Explainer: अमेरिका में भारतीय IT कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की राह मुश्किल, Infosys-TCS समेत 8 कंपनियों पर PERM रोक का क्या होगा असर?
अमेरिका में काम करने वाले भारतीय IT पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करना और मुश्किल हो सकता है. अमेरिकी सरकार की ओर से Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe से जुड़ी PERM प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने की खबर ने विदेशी कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. इनमें चार भारतीय IT कंपनियां हैं. इस कार्रवाई से उन कर्मचारियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो नौकरी के आधार पर अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करना चाहते हैं.
अमेरिकी अधिकारियों के आरोप हैं कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों का गलत इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन पर असर पड़ सकता है. हालांकि, इस मामले में कंपनियों की स्थिति, रोक की वास्तविक अवधि और प्रत्येक कर्मचारी पर पड़ने वाला प्रभाव को समझना जरूरी है. PERM प्रक्रिया रुकने का मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों में काम करने वाले सभी विदेशी कर्मचारियों का वीजा रद्द हो गया है.
1. PERM प्रक्रिया क्या है और ग्रीन कार्ड में इसकी भूमिका क्या है?
PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है. यह अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है. सामान्य तौर पर, जब कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी पर रखना चाहती है, तो उसे अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor) से लेबर सर्टिफिकेशन प्राप्त करना पड़ सकता है.
इस प्रक्रिया में कंपनी को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं या विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप है. इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी और कामकाज की परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
PERM मंजूर होने के बाद नियोक्ता आम तौर पर कर्मचारी के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया शुरू कर सकता है. इसमें संबंधित श्रेणी के अनुसार इमिग्रेशन याचिका और बाद के चरण शामिल होते हैं.
इसलिए PERM पर रोक लगने से उन कर्मचारियों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है, जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है. हालांकि, हर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड मामले में PERM जरूरी नहीं होता। कुछ श्रेणियों में इसके बिना भी आवेदन किया जा सकता है.
.@Sonderling47: "I am hereby suspending from the Permanent Labor Certification Program some of the largest IT outsourcing firms in the world — Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL, and Capgemini — and also, due to multiple active federal investigations, @USDOL is suspending… https://t.co/ENyAFHSo93 pic.twitter.com/DZXcRMp22L
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) October 8, 2026
2. अमेरिका ने आठ कंपनियों पर कार्रवाई क्यों की?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इन कंपनियों की विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और लेबर सर्टिफिकेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं. सरकार की चिंता यह है कि विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए बनाए गए नियमों का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए, जिससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हों.
बताया गया है कि संबंधित कंपनियों ने 2009 से अब तक बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए और उन्हें काफी संख्या में H-1B वीजा तथा लेबर सर्टिफिकेशन मिले. लेकिन किसी कंपनी के विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने या बड़ी संख्या में आवेदन करने से अपने आप नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित आदेश, जांच के निष्कर्ष और कंपनियों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे.
यदि रोक के तहत नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते और लंबित मामलों पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो प्रभावित कंपनियों के कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया तब तक आगे नहीं बढ़ पाएगी, जब तक संबंधित प्रतिबंध हटता नहीं या कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं होती.
3. क्या H-1B वीजा भी रद्द हो जाएगा?
यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. H-1B वीजा और PERM प्रक्रिया दोनों अलग-अलग हैं. H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को निर्धारित शर्तों के तहत अस्थायी रूप से नौकरी पर रखने की अनुमति देता है. वहीं, PERM स्थायी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का हिस्सा है.
इसलिए PERM प्रक्रिया पर रोक लगने से किसी कर्मचारी का मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं हो जाता. कर्मचारी अपनी मौजूदा वीजा स्थिति और लागू नियमों के अनुसार अमेरिका में काम जारी रख सकता है.
हालांकि, जिन कर्मचारियों को वीजा विस्तार, नौकरी बदलने या ग्रीन कार्ड प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जरूरत है, उन्हें अलग-अलग स्तरों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. H-1B की अवधि, विस्तार की पात्रता और नौकरी बदलने के नियम व्यक्ति की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं. यह कहना सही नहीं होगा कि छह साल पूरे होते ही हर कर्मचारी को अनिवार्य रूप से अमेरिका छोड़ना पड़ेगा. कुछ परिस्थितियों में कानून के तहत अतिरिक्त समय या विस्तार संभव हो सकता है.
4. भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लंबा इंतजार क्यों करना पड़ता है?
अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की मांग और उपलब्ध वीजा की संख्या के बीच बड़ा अंतर है. इसके अलावा, अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में एक देश के नागरिकों को मिलने वाले ग्रीन कार्ड पर भी सीमाएं लागू होती हैं. भारतीय आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण उनका बैकलॉग काफी लंबा हो गया है.
नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भारतीयों की हिस्सेदारी बहुत अधिक है. कुछ अनुमानों में जनवरी 2026 में प्रक्रिया शुरू करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए EB-1 में चार से पांच साल, EB-2 में 179 साल और EB-3 में 38 साल तक का संभावित इंतजार बताया गया है.
लेकिन इन आंकड़ों को निश्चित समय-सीमा नहीं समझना चाहिए. ये अनुमान हैं, किसी व्यक्ति को ग्रीन कार्ड मिलने की गारंटी या आधिकारिक व्यक्तिगत समय-सारणी नहीं. वास्तविक प्रतीक्षा अवधि प्राथमिकता तारीख, रोजगार श्रेणी, उपलब्ध वीजा, आवेदन की स्थिति और भविष्य में नियमों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करती है.
5. अक्टूबर 2026 के वीजा बुलेटिन का क्या मतलब है?
रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए अमेरिकी विदेश विभाग हर महीने वीजा बुलेटिन जारी करता है. इसमें अलग-अलग श्रेणियों और देशों के लिए प्राथमिकता तारीखों की जानकारी दी जाती है. इससे पता चलता है कि किन आवेदकों के मामले में आगे की प्रक्रिया संभव हो सकती है.
दी गई जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के बुलेटिन में भारतीय आवेदकों के लिए EB-2 श्रेणी में उन मामलों की बारी आ सकती है, जिनकी प्राथमिकता तारीख 1 नवंबर 2013 से पहले की है। EB-3 में संबंधित तारीख 1 जनवरी 2014 से पहले की बताई गई है.
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि वीजा बुलेटिन में प्राथमिकता तारीख का आगे बढ़ना और PERM आवेदन पर लगी रोक दो अलग-अलग बातें हैं. किसी श्रेणी में वीजा उपलब्ध होने की स्थिति बनने के बावजूद, यदि किसी कर्मचारी को आवश्यक लेबर सर्टिफिकेशन या अन्य दस्तावेज नहीं मिल पाते, तो उसकी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. वास्तविक पात्रता संबंधित बुलेटिन के लागू चार्ट और व्यक्तिगत मामले पर निर्भर करेगी.
6. कर्मचारियों और उनके परिवारों पर क्या असर पड़ सकता है?
ग्रीन कार्ड का इंतजार केवल नौकरी से जुड़ा मामला नहीं होता. इसके साथ कर्मचारियों की पारिवारिक और आर्थिक योजनाएं भी जुड़ी रहती हैं. लंबे समय तक स्थायी निवास न मिलने से घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा, बचत, नौकरी बदलने और भविष्य की योजना बनाने में अनिश्चितता बढ़ सकती है.
यदि किसी कर्मचारी की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया मौजूदा कंपनी के जरिए शुरू हुई है और वह नौकरी बदलना चाहता है, तो नई कंपनी के साथ प्रक्रिया की स्थिति की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है. कुछ मामलों में नई PERM प्रक्रिया की जरूरत हो सकती है, जबकि अन्य मामलों में पहले से हासिल की गई प्रक्रिया के चरणों का उपयोग संभव हो सकता है. यह कर्मचारी की प्राथमिकता तारीख, याचिका की स्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करेगा.
ऐसे में प्रभावित कर्मचारियों के लिए अपनी इमिग्रेशन स्थिति की समीक्षा करना और योग्य इमिग्रेशन वकील से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है. बिना स्थिति समझे नौकरी छोड़ना या वीजा संबंधी फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है.
7. TCS ने क्या कहा?
TCS ने अपने बयान में कहा है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों का पालन करेगी. कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने पर आधारित है. इसके लिए वह कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से भी कर्मचारियों की भर्ती करती है.
कंपनी ने अमेरिका में अपने 31 कार्यालयों और डिलीवरी सेंटरों का जिक्र करते हुए अगले पांच साल में 15,000 और लोगों को नौकरी देने की योजना बताई है. TCS के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन सिंगल डिजिट में रहे हैं. इसी आधार पर कंपनी का मानना है कि इस रोक से उसकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
यह कंपनी का अपना पक्ष है. अन्य प्रभावित कंपनियों पर कार्रवाई के संभावित प्रभाव को समझने के लिए उनके अलग-अलग बयान और अमेरिकी अधिकारियों के आदेश भी महत्वपूर्ण होंगे.
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ट्रोलिंग पर कटरीना कैफ का जवाब:दूसरों की सुनेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे; डिलीवरी के बाद लुक को लेकर हुईं ट्रोल, सलमान सपोर्ट कर चुके
एक्ट्रेस कटरीना कैफ ने डिलीवरी के बाद लुक को लेकर हुईं ट्रोलिंग पर जवाब दिया है। उन्होंने ट्रोलिंग से अपनी सेल्फ-वर्थ को बचाकर रखने की सलाह दी है। यूके में अपने कॉस्मेटिक ब्रांड की सालगिरह के कार्यक्रम के दौरान कटरीना ने कहा कि दूसरों की बातों पर ध्यान देने से खुद के फैसले लेने की क्षमता प्रभावित होती है। 43 साल की कटरीना ने कहा कि जिंदगी के हर दौर में खुद को स्वीकार करना जरूरी है। दूसरों की सुनते रहेंगे तो जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाएंगे। कटरीना कैफ का यह बयान उनके पोस्टपार्टम लुक को लेकर सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग के एक महीने बाद आया है। हाल ही में मां बनीं कटरीना को अंबानी परिवार के गणेश चतुर्थी उत्सव में उनके बढ़े हुए वजन के लिए सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया था। 'ऑनलाइन चल रही बातों को हावी ना होने दें' कटरीना कैफ ने कहा कि सोशल मीडिया पर हर किसी की अपनी राय होती है। ऐसे में ऑनलाइन चल रही बातों को अपने आत्मसम्मान पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आप हर इंसान की राय के हिसाब से चलने लगेंगे, तो अपने लिए फैसले लेने की क्षमता खो देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार दुनिया आपका जश्न मनाती है और कई बार आपको खुद ही अपना सबसे बड़ा सपोर्टर बनना पड़ता है। 'दूसरों की सुनने से आगे बढ़ना मुश्किल होगा' कटरीना ने आगे बताया कि लगातार दूसरों की बातों पर प्रतिक्रिया देने से इंसान खुद को आगे बढ़ाने में असमर्थ महसूस कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर वे हर आलोचना या टिप्पणी को अपने फैसलों पर हावी होने देतीं, तो जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पातीं। उनके मुताबिक, आत्मविश्वास और खुद को देखने का जरिया हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कुछ दिन बहुत अच्छे होते हैं और कुछ दिनों में खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जिंदगी के हर पड़ाव को स्वीकारना जरूरी कटरीना कैफ ने इस बात पर जोर दिया कि इंसान को मौजूदा वक्त में अपनी असल पहचान के साथ रहना चाहिए। व्यक्तिगत सुधार और बदलाव एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने सलाह दी कि खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने की बजाय जिंदगी के उतार-चढ़ाव को सामान्य तरीके से स्वीकार करना चाहिए। अपनी भावनाओं और हालातों में आने वाले बदलावों को समझना ही खुद के साथ सहज होना सिखाता है। कटरीना की ट्रोलिंग के बाद भड़के सलमान टीवी शो ‘बिग बॉस 20’ के दूसरे ‘वीकेंड का वार’ में शनिवार को ट्रोलर्स पर जमकर भड़के थे। सलमान खान ने बॉडी-शेमिंग और एज-शेमिंग पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा कि कटरीना को ट्रोल किया गया। उन्हें भी ‘बूढ़ा हो गया’ कहा गया है। इसके बाद सलमान ने बीच शो में अपनी टी-शर्ट उतारकर एब्स दिखाए। नवंबर 2025 में दिया बेटे को जन्म कटरीना कैफ ने 7 नवंबर 2025 को बेटे को जन्म दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए लिखा था, ‘हमारी खुशियों का पिटारा आ गया है। बहुत सारे प्यार आभार के साथ हम अपने बेटे का स्वागत करते हैं। 7 नवंबर 2025। कटरीना और विक्की।’ अब तक कपल ने बेटे की तस्वीर सार्वजनिक नहीं की है। दो सालों से फिल्मों से दूर हैं कटरीना कैफ कटरीना कैफ को आखिरी बार साल 2024 की फिल्म मैरी क्रिसमस में देखा गया है। फिल्म में उनके साथ विजय सेतुपति लीड रोल में थे। इसके बाद से ही एक्ट्रेस किसी फिल्म में नजर नहीं आई हैं। इस साल भी उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं होगी। शादी के 4 साल बाद बनीं मां कटरीना कैफ ने 9 दिसंबर 2021 में एक्टर विक्की कौशल से शादी की थी। दोनों की पहली मुलाकात एक अवॉर्ड शो में हुई थी, जिसके बाद दोनों चंद मुलाकातों के बाद रिलेशनशिप में आ गए थे। कपल ने हिंदू रीति-रिवाजों से राजस्थान के सवई माधौपुर के सिक्स सेंस रिसोर्ट में शादी की है। ये खबर भी पढ़ें मां बनने के बाद पहले जैसी बॉडी की उम्मीद क्यों?:सिर्फ कटरीना कैफ नहीं, ऐश्वर्या राय, करीना कपूर समेत कई अभिनेत्रियों की हुई ट्रोलिंग साल 2026 में भी महिलाओं के शरीर को लेकर बनी पुरानी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर फिल्म इंडस्ट्री में एक्ट्रेसेस से मां बनने के बाद भी पहले जैसी बॉडी और ग्लैमरस लुक की उम्मीद की जाती है। पूरी खबर पढ़ें
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