NHRC की दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस: जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों से कथित यौन उत्पीड़न मामले में 2 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही, आयोग ने बिहार के दरभंगा जिले के एक प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत को लेकर भी जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने बृहस्पतिवार को एक बयान में यह जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि एनएचआरसी का मानना है कि अगर खबर में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाती है।
आयोग ने कहा कि उसने “एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया है कि नयी दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने तीन महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न किया।” उसने बताया कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर इस मामले में दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा कि पांच अक्टूबर को प्रकाशित खबर के मुताबिक, नयी दिल्ली जिला पुलिस को कथित घटनाओं के बारे में शिकायतें मिली थीं, जिन्हें जांच के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया।
एनएचआरसी ने एक अलग बयान में कहा कि आयोग ने उस मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बिहार के दरभंगा जिले के कीरतपुर में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की छत का मुख्य खंभा तीन-चार महीने पहले गिर जाने के बाद छत को लकड़ी की बेंच, डेस्क और ईंटों के सहारे “अस्थायी रूप से टिकाया गया है।”
उसने कहा कि इससे स्कूल के लगभग 191 छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा है। आयोग ने कहा कि अगर खबर में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाती है। उसने बताया कि मामले में दरभंगा के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली में 9 और 10 अक्टूबर को बंद रहेंगी शराब की दुकानें: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आबकारी विभाग का फैसला, 20 हजार जवान तैनात
दिल्ली सरकार ने शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ‘‘मौजूदा स्थिति’’ के मद्देनजर नौ और 10 अक्टूबर को शराब की दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया है। आबकारी विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर एहतियाती कदम के तौर पर शराब की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया गया है। आदेश में कहा गया है, ‘‘मौजूदा स्थिति और दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के मद्देनजर, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियाती उपाय के तौर पर यह आदेश दिया जाता है कि दिल्ली में लाइसेंस फॉर्म एल-6, एल-6 एवं एल-6एफजी, एल-8, एल-10 तथा एल-8 एवं एल-14 के तहत संचालित सभी खुदरा शराब की दुकानें नौ और 10 अक्टूबर को पूरी तरह बंद रहेंगी।’’
हालांकि आबकारी लाइसेंस वाले होटल, क्लब, बार और रेस्तरां में शराब परोसी जा सकेगी। यह आदेश विपक्षी दलों के जारी प्रदर्शनों के बीच आया है, जो कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कॉजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में 20,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारी ने लोगों से किसी भी अनधिकृत जमावड़े में शामिल होने से बचने की अपील की।
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