T20 विश्व कप 2026 में पहले दिन खेले जाएंगे 3 मुकाबले, जानिए किससे भिड़ेगी कौन सी टीम
T20 World Cup 2026: 7 फरवरी से टी-20 विश्व कप 2026 की शुरुआत होने वाली है. टूर्नामेंट के पहले ही दिन 3 मुकाबले होने वाले हैं. पहले ही दिन नहीं बल्कि हर दिन 3-3 मुकाबले खेले जाएंगे. यानि टूर्नामेंट के शुरू होते ही रोमांच शुरू हो जाएगा, जो पूरे-पूरे दिन चलेगा. आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी टीमें एक्शन में दिखेंगी. सुबह 11 बजे से मैचों की शुरुआत होगी, जो रात लगभग 11 बजे तक चलेंगे. तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि कौन सी टीम किस टीम के खिलाफ खेलेगी और उनके मुकाबले कितने बजे शुरू होंगे.
पाकिस्तान और नीदरलैंड के बीच खेला जाएगा पहला मैच
टी-20 वर्ल्ड कप 2026 का पहला मुकाबला पाकिस्तान और नीदरलैंड के बीच खेला जाएगा. ये मैच कोलंबो के सिंहलेसे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा, जो सुबह 11 बजे से शुरू होगा और टॉस के लिए दोनों कप्तान 11 बजे मैदान पर उतरेंगे.
वेस्टइंडीज और स्कॉटलैंड के बीच होगा दूसरा मैच
टी-20 विश्व कप 2026 का दूसरा मैच वेस्टइंडीज और स्कॉटलैंड के बीच खेला जाएगा, जो कोलकाता के ईडेन-गार्डेन्स में खेला जाएगा. ये मैच दोपहर 3 बजे से शुरू होगा.
भारत-अमेरिका के बीच होगा तीसरा मैच
It all starts tomorrow ????
— BCCI (@BCCI) February 6, 2026
Just 1⃣ day to go for #TeamIndia's opening fixture in the #T20WorldCup ????#MenInBlue pic.twitter.com/qQpHSD9pZd
टूर्नामेंट में टीम इंडिया भी 7 फरवरी को ही अपने अभियान की शुरुआत करेगी, जो टूर्नामेंट का तीसरा मैच होगा. इस मैच में भारत का सामना अमेरिका से होगा और ये मैच शाम 7 बजे से शुरू होगा. टॉस के लिए दोनों कप्तान 6.30 बजे मैदान पर उतरेंगे. आपको बता दें, भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ एक टी-20 मैच खेला गया है, जिसे भारतीय टीम ने जीता था.
8 मार्च को खेला जाएगा फाइनल मैच
7 फरवरी से टी-20 विश्व कप की शुरुआत हो रही है, जिसका फाइनल मुकाबला 8 मार्च को खेला जाएगा. सभी टीमें पहले तो लीग स्टेज पर खेलेंगी. फिर सुपर-8 के बाद हर ग्रुपकी टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी. सेमीफाइनल में एक ग्रुप की टॉप टीम का सामना दूसरे ग्रुप की रनरअप टीम से होगा. दोनों सेमीफाइनल जीतने वाली टीमें खिताबी मुकाबले में भिड़ेंगी और चैंपियन का फैसला होगा.
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राज्यसभा में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी का विषय, आयुष में शामिल करने की मांग
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम लेकिन अक्सर उपेक्षित विषय पर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने फुट रिफ्लेक्सोलॉजी (पैरों के संवेदनशील बिंदुओं के माध्यम से उपचार) को एक प्रभावी, गैर-आक्रामक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसे भारत की आयुष प्रणाली में शामिल करने की सिफारिश की।
सदन में बोलते हुए सुधा मूर्ति ने कहा कि मानव शरीर का पैर ऐसा अंग है जिसे आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसमें मौजूद संवेदनशील बिंदुओं को सही तरीके से उत्तेजित करने से दर्द कम किया जा सकता है, तनाव घटाया जा सकता है और शरीर को गहन राहत मिलती है।
उन्होंने बताया कि यह पद्धति दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों जैसे कि थाईलैंड, इंडोनेशिया, लाओस, वियतनाम आदि में व्यापक रूप से अपनाई जाती है। यहीं नहीं वहां इन देशों में इसे प्रभावी उपचार के रूप में माना जाता है। उन्होंने भारतीय पारंपरिक मालिश पद्धतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारत की पारंपरिक मालिश विश्वभर में प्रसिद्ध है और विदेशी नागरिक इसे अपनाने भारत आते हैं, उसी तरह दक्षिण-पूर्व एशिया में लोग फुट रिफ्लेक्सोलॉजी के लिए जाते हैं। यह उपचार गैर-आक्रामक, सुरक्षित और विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
सुधा मूर्ति ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि भारत सरकार, विशेष रूप से आयुष मंत्रालय, पहले से ही हर्बल, प्राकृतिक और समय-परीक्षित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिए जाना जाता है। ऐसे में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी भी एक पारंपरिक उपचार पद्धति है, जिसे वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और समुचित ज्ञान के साथ आयुष अस्पतालों में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने मधुमेह (डायबिटीज) की समस्या पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत में यह एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। मधुमेह रोगियों के पैरों में संवेदनशीलता अधिक होती है और समय रहते देखभाल न होने पर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में हर अस्पताल में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी और फुट केयर के लिए अलग विभाग होना चाहिए, ताकि गैर-आक्रामक तरीकों से दर्द कम किया जा सके और शुरुआती स्तर पर ही समस्याओं की पहचान हो सके।
सुधा मूर्ति ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से डायबिटीज राहत संबंधी शुरुआती हस्तक्षेप संभव होगा, बीमारी के कारणों को समझने में मदद मिलेगी और मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सकेगा। उन्होंने इसे शरीर के एक उपेक्षित हिस्से से जुड़ा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए सरकार से आग्रह किया कि इस नई अवधारणा को अपनाकर लोगों को सही दिशा में उपचार उपलब्ध कराया जाए। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि पैरों की देखभाल और उपचार को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
जीसीबी/एएस
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