राहुल गांधी ने मस्क के स्टारलिंक प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया:कहा-दूसरे आदमी को जानने तक इंतजार करें; मस्क के आरोपों को सरकार ने गलत बताया
स्टारलिंक विवाद के बीच राहुल गांधी ने एलन मस्क से कहा, इलॉन भारत में आपका स्वागत है। दूसरे आदमी के बारे में जानने तक इंतजार करें। मस्क ने राहुल के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा, धन्यवाद राहुल, यह वाकई चिंताजनक है। दरअसल, मस्क ने इससे पहले कहा था कि स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला है और कंपनी पिछले 5 साल से भारत सरकार के सभी कानूनों और शर्तों का पालन कर रही है। उन्होंने पूछा था कि इसके बावजूद भारत में स्टारलिंक को अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। वहीं, भारत सरकार ने 8 अक्टूबर को कहा कि देश में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सर्विसेज के लिए तय नियम सभी के लिए एक जैसे हैं। यह कहना बिल्कुल गलत है कि नियमों को किसी के साथ भेदभाव करने के लिए लागू किया जा रहा है। मस्क ने लगाया था भेदभाव का आरोप इससे पहले 7 अक्टूबर को इलॉन मस्क ने देश के बड़े बिजनेसमैनों पर भारत में स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया है। मस्क ने X पर पोस्ट कर लिखा, 'भारत के कुछ बड़े बिजनेसमैन नहीं चाहते कि स्टारलिंक का सैटेलाइट इंटरनेट भारत आए, ताकि उनका एकछत्र राज बना रहे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं…' मस्क ने पोस्ट में यह भी लिखा कि यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है। मस्क ने किसी कंपनी या उद्योगपति का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनकी पोस्ट से भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के बीच बहस छिड़ गई है। मस्क का इशारा भारत के उन टेलीकॉम और बिजनेस घरानों की तरफ माना जा रहा है, जो स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के नियमों और सुरक्षा चिंताओं को लेकर सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों का विरोध या कड़ी शर्तों की मांग कर रहे हैं। सरकार ने बयान में कहा कि फिलहाल इन तीनों के लिए सुरक्षा समीक्षा की प्रोसेस चल रही है। जैसे ही किसी कंपनी की सुरक्षा जांच पूरी हो जाएगी, वह अगली स्टेप यानी स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग करने के लिए आगे बढ़ सकती है। वर्तमान में तीनों ही कंपनियां रेगुलेटरी प्रक्रिया के एक ही चरण में हैं। देश भर में 20 स्टेशन और सैकड़ों एंटीना तैनात स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई गई हैं। ये गेटवे जमीन पर बने स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक के सैटेलाइट्स को जमीन के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। इन जगहों पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं ताकि इंटरनेट सिग्नल बिना किसी रुकावट के ट्रांसफर हो सकें। जियो-एयरटेल से डील, 3 राज्यों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन स्टारलिंक भारत में बड़े पैमाने पर नेटवर्क पहुंचाने के लिए रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ शुरुआती सहमति पत्र यानी MoU साइन कर चुकी है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर सेवाएं देने के लिए कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकार के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन किए हैं। 5 सवाल-जवाब में स्टारलिंक से जुड़ी जरूरी बातें... सवाल 1: स्टारलिंक क्या है और ये खास क्यों है? जवाब: स्टारलिंक, स्पेसएक्स का प्रोजेक्ट है, जो सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देता है। इसके सैटेलाइट्स पृथ्वी के करीब घूमते हैं, जिससे इंटरनेट तेज और स्मूथ चलता है। ये खासकर उन इलाकों के लिए फायदेमंद है, जैसे गांव या पहाड़, जहां आम इंटरनेट नहीं पहुंचता। सवाल 2: स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में इतना वक्त क्यों लगा? जवाब: स्टारलिंक 2022 से कोशिश कर रही थी, लेकिन सिक्योरिटी चिंताओं की वजह से देरी हुई। भारत सरकार ने डेटा सिक्योरिटी और कॉल इंटरसेप्शन जैसी शर्तें रखी थीं। स्टारलिंक ने इन शर्तों को माना। अब सर्विसेज शुरू होने वाली है। सवाल 3: आम लोगों को क्या फायदा होगा? जवाब: स्टारलिंक से गांवों और दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचेगा, जिससे ऑनलाइन एजुकेशन, टेलीमेडिसिन, और बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सस्ते और बेहतर प्लान्स मिल सकते हैं। सवाल 4: भारत मस्क के लिए क्यों जरूरी है? जवाब: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट मार्केट है। मस्क के लिए ये लाइसेंस बड़ी कामयाबी है, खासकर जब अमेरिका में उनकी डोनाल्ड ट्रम्प के साथ तनातनी चल रही है। इससे स्पेसएक्स के कॉन्ट्रैक्ट्स खतरे में हैं। सवाल 5: सैटेलाइट्स से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट? जवाब: सैटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से से बीम इंटरनेट कवरेज को संभव बनाती है। सैटेलाइट के नेटवर्क से यूजर्स को हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी इंटरनेट कवरेज मिलता है। लेटेंसी का मतलब उस समय से होता है जो डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचाने में लगता है। स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखना होगा। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। ------------ ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- कुछ उद्योगपति स्टारलिंक को भारत में रोक रहे:मोनोपोली बनाए रखने का आरोप लगाया; कंपनी को आखिरी सरकारी मंजूरी का इंतजार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क ने देश के बड़े उद्योगपतियों पर भारत में स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़ें…
चार राज्यों की 6 सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आज:बंगाल के नंदीग्राम-रेजीनगर में भाजपा-कांग्रेस में मुकाबला; असम की नगांव सीट पर पूर्व विधायक और IAS आमने-सामने
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी की 5 विधानसभा और असम की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे आज आएंगे। सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू होगी। थोड़ी देर बाद रुझान आने लगेंगे। इन सभी सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इनमें बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर सबकी नजर है। नंदीग्राम उपचुनाव कई कारणों से चर्चा में रहा। यहां पूर्व CM ममता बनर्जी के गुट की TMC प्रत्याशी ने नॉमिनेशन वापस ले लिया था। फिर ममता ने जिस कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया, वह गिरफ्तार हो गए। हालांकि, चुनाव के लिए उन्हें जमानत मिल गई है। अब BJP और कांग्रेस आमने-सामने है। असम की नगांव लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां BJP ने पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा को टिकट दिया है। AIUDF की ओर से पार्टी प्रमुख और मौजूदा विधायक बदरुद्दीन अजमल भी मैदान में हैं। तमिलनाडु में विधायकों के पार्टी बदलने से उपचुनाव, असम में सांसद का इस्तीफा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में इसी साल विधानसभा चुनाव हुए थे। तमिलनाडु में 2 विधायकों के पार्टी बदलने और इस्तीफा देने से 2 सीटें खाली हुईं। पुडुचेरी में CM एन. रंगासामी के 2 सीटों पर जीत के बाद एक सीट छोड़ने से उपचुनाव हुआ। बंगाल में भी CM शुभेंदु अधिकारी और हुमायूं कबीर ने 2-2 सीटों पर चुनाव जीता। इसके बाद उन्हें एक-एक सीट छोड़नी पड़ीं। वहीं, असम में सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने विधायक बनने के लिए लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया था। इसके कारण यहां उपचुनाव हुए। बंगाल की दोनों सीटें क्यों अहम? नंदीग्राम 1. ममता की हार वाली सीट: 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था। 2026 में भी शुभेंदु ने यहां जीत दर्ज की, लेकिन भवानीपुर सीट रखने के लिए नंदीग्राम छोड़ दिया। इसलिए उपचुनाव में BJP के लिए इस सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखना अहम है। 2. TMC मैदान से बाहर, कांग्रेस को समर्थन: TMC प्रत्याशी संचिता प्रधान डे के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन दिया। यानी BJP के खिलाफ इस बार TMC नहीं, कांग्रेस का प्रत्याशी है। 3. ममता की राजनीति से जुड़ा नंदीग्राम आंदोलन: 2007 में लेफ्ट सरकार की जमीन अधिग्रहण योजना के विरोध में नंदीग्राम में बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। ममता ने इसका समर्थन किया और जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला। नंदीग्राम-सिंगूर आंदोलनों ने उनकी राजनीति को नई पहचान दी और 2011 में TMC की सत्ता में वापसी के अहम मुद्दे बने। 4. समर्थन के बाद कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार: ममता के समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। हाई कोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक जमानत दी, ताकि वे चुनाव लड़ सकें। 5. BJP प्रत्याशी का भी नंदीग्राम कनेक्शन: BJP ने शुभेंदु अधिकारी के पूर्व PA चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ की 4 मई को विधानसभा चुनाव नतीजों के दो दिन बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसलिए BJP के उम्मीदवार का चयन भी नंदीग्राम के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और स्थानीय भावनाओं से जुड़ा हुआ है। रेजीनगर 1. सीधा मुकाबला नहीं, बहुकोणीय लड़ाई: यहां BJP, कांग्रेस, TMC के दोनों गुट, CPI(M) और AJUP मैदान में हैं। इतने दलों की मौजूदगी में वोटों का बंटवारा नतीजे को सीधे प्रभावित कर सकता है। 2. हुमायूं कबीर के परिवार की सियासी परीक्षा: 2026 में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटें जीती थीं। नाओदा अपने पास रखने के बाद उन्होंने रेजीनगर छोड़ी। अब उनकी पार्टी AJUP ने उनके बेटे गोलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है। यानी यह चुनाव परिवार के राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा है। 3. मुस्लिम बहुल सीट पर BJP का दांव: रेजीनगर मुस्लिम बहुल सीट है। BJP के शंकराव सरकार को छोड़कर प्रमुख उम्मीदवार मुस्लिम हैं। BJP ने यहां विकास, रोजगार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की है। 4. AJUP ने बढ़ाई TMC-कांग्रेस की चुनौती: रेजीनगर में अगर AJUP मजबूत प्रदर्शन करती है तो इसका असर TMC, कांग्रेस और मुस्लिम वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है। वहीं BJP के प्रदर्शन से यह संकेत मिलेगा कि पार्टी मुस्लिम बहुल सीट पर अपने वोट आधार को कितना विस्तार दे पा रही है। 15 साल में 18 चुनाव-उपचुनाव, पहली बार ममता न CM, न विधायक, न उम्मीदवार पिछले 15 साल में पश्चिम बंगाल में 18 विधानसभा चुनाव और उपचुनाव हो चुके हैं। इस दौरान पहली बार ऐसा होगा, जब किसी उपचुनाव के वक्त ममता बनर्जी न तो राज्य की मुख्यमंत्री हैं, न विधायक और न ही उम्मीदवार। इसी साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में TMC 15 साल शासन के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। इस चुनाव में ममता को अपनी सीट भवानीपुर से भी हार का सामना करना पड़ा था।
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