मुरैना अस्पताल में पलंग के लिए मारपीट, महिला मरीजों के बीच जमकर चले लात-घूंसे, स्टाफ देखता रहा तमाशा
मुरैना के सरकारी अस्पताल में एक अजीब मामला सामने आया है। यहाँ के प्रसूति वार्ड में पलंग पर बैठने की बात पर दो महिलाएँ आपस में भिड़ गईं। शुरुआत में दोनों के बीच थोड़ी बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुँच गया। दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे के बाल पकड़े और धड़ाधड़ लात-घूँसे चलाना शुरू कर दिया।
वार्ड में भर्ती बाकी मरीज और उनके घरवाले यह सब देखकर डर गए। करीब आधे घंटे तक वार्ड में यह तमाशा चलता रहा। हैरत की बात यह रही कि इतना हंगामा होने पर भी अस्पताल की नर्स या कोई सिक्योरिटी गार्ड छुड़ाने नहीं आया। जब दोनों का मारपीट का वीडियो गुरुवार रात सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर मामले का पता चला।
आधे घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा
यह पूरी घटना बुधवार रात की है। वार्ड में बने एक पलंग पर जगह को लेकर दोनों में कहासुनी शुरू हुई थी। बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों का गुस्सा बेकाबू हो गया। लगभग 30 मिनट तक दोनों एक-दूसरे को पीटती रहीं। जब मारपीट करते-करते दोनों बुरी तरह थक गईं, तब जाकर खुद ही अलग हुईं और हंगामा बंद हुआ।
स्टाफ की लापरवाही पर उठे सवाल
इतने बड़े जिला अस्पताल में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड और नर्सिंग स्टाफ तैनात रहता है। इसके बावजूद किसी का ध्यान इतने लंबे हंगामे पर नहीं गया। अगर अस्पताल के कर्मचारी वक्त रहते बीच में आ जाते, तो यह विवाद वहीं रुक सकता था। इस घटना के बाद से अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिविल सर्जन ने निजी विवाद बताया
इस पूरे मामले पर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. गजेंद्र तोमर ने सफाई दी है। उनका कहना है कि यह दो महिलाओं के बीच का आपसी झगड़ा था और इसमें अस्पताल का कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि उन्होंने यह बात मानी कि वार्ड के अंदर इस तरह का माहौल बनना गलत था, क्योंकि इससे बाकी मरीजों को दिक्कत हुई।
गार्ड्स को दी गई पुलिस कार्रवाई की हिदायत
डॉ. तोमर ने बताया कि उन्होंने वार्ड में तैनात गार्ड्स को सख्त चेतावनी दे दी है। अब से अगर अस्पताल में कोई भी इस तरह का हंगामा करता है, तो गार्ड सीधे पुलिस को फोन करेंगे और कार्रवाई करवाएंगे। फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग अस्पताल प्रशासन की इस ढिलाई से काफी नाराज नजर आ रहे हैं।
MPPSC Assistant Professor भर्ती में बहु दिव्यांगों को आरक्षण नहीं, अभ्यर्थियों का सवाल “अलग-अलग योग्य तो इनका संयोजन अयोग्य कैसे”
मध्यप्रदेश में सहायक प्राध्यापक भर्ती को लेकर बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका इस बात का विरोध किया है कि MPPSC की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022, 2024 और 2025 में बहु दिव्यांग श्रेणी को आरक्षण और रोजगार के अवसर नहीं दिए गए। इस श्रेणी के लिए आरक्षित पदों को श्रवण बाधित, लोकोमोटिव और दृष्टिबाधित श्रेणियों में समायोजित कर दिया गया है।
बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग ने कार्य की प्रकृति के आधार पर उन्हें सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य नहीं माना है। इसी को लेकर उन्होंने सवाल किए हैं कि जब श्रवण बाधित, लोकोमोटिव और दृष्टिबाधित अभ्यर्थी इस पद के लिए योग्य हैं तो इनमें से दो या अधिक दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को अयोग्य मानने का आधार क्या है? उन्होंने कहा कि जब सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्य की प्रकृति के आधार पर श्रवण बाधित, लोकोमोटिव, दृष्टि बाधित को योग्य माना जा रहा है तो तो श्रवण बाधित + लोकोमोटिव या श्रवण बाधित + दृष्टि बाधित या दृष्टि बाधित+ लोकोमोटिव योग्य क्यों नहीं है, यह सबसे बड़ा सवाल पैदा करता है।
MPSET में भी आरक्षण नहीं मिलने का विरोध
अभ्यर्थियों ने MPPSC की ओर से आयोजित MPSET 2022-2025 को लेकर भी ये मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि इसमें भी बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं दिया गया है जबकि UGC NET और CSIR NET में इस श्रेणी को आरक्षण मिलता है।
बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अलावा स्कूल शिक्षा वर्ग-1 और तकनीकी शिक्षा के ITI में भी उन्हें कार्य की प्रकृति के आधार पर योग्य नहीं माना गया है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश के बाहर देश के अन्य हिस्सों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को योग्य माना जाता है।
अभ्यर्थियों ने अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप
अभ्यर्थियों ने इसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 में मिले अधिकारों से जोड़ा है। उनका आरोप है कि बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण और रोजगार के अवसर से बाहर रखने से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। बहु दिव्यांग अभ्यर्थियों ने इस पूरे मामले को उठाते हुए सहायक प्राध्यापक भर्ती में उन्हें आरक्षण और रोजगार का अवसर दिए जाने की मांग की है।
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