Responsive Scrollable Menu

फरीदाबाद में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान हंगामा! 'इंडिया' गठबंधन के प्रदर्शन में दो महिला नेता आपस में भिड़ीं, मारे थप्पड़

हरियाणा के फरीदाबाद में बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की दो महिला नेताओं ने एक-दूसरे को थप्पड़ मारे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बल्लभगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुकीं पराग शर्मा कांग्रेस का झंडा लेकर चलते हुए दिखाई दे रही हैं। गजना लांबा उनके साथ चल रही थीं। 

वीडियो में देखा जा सकता है कि जब लांबा ने पराग शर्मा से आगे निकलने की कोशिश की तो पराग ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद लांबा ने भी पराग को थप्पड़ मारा। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बलजीत कौशिक और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। कौशिक ने कहा कि दोनों महिला नेताओं के बीच हुआ विवाद जल्द ही समझौते के जरिए सुलझा लिया जाएगा।

वरिष्ठ नेताओं ने कराया बीच-बचाव
घटना के वक्त मौके पर मौजूद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बलजीत कौशिक और अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों नेताओं को अलग कर मामला शांत कराया।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष बलजीत कौशिक ने कहा कि यह नेताओं के बीच आपसी गलतफहमी का नतीजा था। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विवाद को जल्द ही आपस में बातचीत और समझौते के जरिए सुलझा लिया जाएगा।

Continue reading on the app

ट्रंप का भारतीय IT कंपनियों पर बड़ा एक्शन, TCS-इंफोसिस समेत कई कंपनियों का ग्रीन कार्ड प्रोग्राम सस्पेंड

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी श्रम विभाग ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है. माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी कंपनियों पर भी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है.

PERM प्रक्रिया अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने के सामान्य रास्ते का एक अहम हिस्सा है. इस पर रोक लगने से संबंधित कंपनियों के उन कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं. इस घटनाक्रम से भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ने की आशंका है.

अमेरिकी नौकरियों को लेकर ट्रंप प्रशासन ने उठाए सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड की व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित करने के लिए कर रही हैं. प्रशासन का कहना है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से अमेरिकी श्रमिकों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इसी आधार पर कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया और विदेशी कर्मचारियों से संबंधित आवेदनों की जांच किए जाने की बात कही गई है. हालांकि, कंपनियों पर लगाए गए आरोप प्रशासन का पक्ष हैं. इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, राहुल गांधी निकालेंगे राष्ट्रपति भवन तक मार्च

क्या एच-1बी वीजा पर काम कर रहे भारतीयों की नौकरी जाएगी?

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि PERM प्रक्रिया पर रोक लगने और एच-1बी वीजा पर काम करने की अनुमति के बीच अंतर है. उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई नई PERM अर्जियां स्वीकार करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया रोकने तक सीमित है. इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों में काम कर रहे सभी एच-1बी वीजा धारकों की नौकरी या वीजा अपने आप रद्द हो जाएगा. हालांकि, जिन कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया नियोक्ता के माध्यम से आगे बढ़ रही है, उनके लिए देरी और अनिश्चितता पैदा हो सकती है. भारतीय आईटी कंपनियों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थायी निवास मिलने से उन्हें अमेरिका में लंबे समय तक रहने और काम करने की योजना बनाने में मदद मिलती है.

माइक्रोसॉफ्ट पर भी लगाए गए आरोप

रिपोर्ट में माइक्रोसॉफ्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. जेडी वेंस के मुताबिक, कंपनी ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि इसी अवधि में बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा और PERM से जुड़े लाभ भी सामने आए. वेंस ने इन आंकड़ों के आधार पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बीच संबंध होने का आरोप लगाया. उनका दावा था कि कंपनियों की नीतियों से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, छंटनी और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के आंकड़ों के आधार पर अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि एक के कारण दूसरा हुआ है. इन आरोपों का आकलन करने के लिए संबंधित कंपनियों की भर्ती नीतियों और जांच के निष्कर्षों की जानकारी भी जरूरी है.

क्या भारतीय आईटी सेक्टर पर पड़ेगा असर?

अमेरिका भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को तकनीकी सेवाएं देती हैं. ऐसे में वीजा और स्थायी निवास से जुड़े नियमों में बदलाव का असर उनकी कारोबारी योजनाओं पर पड़ सकता है. अगर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया लंबे समय तक बाधित रहती है, तो कंपनियों को कर्मचारियों की तैनाती और अमेरिका में अपनी परियोजनाओं की दीर्घकालिक योजना बनाने में मुश्किल हो सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निलंबन कितने समय तक लागू रहता है, किन आवेदनों पर इसका प्रभाव पड़ता है और आगे अमेरिकी प्रशासन क्या फैसला लेता है. फिलहाल भारतीय आईटी निर्यात पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकता है असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रहने की बात कही जा रही है. ट्रंप प्रशासन पहले भी एच-1बी वीजा और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित नीतियों में सख्ती के संकेत दे चुका है. ऐसे में भारतीय आईटी कंपनियों पर कार्रवाई से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में अतिरिक्त तनाव पैदा होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर भारत सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी.

नौ अमेरिकी विश्वविद्यालय भी जांच के दायरे में

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत नौ विश्वविद्यालयों की जांच किए जाने की बात कही है. आरोप है कि ये संस्थान अंतरराष्ट्रीय छात्रों को प्रवेश देकर अमेरिकी श्रमिकों के वेतन और रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं. जांच में ब्राउन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के नाम भी शामिल बताए गए हैं. हालांकि, विश्वविद्यालयों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना जरूरी है.

आगे क्या होगा?

PERM कार्यक्रम पर कथित निलंबन से उन विदेशी कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि रोक का दायरा क्या होगा और लंबित आवेदनों पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल, कर्मचारियों और कंपनियों को अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक आदेशों और संबंधित विभागों की सूचनाओं पर नजर रखनी होगी. कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इसके कानूनी, कारोबारी और भारतीय आईटी क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का सही आकलन किया जा सकेगा.

ये भी पढ़ें: Breaking News Today Live Updates: क्या बंगाल में BJP को रोक पाएगी ममता बनर्जी? उपचुनाव की 6 सीटों के नतीजे थोड़ी देर में

Continue reading on the app

  Sports

आज भारत-वेस्टइंडीज समेत होंगे कुल आठ मैच, कब-कौन-किससे-कहां भिड़ेगा, नोट कर लीजिए सबकुछ

9 October all cricket match today: आज क्रिकेट फैंस का सुपर-फ्राइडे है. भारत-वेस्टइंडीज समेत दुनिया के अलग-अलग कोने में कुल नौ इंटरनेशनल मैच खेले जाएंगे. कहीं टी-20 का रोमांच होगा तो कहीं टेस्ट की गंभीरता देखने को मिलेगी, वनडे का समझदारी भरा क्रिकेट भी देखने को मिलेगी. चलिए आपको आज के दिन का पूरा एक्शन बताते हैं. Fri, 9 Oct 2026 08:33:50 +0530

  Videos
See all

Top News: देखें सुबह की सबसे बड़ी खबरें | Hindi News | UP | Gujrat | Delhi | Rajasthan | Odisha | #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-09T03:36:35+00:00

Starlink लाइसेंस विवाद में कूदे Rahul Gandhi | Elon Musk | Space X | US NEws #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-09T03:39:33+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers