Hong Kong Sixes 2026 के लिए Team India घोषित, Bhuvneshwar Kumar करेंगे कप्तानी
30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले 2026 हांगकांग सिक्सस टूर्नामेंट के लिए भारत एक मज़बूत टीम उतारेगा, जिसमें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के सात जाने-माने खिलाड़ी शामिल होंगे। भारतीय टीम की कमान तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार संभालेंगे और टीम में क्रुणाल पांड्या, शशांक सिंह, राहुल तेवतिया, नितीश राणा, राहुल त्रिपाठी और टी. नटराजन भी शामिल होंगे। हांगकांग सिक्सस की एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, इस टीम में अंतरराष्ट्रीय अनुभव, आक्रामक बल्लेबाज़ी, ऑल-राउंड कौशल और क्रिकेट के तेज़ और मनोरंजक 'सिक्स-ए-साइड' (छह खिलाड़ियों वाले) फ़ॉर्मेट के हिसाब से खास तौर पर चुनी गई विशेषज्ञ गेंदबाज़ी का बेहतरीन तालमेल है।
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2026 का इवेंट JSW स्पोर्ट्स के साथ कमर्शियल पार्टनर के तौर पर पहला एडिशन है, जो दुनिया भर में स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी और लीग में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगा। हांगकांग सिक्सस फॉर्मेट में हर टीम में सिर्फ़ छह खिलाड़ी होते हैं और इसमें तेज़, ज़्यादा स्कोर वाले मैच होते हैं, जिनमें आक्रामक बैटिंग और सभी खिलाड़ियों के मल्टी-डिसिप्लिनरी योगदान को प्राथमिकता दी जाती है। भुवनेश्वर कुमार के पास IPL और इंटरनेशनल क्रिकेट का काफ़ी अनुभव है, खासकर नई गेंद के साथ, जबकि क्रुणाल पांड्या ऑल-राउंडर की भूमिका निभाते हैं।
नीतीश राणा अपनी आक्रामक टॉप-ऑर्डर बैटिंग के लिए जाने जाते हैं, और शशांक सिंह व राहुल तेवतिया बेहतरीन फिनिशर माने जाते हैं। राहुल त्रिपाठी टीम की आक्रामक क्षमता को और बढ़ाते हैं, साथ ही टी. नटराजन की स्पेशलिस्ट लेफ्ट-आर्म पेस बॉलिंग भी टीम को मज़बूती देती है। क्रिकेट हांगकांग के मार्केटिंग और कमर्शियल डायरेक्टर अनुराग भटनागर ने कहा कि हम भारतीय क्रिकेट अधिकारियों के बहुत आभारी हैं कि उन्होंने 'सिक्सेस' (Sixes) के इतिहास में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे मज़बूत टीमों में से एक को तैयार करने में हमारी मदद की। यह निश्चित रूप से दर्शकों की संख्या और इस शानदार टूर्नामेंट की अहमियत के लिहाज़ से एक बहुत बड़ी कामयाबी साबित होगी।
टीम इंडिया का लक्ष्य अपने 2025 के अभियान से बेहतर प्रदर्शन करना है। उस अभियान की शुरुआत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ DLS नियम के तहत दो रन की करीबी जीत से हुई थी, लेकिन बाद में टीम हारकर बाहर हो गई थी। यह मुक़ाबला चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि पाकिस्तान डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर उतर रहा है; उसने पिछले साल फ़ाइनल में कुवैत को हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह ख़िताब जीता था।
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टीम इंडिया की लिस्ट इस प्रकार है:
भुवनेश्वर कुमार (कप्तान) – रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु
क्रुणाल पांड्या – रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु
शशांक सिंह – पंजाब किंग्स
राहुल तेवतिया – गुजरात टाइटंस
नीतीश राणा – दिल्ली कैपिटल्स
राहुल त्रिपाठी – कोलकाता नाइट राइडर्स
टी. नटराजन – दिल्ली कैपिटल्स
Pitru Paksha 2026: पितरों के आशीर्वाद के लिए दक्षिण दिशा में करें श्राद्ध, कुशा और काले तिल का प्रयोग अनिवार्य
आज यानी की 27 सितंबर 2026 से पितृपक्ष की शुरूआत हो रही है। इस दौरान पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण ग्रहण कर उनपर कृपा बरसाते हैं। पितरों की आत्मशांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए विधिविधान से श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस दौरान पूरे 15 दिनों तक कई नियमों का पालन भी किया जाता है। माना जाता है कि यह समय अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का होता है।
पितृपक्ष 2026
26 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर - द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर - तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर - चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
01 अक्तूबर - षष्ठी श्राद्ध
02 अक्तूबर - सप्तमी श्राद्ध
03 अक्तूबर - अष्टमी श्राद्ध
04 अक्तूबर - नवमी श्राद्ध
05 अक्तूबर - दशमी श्राद्ध
06 अक्तूबर - एकादशी श्राद्ध
07 अक्तूबर - द्वादशी श्राद्ध
08 अक्तूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
09 अक्तूबर - चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर - सर्वपितृ श्राद्ध
श्राद्ध करने का समय और जगह
श्राद्ध या तर्पण हमेशा दोपहर के समय करना चाहिए। कभी भी सूर्यास्त के बाद यह कर्म नहीं करना चाहिए। पूजा के समय अपना मुंह हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। इससे पितरों की दिशा माना जाता है। वहीं ध्यान रहे कि हमेशा श्रद्धा जमीन, किसी मंदिर या पवित्र नदी के किनारे ही करना चाहिए।
वहीं किसी दूसरे के घर पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। तर्पण के दौरान कुशा और काले तिल का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है।
ब्राह्मण भोज और पंचबली का महत्व
श्राद्ध वाले दिन कम से कम 3 ब्राह्मणों को घर पर बुलाकर पूरे सम्मान के साथ सात्विक भोजन कराना चाहिए। उनको दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। क्योंकि बिना दान के श्राद्ध अधूरा माना जाता है। इसके साथ ही भोजन का एक हिस्सा गाय, देवताओं, कौवे, कुत्ते और चींटियों के लिए जरूर निकालें। इसको पंचबली कहा जाता है, जोकि पितरों तक खाना पहुंचाने का जरिया माना जाता है।
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