'नाना जी वास्तव में बेमिसाल थे', नाना पाटेकर के निधन पर अक्षय कुमार, आर माधवन और बॉलीवुड हस्तियों ने जताया शोक
बहुमुखी प्रतिभा के धनी और भारतीय सिनेमा में अपनी दमदार संवाद अदायगी के लिए मशहूर 75 वर्षीय दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन से सिनेमा जगत में गहरा शोक फैल गया है। बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अक्षय कुमार, आर. माधवन, कंगना रनौत सहित सिनेमा जगत की तमाम हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी और पर्दे पर दमदार मौजूदगी के लिए मशहूर 75 वर्षीय अभिनेता का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। पणजी के निकट डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में वह बेहोश पाए गए थे जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अक्षय कुमार ने 2007 की कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ में पाटेकर के साथ काम किया था। फिल्म में पाटेकर द्वारा निभाया गया डॉन उदय शेट्टी का किरदार काफी लोकप्रिय हुआ था।
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अक्षय ने अभिनेता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। अक्षय ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘नाना जी के निधन की खबर से वास्तव में बहुत दुखी हूं। वह उन दुर्लभ अभिनेताओं में से थे, जिन्हें दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनकी आवाज, वह तीव्रता, हर अभिनय में वह ईमानदारी... वह पूरी तरह अपने आप में एक अलग शख्सियत थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके साथ फिल्म के सेट पर बिताई बहुत सी यादें हमेशा मेरे दिल के करीब रहेंगी। नाना जी वास्तव में बेमिसाल थे। यह विश्वास करना मुश्किल है कि आप नहीं रहे। इन सभी यादों के लिए धन्यवाद। आपकी कमी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।’’
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अक्षय ने 2025 में आई फिल्म ‘हाउसफुल 5’ में आखिरी बार पाटेकर के साथ काम किया था। आर माधवन ने पाटेकर को ‘‘दिग्गज’’ बताते हुए कहा कि 1991 की समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में उनके अभिनय से वह बेहद प्रभावित और प्रेरित हुए थे। माधवन ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कहा, ‘‘एक दिग्गज हमसे हमेशा के लिए दूर चला गया। रंगमंच पर दिए अविस्मरणीय पलों और अभिनेताओं को दिए अमूल्य सबक के लिए धन्यवाद। मुझे आज भी याद है कि ‘प्रहार’ देखने के बाद मैं कितना प्रभावित और प्रेरित हुआ था। सर, आपके जैसा दूसरा कोई नहीं होगा। आत्मा को शांति मिले।’’
कंगना रनौत ने कहा कि पाटेकर को स्वस्थ देखकर उनके निधन की खबर विशेष रूप से स्तब्ध करने वाली है। उन्होंने लिखा, ‘‘यह बेहद दुखद और त्रासद खबर है, खासकर इसलिए क्योंकि नाना जी बिल्कुल स्वस्थ और फिट नजर आते थे। ॐ शांति।’’ अभिनेत्री कियारा आडवाणी ने भी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पाटेकर की एक तस्वीर साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भूमि पेडनेकर ने भी पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, ‘‘सर, आपकी आत्मा को शांति मिले। ॐ शांति। आपके परिवार और सभी प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं।’’
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कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने कहा कि वह इस खबर से ‘‘स्तब्ध’’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह विश्वास करना मुश्किल है। नाना भाई, आपकी आत्मा को शांति मिले।’’ भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में शामिल पाटेकर ने 1978 में ‘गमन’ से फिल्मों में कदम रखा था। उन्हें सफलता 1989 में आई ‘परिंदा’ से मिली, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘अंगार’, ‘अपहरण’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘राजनीति’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ शामिल हैं। पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
जब दिलीप कुमार ने कहा था, नाना पाटेकर के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा ‘क्रांतिवीर’ का नाम
‘सलाम बॉम्बे!’, ‘खामोशी’ और ‘वेलकम’ जैसी अनगिनत यादगार फिल्मों में अपने जीवंत और बहुमुखी अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 76 वर्ष की आयु में गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। नाना पाटेकर के सिनेमाई सफर का जिक्र जब भी होगा, 1994 में आई उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के सुपरहिट और प्रतिष्ठित होने से बहुत पहले ही हिंदी सिनेमा के ‘ट्रेजेडी किंग’ दिलीप कुमार ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह फिल्म नाना पाटेकर की पहचान बन जाएगी।
दिलीप कुमार की इस टिप्पणी का किस्सा ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार ने दो साल पहले फिल्म के 30 साल पूरे होने के मौके पर सुनाया था। कुमार ने यूट्यूब चैनल ‘बॉलीवुड ठिकाना’ को बताया था कि दिलीप कुमार ने सुनील दत्त के ‘अजंता आर्ट्स’ में ‘क्रांतिवीर’ की फिल्म का ट्रायल देखा था। इस दौरान दिलीप कुमार, सायरा बानो और उनके परिवार के कुछ सदस्य मौजूद थे। मेहुल कुमार के अनुसार, फिल्म खत्म होने के बाद दिलीप कुमार बाहर आए और एक संगमरमर की कुर्सी पर बैठे, जिसके पीछे नरगिस की तस्वीर थी।
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उन्होंने बताया, ‘‘दिलीप साहब ने मुझे बुलाया और कहा कि आपने ऐसी फिल्म बनाई है कि इसका खुमार लोगों पर बना रहेगा।’’ उनके अनुसार, नरगिस की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए दिलीप कुमार ने बताया कि ‘मदर इंडिया’ का ट्रायल देखने के बाद इसी जगह उन्होंने नरगिस से कहा था कि इसके बाद वह चाहे जो भी करें, ‘मदर इंडिया’ का नाम हमेशा उनके साथ जुड़ा रहेगा। मेहुल कुमार ने कहा, ‘‘दिलीप साहब ने मुझसे कहा कि आप नाना को बता देना कि वह इसके बाद चाहे जो भी करें, ‘क्रांतिवीर’ का नाम हमेशा उनके साथ जुड़ा रहेगा।’’ उन्होंने बताया कि दिलीप कुमार ने फिल्म की काफी सराहना की थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं घर गया और नाना को फोन करके बताया कि दिलीप साहब ने फिल्म देखी है और कहा है कि नाना इसके बाद चाहे जो भी करें, ‘क्रांतिवीर’ का नाम जिंदगी भर उनके साथ रहेगा। और आज देखिए, ‘क्रांतिवीर’ और नाना आज भी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।’’
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संयोग से नाना पाटेकर को मिला एकमात्र फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार ‘क्रांतिवीर’ के लिए था और यह पुरस्कार उन्हें दिलीप कुमार ने ही प्रदान किया था। बाद में एक साक्षात्कार में पाटेकर ने बताया था कि फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने के बाद दिलीप कुमार ने उन्हें अपने घर बुलाया था। नाना पाटेकर ने कहा था, ‘‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे दिग्गजों से मिलने का मौका मिला। दिलीप कुमार ने एक बार मुझे अपने घर बुलाया था। बारिश हो रही थी और मैं पूरी तरह भीग गया था। उन्होंने मुझे देखा और सबसे पहले तौलिया लाकर खुद मुझे सुखाया। फिर अपना एक कुर्ता लाकर मुझे दिया।’’
पाटेकर ने कहा था कि इसके बाद उन्हें किसी और पुरस्कार की जरूरत नहीं है। 1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया था। फिल्म में नाना पाटेकर, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फरीदा जलाल, परेश रावल, टीनू आनंद और डैनी डेंग्जोंगपा ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। फिल्म ने चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था।
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नाना पाटेकर को उस वर्ष ‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार दोनों मिले थे। पाटेकर ने फिल्म में एक स्वतंत्रता सेनानी के अड़ियल बेटे की भूमिका निभाई थी, जो बाद में गरीबों के कल्याण के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति बन जाता है। फिल्म में पाटेकर का चर्चित संवाद ‘‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा, बता’’ आज भी मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में सांप्रदायिक सौहार्द पर बने प्रभावशाली दृश्यों में गिना जाता है।
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