मेलोडी, ठेकुआ, मखाना-सत्तू— भारत की 'फूड डिप्लोमेसी' का नया दौर
रोम वाला वो क्लिप शायद आपकी फीड पर भी घूमा होगा। पीएम मोदी इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को एक छोटा-सा टॉफी पैकेट थमाते हैं, और मेलोनी मुस्कुराते हुए बोल पड़ती हैं— "He gifted us a very, very good toffee।" संयोग ऐसा कि टॉफी का नाम ही था मेलोडी! बस, इंटरनेट ने दोनों नामों को जोड़कर बना दिया 'Melodi', और वो मीठा पल रातोंरात एक मीम बन गया। एक साधारण-सी पार्ले टॉफी ने पूरे सोशल मीडिया पर राज कर लिया।
लेकिन अगर आप इसे सिर्फ इत्तेफाक समझ रहे हैं, तो थोड़ा रुकिए। भारत की विदेश नीति में डिप्लोमेसी की अपनी अहमियत है ही, मगर पिछले कुछ बरसों में "खाना" भी उसमें एक चुपचाप मगर मजबूत किरदार निभाने लगा है। खाना अब सिर्फ पेट भरने की चीज़ नहीं रहा — यह एक सोची-समझी सॉफ्ट पावर की चाल बन चुका है। जैसे भाषा, संगीत या सिनेमा किसी देश की पहचान गढ़ते हैं, वैसे ही अब थाली भी एक तरह की चुप कूटनीतिक ज़बान बोलने लगी है। एक टॉफी, एक मिठाई, या किसी गाला डिनर का मेन्यू — ये सिर्फ मेहमाननवाज़ी नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर गढ़ा गया एक संदेश होता है।
दिल्ली में ब्रिक्स, थाली में इशारे
टाइमिंग पर गौर करें तो मई 2026 में पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा का आख़िरी पड़ाव इटली ही था। मेलोनी को मेलोडी टॉफी सौंपना महज एक हल्का-फुल्का पल नहीं था, इसके पीछे की टाइमिंग सोच-समझकर तय की गई लगती है। वीडियो वायरल होते ही वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का बयान आया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का टॉफी निर्यात 166% बढ़ चुका है। यानी एक मामूली-सा गिफ्ट भी सरकार ने आसानी से एक आर्थिक नैरेटिव में बदल दिया — "देखिए, भारत की मिठास अब दुनिया के बाज़ार में बिक रही है।" यही डिप्लोमेसी की असली चाल है — जो चीज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए, उसे आंकड़ों के सहारे एक आर्थिक कहानी में ढाल दो।
ठेकुआ जब स्लोवाकिया की संसद तक पहुंचा
यह सिर्फ एक तोहफा नहीं था — यह बिहार की सीधी-सादी सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली एक तरह की इज़्ज़त थी। जो मिठाई कभी सिर्फ त्योहारों तक सीमित मानी जाती थी, वह अब भारत की कूटनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। बारीकी से देखें तो यह कोई अचानक शुरू हुआ चलन नहीं है। 2023 में जब भारत ने G20 की मेज़बानी की थी, तभी से इस रणनीति की झलक दिखनी शुरू हो गई थी। भारत मंडपम के उस गाला डिनर का पूरा मेन्यू "वसुधैव कुटुंबकम" यानी "एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य" की थीम पर सजाया गया था। रागी डोसा, बाजरा खीर, कजू मटर मखाना से लेकर गोलगप्पे और समोसे तक — विदेशी मेहमानों को भारत के मिलेट्स और स्ट्रीट फूड, दोनों का ज़ायका एक साथ चखाया गया। यहीं से भारत ने खाने को महज़ मेहमाननवाज़ी नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक हथियार की तरह बरतना शुरू किया।
अब बारी मखाने और सत्तू की
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने इसे हर बिहारवासी के लिए गर्व का पल बताया, और बात भी सही है — जो मखाना और सत्तू कभी सिर्फ बिहार के गांव-देहात की रसोई तक सीमित थे, वे अब दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंचों में से एक तक पहुंच चुके हैं। यह बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरा, दोनों के लिए एक बड़ी वैश्विक पहचान है।
मेलोडी टॉफी से लेकर मखाने तक — भारत की गिफ्ट और मेन्यू डिप्लोमेसी में एक साफ पैटर्न नज़र आता है। हल्के-फुल्के निजी तोहफे (टॉफी, ठेकुआ) रिश्तों में अपनापन घोलने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जबकि बड़े मंचों के मेन्यू और वेलकम किट (G20, BRICS) पूरे देश की सांस्कृतिक और कृषि विविधता दिखाने का ज़रिया बनते हैं। और इस पूरी कहानी में बिहार बार-बार लौटकर आता है — कभी ठेकुए के रूप में, तो कभी मखाना-सत्तू के रूप में। एक राज्य जिसे अक्सर सिर्फ राजनीतिक सुर्खियों के लिए जाना जाता रहा है, वह अब अपने स्वाद और परंपरा के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक मेज़ों तक पहुंच चुका है।
- संजीव कुमार मिश्र
Dinesh Karthik बोले Mohammed Shami की Team India में वापसी पर विचार करने की जरूरत नहीं
मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में वापसी को लेकर चल रही उम्मीदों को एक और झटका लगा है। भारत के पूर्व क्रिकेटर दिनेश कार्तिक का मानना है कि टीम अब शमी से आगे बढ़ चुकी है। उनके मुताबिक, शमी घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, फिर भी उन्हें दोबारा भारतीय टीम में लाने का कोई खास मतलब नहीं है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, शमी ने आखिरी बार 2025 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला था। इसके बाद चोट, फिटनेस और कुछ अन्य कारणों से वह लगातार राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर से बाहर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी अच्छी रही है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम में उनकी वापसी की संभावना हर गुजरते दिन के साथ कम होती दिखाई दे रही है।
दिनेश कार्तिक ने क्रिकेट बज से बातचीत के दौरान शमी को लेकर अपनी राय रखी। उनसे पूछा गया था कि क्या भारतीय टीम में शमी की वापसी होनी चाहिए। इस पर कार्तिक ने कहा कि टीम में शमी के अलावा कई तेज गेंदबाज मौजूद हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत शमी से आगे बढ़ चुका है और अब पीछे लौटने की जरूरत नहीं है।
कार्तिक ने यह भी माना कि शमी ने अच्छी गेंदबाजी की है। हालांकि, उनके मुताबिक भारतीय टीम के मौजूदा गेंदबाजी विकल्पों को देखते हुए शमी को वापस लाना सही फैसला नहीं होगा। यह राय ऐसे समय आई है जब भारत की एकदिवसीय टीम की गेंदबाजी पर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया एकदिवसीय सीरीज में भारत ने 2-1 से जीत दर्ज की, लेकिन गेंदबाजों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा। पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार थी, इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज कई मौकों पर उम्मीद के मुताबिक दबाव नहीं बना सके। इससे प्रशंसकों और पूर्व क्रिकेटरों के बीच भी टीम की गेंदबाजी को लेकर चिंता देखने को मिली।
भारतीय तेज गेंदबाजी में फिलहाल अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे खिलाड़ी प्रमुख विकल्प हैं। इनके अलावा गुरनूर बराड़, आकिब नबी और अंशुल कंबोज जैसे युवा गेंदबाजों को भी धीरे-धीरे मौके दिए जा रहे हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं का ध्यान आने वाली पीढ़ी तैयार करने पर भी दिखाई दे रहा है।
शमी के उलट दिनेश कार्तिक रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को ज्यादा समय तक भारतीय टीम में देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि इन दोनों खिलाड़ियों के संन्यास का असर केवल भारतीय क्रिकेट पर ही नहीं, बल्कि पूरी विश्व क्रिकेट व्यवस्था पर पड़ेगा।
बता दें कि रोहित शर्मा और विराट कोहली ने एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा है, लेकिन अगले विश्व कप के बाद उनके भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं। कार्तिक का मानना है कि अगर भारत के ये 2 बड़े नाम एक साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा होते हैं तो इसका असर एकदिवसीय क्रिकेट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व क्रिकेट के केंद्र में है और रोहित-विराट जैसे 2 महान खिलाड़ियों के जाने से इस प्रारूप पर असर पड़ना तय है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट में अनुभव और युवा प्रतिभा के बीच संतुलन आने वाले समय की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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