Share Market Today: गिरावट के साथ खुला बाजार, 21 जुलाई को SBI AMC और 2 कंपनियों की होगी बड़ी लिस्टिंग
भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र में शानदार तेजी दिखाई थी, लेकिन नए सप्ताह की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई है। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में खुले, जबकि निवेशकों की नजर अब 21 जुलाई को होने वाली बड़ी लिस्टिंग्स पर टिकी हुई है। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट समेत तीन कंपनियां शेयर बाजार में पदार्पण करने जा रही हैं, जिससे बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है।
गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार
सोमवार, 20 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार हल्की गिरावट के साथ खुला। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत बढ़त दर्ज की थी। ऑटो, बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला था।
पिछले सत्र में क्यों आई तेजी?
17 जुलाई के कारोबारी सत्र में निवेशकों ने बड़े शेयरों में जमकर खरीदारी की। रिलायंस इंडस्ट्रीज के तिमाही नतीजों को लेकर उम्मीदों और वैल्यू बाइंग की वजह से बाजार को मजबूती मिली। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार की तेजी में अहम योगदान दिया।
21 जुलाई पर टिकी निवेशकों की नजर
मंगलवार, 21 जुलाई बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है। इस दिन देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रही है। लंबे समय से निवेशकों को इस लिस्टिंग का इंतजार था।
अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड और मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज की भी एंट्री
SBI फंड्स मैनेजमेंट के अलावा टेक्सटाइल क्षेत्र की कंपनी अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड भी स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी शुरुआत करेगी। वहीं प्रिसिजन इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनी मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज BSE SME प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग शुरू करेगी।
बाजार की दिशा पर रहेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट नतीजे, वैश्विक संकेत और नई लिस्टिंग्स बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निवेशक फिलहाल प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों और नए शेयरों की बाजार में एंट्री पर नजर बनाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार में फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों में मजबूती बनी हुई है। बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों में निवेशकों की रुचि देखने को मिल रही है। वहीं नई लिस्टिंग्स से बाजार में अतिरिक्त गतिविधि और वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
Plastic Notes in India: अब नहीं फटेंगे बैंक के नोट! RBI लाने जा रहा है प्लास्टिक करेंसी, जानें क्या होगा खास
Plastic Notes in India: आने वाले दिनों में आपके हाथों में मौजूद नोटों का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अब पारंपरिक कागज के नोटों से हटकर प्लास्टिक यानी 'पॉलीमर' नोटों को चलन में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों से की जाएगी।
क्यों जरूरी हैं प्लास्टिक नोट? (Plastic Notes)
मौजूदा समय में आरबीआई जो कागज के नोट छापता है, उनके जल्दी फटने या खराब होने की समस्या आम है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए केंद्रीय बैंक अब पॉलीमर नोटों को प्राथमिकता दे रहा है। प्लास्टिक के नोट कागज की तुलना में काफी मजबूत होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं। ये नोट न केवल पानी और नमी से सुरक्षित रहते हैं, बल्कि इन पर धूल-मिट्टी भी कम जमा होती है। दुनिया के 60 से अधिक देशों में पहले से ही प्लास्टिक के नोटों का उपयोग किया जा रहा है।
घरेलू स्तर पर निर्माण की दिशा में बढ़े कदम
भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने देश में ही 'पॉलीमर सब्सट्रेट' बनाने की सुविधा शुरू करने के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जारी किया है। यह एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट होती है जिस पर नोट छापे जाते हैं। BRBNMPL का मुख्य उद्देश्य सिर्फ मटेरियल आयात करना नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारत में ही इनका उत्पादन करना है।
विशेषज्ञों और सहयोगियों की तलाश
17 जुलाई को जारी ईओआई (EOI) के माध्यम से ऐसे सहयोगियों की तलाश की जा रही है, जिन्हें सिक्योरिटी-ग्रेड पॉलीमर सबस्ट्रेट बनाने में महारत हासिल हो। यह ईओआई कोई सीधा खरीद ऑर्डर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसे तकनीकी भागीदारों को चिन्हित करना है जो व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने में भारत की मदद कर सकें। कंपनी एक ऐसे पार्टनर की तलाश में है जो टेक्नोलॉजी के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बना सके।
आर्थिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
पॉलीमर नोटों का आना भारतीय मुद्रा व्यवस्था के लिए दशकों बाद एक बड़ा तकनीकी बदलाव होगा। अभी देश में कागज के नोटों की छपाई की जा रही है, जो समय के साथ अपनी उपयोगिता खो देते हैं। सरकार और आरबीआई का यह प्रयास नोटों की उम्र बढ़ाने और उन्हें अधिक सुरक्षित व टिकाऊ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
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