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छोटे कारोबारियों की बल्ले-बल्ले! GST में अब नहीं होगी गिरफ्तारी, 3 दिन में मिलेगा रिफंड...

GST Council Meeting: जीएसटी से जुड़े कागजी झंझट, लंबे इंतजार और जुर्माने के डर से जूझ रहे छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दरअसल, हाल ही में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में कई ऐसे फैसले लिए गए जिनका सीधा फायदा रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड और जुर्माने से जुड़ी रोजमर्रा की परेशानियों में मिलेगा. आइए आपको एक-एक कर बताते हैं कि किसे क्या लाभ होने वाला है.

GST की बैठक कहां हुई और इस बार क्या खास रहा?

बता दें कि यह बैठक दिल्ली के भारत मंडपम में हुई. खास बात यह रही कि इस बार काउंसिल ने टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक कारोबारियों का वास्ता रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और रिफंड से टैक्स की दरों के मुकाबले कहीं ज्यादा बार पड़ता है इसीलिए इस बार पूरा फोकस प्रक्रिया को आसान बनाने पर रखा गया है.

अब पहले के मुकाबले कागजी कार्रवाई कितनी घटेगी?

जानकारी के मुताबिक रजिस्ट्रेशन का फॉर्म इस तरह बदला जाएगा कि आवेदक को सिर्फ वही खाने भरने पड़ें जो उस पर लागू होते हैं और हर दस्तावेज का मकसद भी समझाया जाएगा. कारोबार का नाम बदलना, निदेशक या साझेदार बदलना और नई जगह जोड़ने जैसे नियमित बदलाव अपने आप स्वीकार हो जाएंगे. इसके अलावा 5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वालों (जो सिर्फ उपभोक्ताओं को बेचते हैं) के लिए एक वैकल्पिक योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है जिसमें वे टैक्स तो तिमाही देंगे लेकिन रिटर्न साल में सिर्फ एक बार भरेंगे.

रिफंड के लिए अब कितना इंतजार करना होगा?

रिफंड क्लेम का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है और अगर 10 दिन में न पावती मिले न कमी का नोटिस तो क्लेम को स्वीकृत मान लिया जाएगा. जानकारी के मुताबिक अब सिस्टम जोखिम के आकलन के आधार पर 90 प्रतिशत योग्य रिफंड बिना किसी अधिकारी के दखल के मंजूर कर देगा. इसके अलावा रिफंड का आदेश पावती के तीन कामकाजी दिनों के भीतर जारी होगा जबकि अभी इसमें सात दिन लगते हैं. 

जुर्माने और गिरफ्तारी का डर अब होगा खत्म 

काउंसिल ने जीएसटी में गिरफ्तारी का अधिकार हटाने की सिफारिश की है. अभियोजन की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है और सामान्य जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये किया जाएगा. 

कारोबारियों को छोटे नोटिसों से कितनी राहत मिलेगी?

नोटिस के लिए 10 हजार रुपये की न्यूनतम सीमा तय करने का प्रस्ताव है. बता दें इससे कम रकम के मामलों में कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा. सरकार के मुताबिक हर साल करीब 95 हजार सिस्टम-जनित नोटिस रिटर्न के अंतर को लेकर जारी होते हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 0.08 प्रतिशत रकम की ही वसूली हो पाती है. इनमें से कई मामले महज डेटा एंट्री की गलती के होते हैं.

इनपुट टैक्स क्रेडिट और माल की आवाजाही में क्या बदलेगा?

इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा भी बढ़ाया गया है. कर्मचारियों के लिए लिए गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री के बाहर बिछी पाइपलाइन पर अब क्रेडिट मिल सकेगा. इसके अलावा फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण नष्ट किए गए स्टॉक पर भी क्रेडिट मिलेगा. वहीं, माल की आवाजाही के मामले में किसी वाहन को सिर्फ खास खुफिया सूचना पर और कम से कम संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद ही रोका जा सकेगा.

ई-कॉमर्स पर बेचने वाले छोटे विक्रेताओं को क्या फायदा होगा?

अब छोटे विक्रेताओं को हर राज्य में अलग भौतिक कारोबारी जगह रजिस्टर कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे शर्तों और ई-कॉमर्स ऑपरेटर की सहमति के साथ दूसरे राज्य में स्थित ऑपरेटर के गोदाम को अपना प्रमुख कारोबारी स्थान घोषित कर सकेंगे. इससे उनके लिए देशभर में बिक्री का रास्ता काफी आसान हो सकता है.

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गर्भावस्था में हाई बीपी को न करें नजरअंदाज, मां और बच्चे की सेहत के लिए समय पर जांच बेहद जरूरी

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनमें ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी शामिल है। कई बार गर्भवती महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन ऐसा करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं मातृ मृत्यु और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। ऐसे में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है।

डब्ल्यूएचओ की मानें तो दुनियाभर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इनमें प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थिति भी शामिल है। गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़े विकारों के कारण हर साल दुनियाभर में लगभग 42 हजार महिलाओं की मौत होने का अनुमान है। इसके अलावा, इन समस्याओं के चलते पांच लाख से ज्यादा मृत-जन्म और नवजात शिशुओं की मौत के मामले भी सामने आते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कितनी महत्वपूर्ण है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित इलाज और निगरानी से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।

प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद हाई ब्लड प्रेशर विकसित होता है और इसके साथ शरीर के अंगों, खासकर किडनी या लिवर पर असर पड़ने के संकेत मिल सकते हैं। कई बार यूरिन में प्रोटीन की मात्रा भी पाई जाती है। अगर समय पर इसका पता न चले और इलाज न मिले, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखाई देना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, चेहरे और हाथों में अचानक सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, कई महिलाओं में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है।

डब्ल्यूएचओ ने गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली मौतों और जटिलताओं को रोकने के लिए 2026 से 2035 और उसके बाद तक की वैश्विक रणनीति पेश की है। इसका उद्देश्य बेहतर जांच, जरूरी दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और समय पर आपातकालीन इलाज को बढ़ावा देना है।

डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर यूरिन में प्रोटीन की मात्रा की जांच और अन्य टेस्ट भी कराए जाते हैं। स्थिति के अनुसार डॉक्टर दवाएं देते हैं और मां-बच्चे की निगरानी करते हैं।

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर का असर बच्चे के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में आगे चलकर हाई बीपी, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डिलीवरी के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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