बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं। इससे दोनों देशों को फायदा होता है। अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में 71% भारतीय हैं। वेंस बोले- विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकियों को नौकरी दें वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर वीजा व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी लोगों को नौकरी देनी चाहिए। वेंस के मुताबिक, पिछले एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी दौरान कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का फायदा मिला। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही। H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड में क्या अंतर है H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। वहीं, ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। ग्रीन कार्ड के लिए PERM प्रक्रिया के तहत कंपनी को यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं था और विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी या काम करने की स्थिति पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। 8 आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर रोक अमेरिकी सरकार ने 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट के साथ माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी लोगों के रोजगार के अवसर कम कर रही हैं। हालांकि, PERM प्रक्रिया पर रोक लगने से पहले से जारी H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते। लेकिन इन कंपनियों के जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया चल रही है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे:मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने डेमोक्रेट्स को वोट दिया था अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









