पिता Murli Deora ने बदली थी US की नीति, Milind Deora ने याद किया किस्सा
कई दशकों तक पाकिस्तान खुद को वॉशिंगटन का बेहद ज़रूरी सहयोगी मानता रहा। फिर, कोल्ड वॉर, परमाणु हथियारों को लेकर चिंता और भारतीय उपमहाद्वीप के बारे में अमेरिका की बदलती सोच के बीच, यह रिश्ता कमज़ोर पड़ने लगा। कांग्रेस नेता मिलिंद देवरा के मुताबिक, उनके दिवंगत पिता मुरली देवरा भी उन लोगों में शामिल थे जो इस रिश्ते को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे थे। यह बात एक ऐसी जगह सामने आई जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बारे में एक सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट सेक्शन में। एक इंटरव्यू में, मुशर्रफ ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के रिश्तों को धोखे की जानी-पहचानी भावना के साथ याद किया। मुशर्रफ ने कहा कि 1947 से 1989 तक, यानी 42 सालों तक हम अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी थे।" उन्होंने कोल्ड वॉर के दौरान पाकिस्तान की भूमिका और सोवियत संघ के खिलाफ वॉशिंगटन के साथ उसके सहयोग को याद किया। फिर हालात बदले।
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मुशर्रफ ने बताया कि 1989 से 2001 के बीच पाकिस्तान सबसे करीबी सहयोगी से बदलकर सबसे ज़्यादा प्रतिबंध झेलने वाला सहयोगी बन गया। उन्होंने F-16 विमानों की सप्लाई रुकने, लगातार लगे प्रतिबंधों और आखिर में अमेरिका के भारत की तरफ रणनीतिक झुकाव का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का "42 सालों तक इस्तेमाल किया गया और फिर उसे छोड़ दिया गया। इस बात ने एक एक्स यूज़र को बातचीत में मुरली देवरा का ज़िक्र करने के लिए प्रेरित किया। यूज़र ने देवरा की दोस्ती का ज़िक्र किया जो अमेरिका के दिवंगत कांग्रेसी स्टीफन सोलार्ज़ से थी। सोलार्ज़ एक डेमोक्रेट थे और वॉशिंगटन की दक्षिण एशिया नीति में उनकी अहम भूमिका थी। यूज़र का तर्क था कि अमेरिका के रुख में बदलाव लाने में सोलार्ज़ ने अहम भूमिका निभाई थी।
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यूज़र की बात साफ़ थी जनरल मुशर्रफ़ का दर्द समझा जा सकता है। मिलिंद देवरा का जवाब भी उतना ही साफ़ था। उन्होंने कहा बिल्कुल। इसके बाद उन्होंने इस कहानी में सीधे अपने पिता का ज़िक्र किया। देवरा ने लिखा मुझे गर्व है कि मेरे स्वर्गीय पिता मुरली देवरा ने अमेरिका-पाकिस्तान के पुराने नज़रिए को चुनौती देने और भारतीय उपमहाद्वीप के प्रति पश्चिमी देशों के ज़्यादा संतुलित नज़रिए को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका के दिवंगत कांग्रेसी स्टीफन सोलरज़ और सीनेटर लैरी प्रेसलर जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम किया। यह एक छोटी सी पोस्ट थी, लेकिन इसने उस रिश्ते के बारे में बहुत कुछ उजागर किया जो कभी दक्षिण एशिया में अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा हुआ करता था।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग: Mamata Banerjee जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में हो सकती हैं शामिल
कोलकाता, आठ अक्टूबर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल हो सकती हैं, हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर राष्ट्रीय राजधानी के लिए उड़ान भरने से पहले संवाददाताओं से बातचीत में बनर्जी ने बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों और चुनावी अनियमितताओं को लेकर भाजपा तथा निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। ममता ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना होने के लिए यहां पहुंची थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल हो सकती हूं, लेकिन अभी कुछ भी निश्चित नहीं है। हमारे उनके (कॉजपा) साथ संबंध रहे हैं और हमने अपना समर्थन दिया है। हमारी भागीदारी के बारे में आगे का फैसला बाद में लिया जाएगा।’’ बनर्जी राज्य में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लाखों नाम अनुचित तरीके से हटाए जाने के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाती रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग ‘‘चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की साजिश में मिले हुए’’ हैं, जिसके कारण राज्य की सत्ता में बदलाव हुआ। उन्होंने बृहस्पतिवार को भी भाजपा और निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘बंगाल में जिस तरह चुनाव कराया गया, वैसा चुनाव कभी नहीं हुआ। क्या आपने कभी सुना है कि चुनाव से पहले कोई यह घोषणा कर दे कि वह कितनी सीटें जीतेगा?
इससे योजनाबद्ध मतदान, फर्जी मतदान, धांधली और वोट चोरी पर सवाल उठते हैं। ऐसी व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती और कोई भी पार्टी वोट लूटकर अनिश्चितकाल तक सत्ता में नहीं रह सकती।’’ बनर्जी ने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है और सभी लोग पूजा में व्यस्त हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रदर्शन में शामिल होना जरूरी लगा। उन्होंने कहा, ‘‘जब लोग किसी महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए अपनी आवाज उठा रहे हों, तो हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हमारी गैरमौजूदगी सही संदेश नहीं देगी।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का फैसला किया था, लेकिन आयोजकों ने उनका नाम शामिल करने के साथ व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का अनुरोध किया, जिसके बाद उन्होंने इसमें जाने का फैसला किया। बनर्जी ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के प्रति भी एकजुटता जताई और कहा कि छह अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया, वह उचित नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं।
हर किसी को किसी आंदोलन में शामिल होने का अधिकार है, लेकिन प्रियंका के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह भी बहुत गलत था।’’ उन्होंने कहा कि वह विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगी और देशभर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से हस्ताक्षर तथा समर्थन लेने की कोशिश करेंगी। इस बीच, ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस गुट के प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर उनकी उड़ान में संभावित ‘‘जानबूझकर देरी’’ का आरोप लगाया। घोष ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ममता बनर्जी की दिल्ली जाने वाली उड़ान दोपहर तीन बजे निर्धारित थी।
बाद में हमें बताया गया कि इसमें 3:45 बजे तक देरी हुई है। अब बताया गया है कि यह 4:30 बजे रवाना होगी। आगे की देरी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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