EPF Nomination: नॉमिनी नहीं जोड़ा तो क्या होगा? जानिए परिवार को पीएफ का पैसा पाने के लिए क्या करना होगा
EPF Nomination: नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि रिटायरमेंट के लिए बड़ी बचत होती। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता हर महीने वेतन का एक हिस्सा जमा करते हैं।
समय के साथ यह रकम एक बड़ा फंड बन जाती, जिसका इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद किया जा सकता, लेकिन अगर ईपीएफ खाताधारक की मौत हो जाए और उसने खाते में नॉमिनी नहीं जोड़ा हो, तो परिवार को पैसा मिलने की प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल और लंबी हो सकती।
ईपीएफ खाते में नॉमिनी क्यों जरूरी?
सबसे जरूरी बात यह है कि नॉमिनी दर्ज नहीं होने पर ईपीएफ की जमा रकम खत्म नहीं होती और न ही वह सरकार के पास चली जाती। ऐसे मामले में पात्र परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस जरूरी दस्तावेज जमा करके ईपीएफ की रकम और अन्य लाभों पर दावा कर सकते।
अगर कोई नॉमिनी का नाम नहीं है, तो ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक पात्र परिवार के सदस्यों को ईपीएफ लाभ में बराबर हिस्सा मिल सकता है।अगर कोई पात्र परिवार सदस्य या कानूनी वारिस नहीं है, तो कानूनी रूप से हकदार व्यक्ति को रकम जारी की जाती। हालांकि, नॉमिनी नहीं होने पर क्लेम सेटलमेंट में ज्यादा समय लग सकता है।
जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर सामान्य तौर पर क्लेम करीब सात दिन में प्रोसेस हो सकता है, लेकिन नॉमिनी की गैरमौजूदगी में अतिरिक्त दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया के कारण देरी हो सकती है।
3 साल तक क्लेम नहीं किया तो खाता हो सकता निष्क्रिय
ईपीएफओ के मुताबिक, अगर पीएफ खाते में तीन साल तक कोई दावा नहीं किया जाता है, तो वह निष्क्रिय खाते की श्रेणी में जा सकता। इसलिए परिवार और कानूनी वारिसों को खाताधारक की मृत्यु के बाद क्लेम करने में गैरजरूरी देरी नहीं करनी चाहिए।
पुरुष और महिला सदस्य के लिए परिवार की परिभाषा अलग
ईपीएफओ के नियमों में पात्र परिवार की परिभाषा पुरुष और महिला सदस्य के लिए अलग हो सकती है।
पुरुष सदस्य: पत्नी, बच्चे (विवाहित या अविवाहित), माता-पिता, बेटे की विधवा और उसके बच्चे पात्र परिवार में शामिल हो सकते हैं।
महिला सदस्य: पति, पति के माता-पिता, बच्चे (विवाहित या अविवाहित), माता-पिता, बेटे की विधवा और उसके बच्चे पात्र परिवार में शामिल हो सकते हैं।
ई नॉमिनेशन से आसान होगा क्लेम
ईपीएफओ अपने सदस्यों को ई-नॉमिनेशन की सुविधा देता है। इसके जरिए सदस्य ऑनलाइन अपने लाभार्थी का नाम दर्ज कर सकते हैं। नॉमिनी दर्ज होने से परिवार के लिए ईपीएफ, ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना और बीमा से जुड़े लाभों का दावा करना आसान हो सकता है और कई मामलों में EPFO कार्यालय जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
ई-नॉमिनेशन के लिए सदस्य का आधार से लिंक UAN, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और ईपीएफओ पोर्टल पर अपडेटेड फोटो ओर पता होना जरूरी है। नॉमिनी की आधार डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी और फोटो भी देनी होती है।
इसलिए ईपीएफ सदस्यों को समय रहते अपना ई-नॉमिनेशन पूरा कर लेना चाहिए और परिवार के सदस्यों की जानकारी भी अपडेट रखनी चाहिए। इससे किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को रिटायरमेंट की बचत और संबंधित लाभ हासिल करने में कम परेशानी होगी।
(प्रियंका कुमारी)
MF Claim: म्यूचुअल फंड निवेशक की मौत के बाद क्लेम करना हुआ आसान, नॉमिनी को 3 बातों का रखना होगा ध्यान
Mutual fund death claims: म्यूचुअल फंड निवेशक की मौत के बाद उसके निवेश की यूनिट्स या पैसा परिवार को हासिल करने की प्रोसेस अब पहले के मुकाबले आसान हो सकती। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड यूनिट्स के ट्रांसमिशन से जुड़े नियमों को और सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया।
इसके बाद एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया (AMFI) ने भी मृत निवेशक की यूनिट्स या रकम पर क्लेम करने की प्रोसेस से जुड़े मानकों में बदलाव किया। इसका मकसद परिवारों को एड्रेस, नाम और सिग्नेचर में मामूली अंतर जैसी वजहों से होने वाली परेशानियों और देरी से राहत देना है।
निवेशक की मौत की सूरत में क्लेम करना आसान होगा
म्यूचुअल फंड में ट्रांसमिशन का मतलब निवेशक की मौत के बाद उसकी यूनिट्स या उनसे मिलने वाली रकम को नियमों के मुताबिक जीवित ज्वाइंट होल्डर, नॉमिनी या कानूनी वारिस को ट्रांसफर करना है। नए बदलावों में खास तौर पर ऐसे मामलों को आसान बनाने पर जोर दिया गया है, जहां रिकॉर्ड और क्लेम के दस्तावेजों में कुछ अंतर मिल जाता।
एड्रेस में अंतर होने पर राहत
अगर मृत निवेशक के म्यूचुअल फंड फोलियो में दर्ज पता और क्लेम के दौरान दिए गए पते में अंतर है, तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियां संबंधित दस्तावेजों के आधार पर उपलब्ध सबसे हालिया एड्रेस डिटेल्स पर भरोसा कर सकती। इससे पुराने फोलियो में दर्ज पते के कारण होने वाली परेशानी कम हो सकती।
नाम में अंतर होने पर आधार या पासपोर्ट दिया जा सकता
नाम में अंतर होने पर आधार या पासपोर्ट जैसे सेल्फ-सर्टिफाइड दस्तावेज जमा किए जा सकते। वहीं, सिग्नेचर में अंतर होने पर रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) मामले की प्रकृति के अनुसार उचित प्रक्रिया अपना सकते हैं। सेबी ने AMFI को संबंधित संस्थाओं को ट्रेनिंग देने की भी सलाह दी है, ताकि सभी एएमसी में ट्रांसमिशन की प्रक्रिया एक जैसी और आसान हो।
कौन कर सकता है क्लेम?
ज्वाइंट होल्डिंग: एक निवेशक की मौत पर जीवित ज्वाइंट होल्डर नियमों के मुताबिक यूनिट्स ट्रांसफर करा सकता है।
नॉमिनी दर्ज है: सिंगल होल्डर की मौत के बाद रजिस्टर्ड नॉमिनी ट्रांसमिशन के लिए आवेदन कर सकता।
नॉमिनी नहीं है: ऐसे मामले में कानूनी वारिसों को क्लेम करना होता है और दस्तावेजों की जरूरत ज्यादा हो सकती।
आमतौर पर डेथ सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, केवायसी, ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म और बैंक अकाउंट प्रूफ जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते। नॉमिनी न होने की स्थिति में वसीयत, सक्सेशन सर्टिफिकेट, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, कोर्ट ऑर्डर, इंडेम्निटी बॉन्ड या अन्य दस्तावेज भी जरूरी हो सकते।
नॉमिनी जरूरी, लेकिन वसीयत भी अहम
नॉमिनेशन परिवार के लिए क्लेम की प्रक्रिया को आसान बनाता है, लेकिन यह पूरी एस्टेट प्लानिंग का विकल्प नहीं है। निवेश की अंतिम विरासत का अधिकार वसीयत और लागू उत्तराधिकार कानूनों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए बड़े निवेश वाले लोगों को नॉमिनी दर्ज कराने के साथ वसीयत और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखने चाहिए।
निवेशकों को सभी म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनी की जानकारी जांचनी चाहिए। पैन कार्ड, केवायसी, बैंक और एड्रेस डिटेल्स अपडेट रखें और सभी दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग एक जैसी रखें। परिवार को यह भी पता होना चाहिए कि निवेश के रिकॉर्ड कहां रखे गए हैं। इससे भविष्य में क्लेम की प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi









