CM Vishnu Deo Sai ने रायपुर में 1100 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र
रायपुर, आठ अक्टूबर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
साय ने कहा है, ‘‘हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लगभग 1100 चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अधिकारियों ने बताया कि सात और आठ अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ और जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता तथा कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।
पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की।
Indian Air Force के आधिकारिक गीत का इतिहास, अंग्रेजी में लिखकर हुआ था हिंदी अनुवाद
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के प्रेरणादायक गीत के शब्द और धुन वायु योद्धाओं के दिलों में गहराई से बसे हुए हैं। हालांकि, बल के साथ इस गीत का जुड़ाव लगभग 34 वर्ष पहले 1992 में वायु सेना की हीरक जयंती पर हुआ था। इस गीत के मूल बोल तत्कालीन ग्रुप कैप्टन जी. जे. शॉ की पत्नी जोरा शॉ द्वारा अंग्रेजी में लिखे गए थे, जिनका बाद में इसके प्रसिद्ध हिंदी संस्करण में अनुवाद किया गया।
‘देश पुकारे जब सबको, दुख-सुख बांटे एक समान; नीली वर्दी वालों का दल, बढ़ता आगे सीना तान’ - ये इस समर्पित गीत की शुरुआती पंक्तियां हैं, जिसे भारतीय वायु सेना या उससे जुड़े निकायों द्वारा आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता है। बृहस्पतिवार को वायु सेना ने हिंडन वायु सेना अड्डे पर एक भव्य परेड के साथ अपनी 94वीं वर्षगांठ मनाई, जिसका नेतृत्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने किया। इससे एक दिन पहले, सात अक्टूबर को वायु सेना प्रमुख ने यहां सुब्रतो पार्क में ‘एयर फोर्स एसोसिएशन’ (एएफए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपना संबोधन दिया था।
कार्यक्रम में मौजूद वायु सेना प्रमुख, सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने मिलकर यह वायु सेना गीत गाया। इस दौरान सामने स्क्रीन पर वीडियो चल रहा था और नीचे की तरफ गीत के बोल भी लिखकर आ रहे थे। एएफए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एयर मार्शल जगजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने वायु सेना प्रमुख के संबोधन से पहले इस गीत का संक्षिप्त इतिहास साझा किया।
उन्होंने बताया कि आजादी के बाद वायु सेना का अपना कोई गीत नहीं था और बल के 60 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 1992 में इसे शामिल किया गया था। इस गीत की परिकल्पना एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एन. सी. सूरी के कार्यकाल के दौरान की गई थी, जिन्होंने 1991 से 1993 तक वायु सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं दी थीं। एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) सिंह ने बताया कि उनके मार्गदर्शन में हीरक जयंती समारोह के लिए एक समिति का गठन किया गया था।
एयर मार्शल के. डी. लुईस इस समारोह के आयोजन से जुड़े थे और उन्हीं की एक पहल बल के लिए एक समर्पित गीत तैयार करने की थी। उन्होंने कहा, ‘तत्कालीन ग्रुप कैप्टन जी. जे. शॉ की पत्नी ज़ोरा शॉ ने अंग्रेजी में यह गीत लिखा था।’ एएफए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाद में शिक्षा निदेशालय के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा इसका हिंदी में अनुवाद किया गया।
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