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धलसिम मैं नहीं, मेरी किस्मत लेकर आई:विद्युत जामवाल बोले- मुझे ढूंढते-ढूंढते दुनिया के 11 बेस्ट फाइटर्स में शामिल किया

एक तरफ ‘स्ट्रीट फाइटर’ की दुनिया, दूसरी तरफ हॉलीवुड के बड़े-बड़े नाम और इनके बीच भारत का एक ऐसा एक्टर, जिसने अपनी पहचान किसी फिल्मी खानदान या स्टारडम से नहीं, बल्कि अपनी बॉडी, ब्रीदिंग और मार्शल आर्ट्स से बनाई। विद्युत जामवाल अब धलसिम बनकर ग्लोबल स्क्रीन पर उतर रहे हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विद्युत इस किरदार को कोई बहुत बड़ा चैलेंज मानते ही नहीं। उनके लिए ढालसिम का मिलना कुछ ऐसा था, जैसे किस्मत ने दरवाजा खटखटाया और उन्होंने बस दरवाजा खोल दिया। लास वेगास में गायत्री मंत्र से लेकर जेसन मोमोआ, 50 सेंट, रोमन रेंस और कोडी रोड्स के साथ बिताए 45 दिनों तक, धलसिम के गंजे लुक से लेकर टाइगर श्रॉफ के साथ आने वाली फिल्म तक- विद्युत ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कई ऐसी बातें कहीं, जिनमें उनका एक्शन स्टार वाला अंदाज भी है और जिंदगी को देखने का बिल्कुल अलग नजरिया भी। सवाल: जब ‘स्ट्रीट फाइटर’ के धलसिम का ऑफर आया तो क्या लगा- ‘ये किरदार तो मेरे लिए ही बना है’ या फिर सामने एक बड़ा चैलेंज दिखा? जवाब: चैलेंज तो बिल्कुल नहीं लगा। डायरेक्टर ने मुझे फोन किया तो उन्होंने मेरे बारे में पूरी रिसर्च की हुई थी। उन्हें पता था कि मैं कौन हूं और मैं इस किरदार के साथ क्या कर सकता हूं। वो कॉल ही बहुत बेहतरीन था। मुझे लगा कि किस्मत बहुत अच्छी चीज है। आप बस थम जाइए, चीजें अपने आप आपके पास पहुंचती रहेंगी। मेरे लिए शायद यही फॉर्मूला काम कर गया। उन्हें दुनिया के 11 बेस्ट फाइटर्स की तलाश थी और उन्होंने मुझे तलाश लिया। योग और कलरीपायट्टु का जो मिश्रण इस किरदार में है, वो मेरे लिए कमाल था। सवाल: धलसिम और विद्युत में सबसे बड़ा फर्क क्या है और सबसे बड़ा कनेक्शन क्या है? जवाब: फर्क ये है कि धलसिम बाल-बच्चों वाला आदमी है। उसकी पत्नी है, बच्चे हैं। लेकिन हम दोनों में एक खूबी बहुत मिलती है- वो दूसरों के लिए लड़ता है, अपने लिए नहीं। मेरे लिए भी लड़ाई के पीछे कोई मकसद होना चाहिए। कोई कारण नहीं है तो लड़ने की जरूरत ही क्या है? सवाल: धलसिम के किरदार में आपका योग, मेडिटेशन, ब्रीदिंग और कंट्रोल भी दिखाई देता है। क्या आपको लगता है कि आज के युवाओं को भी इन चीजों की जरूरत है? जवाब: यूथ को जो करना है, वो करना चाहिए। उन्हें जो फॉलो करना है, वो करें। वो होशियार हैं, समझदार हैं। सवाल: लेकिन आज की जनरेशन के आसपास इतना शोर है कि खुद पर कंट्रोल रखना मुश्किल है। ऐसे में वो दुनिया में भारत का नाम कैसे रोशन करेंगे? जवाब: शायद ये चीजें उनमें नहीं होंगी, तभी तो वो दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे। हमसे पुरानी पीढ़ियां इन्हीं चीजों को पाने के चक्कर में काफी समय लगा चुकी हैं। आज की जनरेशन बहुत उम्दा है। इनके दिमाग अलग हैं, इनकी सोच अलग है। हमारा सिर्फ एक काम है- इनकी सोच को मत रोको। इन्हें उड़ने दो। अगर आपके बच्चे हैं तो उनसे कहिए- ‘तुम जो करना चाहते हो करो, मैं संभाल लूंगा।’ बस इतना याद रखना कि कुछ चीजें दायरे में की जाती हैं। और वो दायरा ये बच्चे जानते हैं। सवाल: आप योग, कलरीपायट्टु, ब्रीदिंग और खुद को जानने की बात करते हैं। असल में यूथ को इनमें से क्या सीखना चाहिए? जवाब: हमने इन सबको अलग-अलग नाम दे दिए हैं- डिसिप्लिन, योग वगैरह। असल में ये सिर्फ खुद को जानने की कोशिश है। आप योग से खुद को जानें, मार्शल आर्ट्स से जानें, आर्ट से जानें या कुकिंग से। बस खुद को जानने की कोशिश रुकनी नहीं चाहिए। आप खुद को जितना जान जाएंगे, किसी को कुछ समझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। योग इसलिए अच्छा माध्यम है क्योंकि वो आपको बेसिक्स सिखाता है- आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार। कैसे सांस लेनी है, कैसे बैठना है, कैसे चलना है। जिसे सही चलना और बैठना आ गया, वो सही सोचना भी सीख सकता है। सवाल: लास वेगास में ट्रेलर लॉन्च के दौरान आपने गायत्री मंत्र, सूर्य और चंद्र का पाठ किया। वहां मौजूद हॉलीवुड सितारे आपको देखते रह गए। उस वक्त आपके दिमाग में क्या चल रहा था? जवाब: दरअसल, मैं पहला आदमी था जिसे माइक दे दिया गया था। मुझे लगा कि जब डर लगे तो गायत्री मंत्र का जाप कर लेना चाहिए। गायत्री मंत्र हो गया तो लगा कि अब सूर्य चालीसा भी पढ़ लो और फिर चंद्र भी कर ही लो! लेकिन जिस तरह वहां पूरा माहौल शांत हो गया, वो बहुत अच्छा था। कई चीजों को भाषा की जरूरत नहीं होती। वो सिर्फ एक एहसास होता है। इन मंत्रों में वो शक्ति है जो आपको शांत कर देती है। वहां बैठे हर आदमी के अंदर एक शांति आ गई थी। बहुत अच्छी फीलिंग थी। सवाल: जेसन मोमोआ, 50 सेंट, रोमन रेंस और कोडी रोड्स जैसे बड़े नाम एक ही सेट पर हों तो क्या वहां स्टारडम का माहौल रहता था? जवाब: फनी या सीरियस जैसा कुछ नहीं था। सब दिग्गज हैं। 50 सेंट, रोमन रेंस, जेसन मोमोआ, कोडी रोड्स- इनके साथ बैठना और नॉर्मल बातें करना बहुत सहज था। आपने जिंदगी में क्या किया है, वो अलग बात है और आप असल में क्या हैं, वो अलग चीज है। आप जैसे हैं वैसे रहें तो सब सही रहता है। कभी मजाक हुआ तो सब हंसे। सब कुछ बहुत नॉर्मल था। सवाल: इंडिया को लेकर भी इन सितारों से बातचीत हुई? जवाब: ये लोग इंडिया कई बार आ चुके हैं और इंडियंस को जानते हैं। रोमन रेंस को इंडिया बहुत पसंद है। उसके मुताबिक डब्ल्यूडब्ल्यूई की असली ऑडियंस इंडिया ही है। उसने यहां का पागलपन देखा है। कोडी की इंडिया आने की दिली तमन्ना है। 50 सेंट ने इंडिया में कई शोज किए हैं। लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी बात ये थी कि मैं एक ऐसे मार्शल आर्टिस्ट को रिप्रेजेंट कर रहा था जिसने इस पारंपरिक कला में काम किया है। उनके साथ 45 दिन बिताने के बाद इंसान की असलियत दिख जाती है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि दुनिया में हर इंडियन मार्शल आर्टिस्ट की कद्र होगी। सवाल: धलसिम के गंजे लुक पर घरवालों और दोस्तों का क्या रिएक्शन था? जवाब: मैं तो हैरान हूं कि सबको गंजे आदमी पसंद आ रहे हैं! मैं अपने सभी गंजे दोस्तों से कह रहा हूं- ‘तुम लोग बाल क्यों उगा रहे हो?’ जो गेमर्स हैं, वो जानते हैं कि ढालसिम के बाल नहीं हो सकते क्योंकि वो योगी है। जो गेमर्स नहीं हैं, उन्हें सिर्फ एंटरटेनमेंट दिख रहा है। किसी ने बहुत प्यारा कमेंट किया- ‘क्यूट लग रहे हो।’ मुझे समझ नहीं आया कि गंजा आदमी क्यूट कैसे लग सकता है, लेकिन लोगों ने कहा तो ठीक है! सवाल: हर फिल्म के साथ फैंस की उम्मीदें बढ़ती हैं। क्या इसका दबाव महसूस होता है? जवाब: कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदारी आपकी खुद की तरफ होती है कि आप सही काम करें, खुश रहें और खुद को निखारते रहें। शूटिंग के दौरान भी मैं यही सोचता था कि मैं अपनी मार्शल आर्ट्स की वजह से यहां तक पहुंचा हूं। अब ये इम्तिहान का वक्त है और मुझे अपना बेस्ट देना है। बस यही जिम्मेदारी थी। सवाल: टाइगर श्रॉफ के साथ आपकी अगली फिल्म को लेकर काफी एक्साइटमेंट है। दोनों साथ आए तो स्क्रीन पर क्या होने वाला है? जवाब: टाइगर और मैं अभी एक फिल्म पर काम कर रहे हैं। उसे जानने के बाद पता चला कि हम दोनों में जो क्षमता है, जब वो फिल्म आएगी तो सच में कमाल होगा। आज तक हमें कोई ऐसा डायरेक्टर नहीं मिला जो हम दोनों को हमारी काबिलियत से भी आगे ले जा सके। इसलिए मैं इस जोड़ी को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं।

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नकली दवाओं का सिंडिकेट तुर्किये से अजरबैजान तक:कर्नाटक में ₹5 करोड़ की नकली दवाएं मिलीं, फाइजर के लेबल वाली 10 हजार शीशियां जब्त

कर्नाटक में नकली दवा बनाने वाले गिरोह की जांच में विदेश तक फैले नेटवर्क का पता चला है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के मुताबिक, गिरोह का सरगना आर. प्रशांत रंजन बाबू तुर्किये से फाइजर की दवाओं के लेबल मंगवाता था। प्रंशात अजरबैजान में रह रहा था। गिरोह इन लेबल और क्यूआर कोड की नकल कर नकली लेबल तैयार करता था। इन्हें स्कैन करने पर भी नकली होने का आसानी से पता नहीं चलता था। जांच में फाइजर के लेबल वाली करीब 10 हजार शीशियां मिली हैं। वहीं, बेंगलुरु में 18 अगस्त को बिदादी और दोड्डेरी में छापेमारी के दौरान करीब 5 करोड़ रुपए की नकली दवाएं, बिल, इंजेक्शन भरने के उपकरण और नकली लेबल मिले थे। मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नकली कैंसर दवा गिरोह के तार तुर्किये और चीन से जुड़े मिले थे नकली दवाओं के खिलाफ इंटरपोल के ऑपरेशन पांजिया में भी सामने आया है कि दवा कंपनियों के नाम और पैकेजिंग की नकल कर नकली दवाओं की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई हो रही है। भारत में इससे पहले दिल्ली-एनसीआर के नकली कैंसर दवा गिरोह के तार तुर्किये और चीन से जुड़े मिले थे। यूरोप और ब्रिटेन में भी तुर्किये और दुबई के रास्ते चलने वाले ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई तेज हुई है। हवाला और क्रिप्टो से गिरोह की हो रही फंडिंग, जांच शुरू अजरबैजान में मौजूद आरोपी को भारत लाने के लिए जांच एजेंसियां केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सीबीआई के जरिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। कर्नाटक पुलिस इंटरपोल की मदद मांग सकती है। आरोपी हवाला और क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग कर रहे थे। इसकी जांच शुरू हो चुकी है। प्रशांत अजरबैजान में रह रहा था और वहीं से नेटवर्क को दूर से संचालित कर रहा था। उसे भारत लाने के लिए जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।

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  Sports

न्यूजीलैंड के पूर्व टेस्ट ओपनर जीत रावल ने लिया संन्यास:10 हजार से ज्यादा फर्स्ट क्लास रन बनाए; पार्थिव पटेल के स्कूल फ्रेंड थे

न्यूजीलैंड के पूर्व टेस्ट ओपनर जीत रावल ने प्रोफेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया है। 38 साल के रावल ने 2026-27 के घरेलू सीजन से पहले यह फैसला किया। गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे रावल ने न्यूजीलैंड के लिए 2016 से 2020 के बीच 24 टेस्ट खेले। वे 2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) जीतने वाली न्यूजीलैंड टीम का हिस्सा भी रहे। क्रिकेट से संन्यास के बाद वे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के रूप में काम जारी रखेंगे। वे पहले से एक ऑडिटिंग फर्म में CA हैं। पिता का सपना पूरा करने के लिए न्यूजीलैंड शिफ्ट हुआ परिवार नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स क्रिकेट एसोसिएशन को दिए इंटरव्यू में रावल ने कहा कि न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना उनका और उनके पिता का बचपन का सपना था। इसे पूरा करने का मौका देने के लिए उनके पिता पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले गए थे। रावल ने कहा, "यह फैसला लेते हुए मुझे गर्व और संतुष्टि महसूस हो रही है। ब्लैककैप्स के लिए खेलना मेरा और मेरे पिता का सपना था। मुझे यह मौका देने के लिए उन्होंने पूरे परिवार को न्यूजीलैंड शिफ्ट करने का बड़ा कदम उठाया।" रावल का जन्म अहमदाबाद में हुआ था। स्कूली दिनों में वे भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल के साथ विद्यानगर स्कूल में क्रिकेट खेलते थे। दोनों ओपनिंग करते थे। किशोरावस्था में रावल का परिवार गुजरात से ऑकलैंड शिफ्ट हो गया था। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10,432 रन और 24 शतक रावल ने दिसंबर 2008 में ऑकलैंड की ओर से वेस्टइंडीज की टीम के खिलाफ मैच से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने 164 मैचों में 10,432 रन बनाए। उनका औसत 37.66 रहा। इस दौरान उन्होंने 24 शतक और 50 अर्धशतक लगाए। ओपनिंग में रिकॉर्ड: फर्स्ट क्लास क्रिकेट की 292 पारियों में से 285 में ओपनिंग की। ओपनर के तौर पर 10,127 रन और 23 शतक लगाए। प्लंकेट शील्ड: न्यूजीलैंड के प्रमुख घरेलू फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट में 8,662 रन बनाए। वे इसके इतिहास में चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उनसे आगे माइकल पैप्स (11,463), मैथ्यू सिंक्लेयर (8,842) और पीटर फुल्टन (8,719) हैं। 10 हजार रन का रिकॉर्ड: दिसंबर 2025 में नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की कप्तानी करते हुए रावल फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करने वाले न्यूजीलैंड के 30वें खिलाड़ी बने। रावल का आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला मार्च 2026 में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के खिलाफ नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से था। 2016 में टेस्ट डेब्यू, 28 पारियों बाद लगाया पहला शतक रावल ने नवंबर 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ क्राइस्टचर्च टेस्ट से न्यूजीलैंड के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने 24 टेस्ट में 1,143 रन बनाए। उनका औसत 30.07 रहा। टेस्ट करियर में उन्होंने एक शतक और सात अर्धशतक लगाए। पहला शतक लगाने के लिए उन्हें 28 पारियों का इंतजार करना पड़ा। उनका टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर 132 रन रहा। 2019 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खराब फॉर्म के कारण उन्हें न्यूजीलैंड की टीम से बाहर कर दिया गया था। रावल ने बाद में कहा कि वे कुछ मैचों में टीम की जरूरत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि केन विलियमसन, रॉस टेलर और अन्य सीनियर खिलाड़ियों ने शतक नहीं लगा पाने के बावजूद उनका समर्थन किया था। रावल 2019-21 के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकल में न्यूजीलैंड की टीम का हिस्सा रहे। जून 2021 में खिताब जीतने के बाद वे WTC ट्रॉफी के साथ देशभर में हुए विक्ट्री टूर में भी शामिल हुए। कप्तानी में 10 साल बाद प्लंकेट शील्ड का खिताब जिताया नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के कप्तान के रूप में रावल ने 2024-25 सीजन में टीम को 10 साल से ज्यादा समय बाद प्लंकेट शील्ड का खिताब दिलाया। इस जीत में उन्होंने बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी योगदान दिया। रावल ने पार्ट-टाइम लेग स्पिन से 14 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 11.14 रहा। इस दौरान उन्होंने पहली बार पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा भी किया। नार्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के क्रिकेट जनरल मैनेजर इयान सैंडब्रुक ने कहा कि रावल टीम के लिए अनुभवी खिलाड़ी और शानदार लीडर रहे हैं। उनके रन, विकेट और शांत नेतृत्व की कमी खलेगी। उन्होंने रावल को बेहतरीन टीममेट और भरोसेमंद खिलाड़ी भी बताया। Fri, 09 Oct 2026 01:43:47

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