यशोभूमि में आज IMC 2026 का उद्घाटन, PM मोदी करेंगे संबोधन | India Mobile Congress
नई दिल्ली के यशोभूमि में आज इंडिया मोबाइल कांग्रेस यानी IMC के 10वें संस्करण का उद्घाटन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 10 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। चार दिवसीय सम्मेलन का समापन 10 अक्टूबर को होगा। इस दौरान 6G, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और टेलीकॉम सेक्टर की नई तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा। #indiamobilecongress #pmmodi #6g #telecom #satellitecommunication #yashobhoomi #sudarshannews ------------------------------------------------------------------------------------------------------- "प्रखर राष्ट्रवाद की बुलंद आवाज़" सुदर्शन न्यूज़ चैनल आप देख सकते हैं आपको दिए हुए लिंक पर जाए और सुदर्शन से जुड़े तमाम चैनल जिसमें आप इतिहास, विज्ञान, एजुकेशन, इंटरव्यू और बॉलीवुड़ की जानकारी मिल सकती है। सुदर्शन टैक्नोलॉजी और सुदर्शन डिजिटल पर होने वाले लाइव इंटरव्यू को देखने के लिए सुदर्शन के मैन यूट्यूब चैनल को फॉलो करे। नए चैनल को लेकर आपकी प्रतिक्रिया हमें जरूर दे। "Voice of an intense nationalist" You can see the given links on Sudarshan News Channel and by visiting the link channel related to Sudarshan, you can get information about history, science, education, interviews and Bollywood. To view live interviews with Sudarshan Technology and Sudarshan Digital, follow Sudarshan's main YouTube channel. Please give us your feedback regarding the new channel. #breakingNews #SureshChavhanke #TrendingNews #SudarshanLive #SudarshanNews #HindiNews #Newslive #BindasBol #BindasBolLive #Sudarshan #Hindurastra sudarshan news | sudarshan news live | sudarshan | sudarshan news channel | sudarshan tv | सुदर्शन न्यूज़ | sudarshan channel | sudershan news | सुदर्शन | Breaking | News Hindi | Jihad News | Jihad | Muslim | Hindutuva | Bindas Bol | suresh chavhanke | Jago | Pradosh chavhanke | hindi news | live Skype I.D- SudarshanNews Whatsapp Channel: whatsapp.com/channel/0029Va9FWl8LSmbdEqIsfK2G Facebook: https://www.facebook.com/sudarshantvnews Twitter : https://twitter.com/SudarshanNewsTV Instagram: https://www.instagram.com/Sudarshantvnews/ Join Our Teligram https://t.me/sudarshannewstv Follow on Koo: https://www.kooapp.com/profile/sudarshannewstv Visit Website : www.sudarshannews.com Subscribe YouTube: https://www.youtube.com/c/SudarshanNewsTV बिंदास बोल से जुड़ी तमाम विडियों देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें. https://www.youtube.com/channel/UCNBEfg_PfpSjk8DqiafJJhg संपर्क करें - social@sudarshantv.com व्हाट्स एप - 9540558899 फोन नम्बर - 0120 - 4999900
ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया:ब्रिटेन से 12 बमवर्षक हटे, खाड़ी के कई सैन्य ठिकाने छोड़े
ईरान पर हमला करके अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था, लेकिन अब यही युद्ध उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ईरानी हमलों के बाद अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बदलनी पड़ी है। अब ब्रिटेन के एक एयरबेस से B-1 बमवर्षक विमान भी अचानक अमेरिका वापस बुला लिए गए। अमेरिका ने इसे सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया सामान्य कदम बताया है। राष्ट्रपति ट्रम्प और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। लेकिन पिछले कुछ महीनों की घटनाएं बताती हैं कि ईरानी हमलों ने अमेरिकी सैन्य रणनीति को बदलने पर मजबूर किया है। बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई में तैनात अमेरिकी सैनिकों को हटाना पड़ा है। कुछ ठिकानों को हुए नुकसान के बाद अमेरिका उन्हें दोबारा बनाने के बजाय ईरान से और दूर ले जाने पर विचार कर रहा है। ब्रिटेन से 12 बमवर्षक अचानक क्यों हटाए गए? ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर अमेरिका के 12 B-1 बमवर्षक विमान तैनात थे। ये विमान लंबी दूरी तक उड़कर हमला करने में सक्षम हैं। लेकिन अमेरिकी कमांडरों को ऐसी जानकारी मिली कि ईरान समर्थित लोग एयरबेस की बाड़ के ठीक बाहर से ड्रोन हमला करने की तैयारी कर रहे हैं। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि फेयरफोर्ड एयरबेस अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य सहयोग का पुराना केंद्र है। इसे द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1944 में डी-डे की तैयारी के समय बनाया गया था। ब्रिटेन का एयरबेस अकेला मामला नहीं है। ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों के बाद अमेरिका ने बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों से अपने कई सैनिकों को हटाया। ये सभी ठिकाने ईरान की मिसाइल और ड्रोन की पहुंच में थे। कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को काफी नुकसान हुआ। पोर्ट शुएबा पर हुए हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरानी हमले में अमेरिकी सेना का एक ऑपरेशन सेंटर भी नष्ट हो गया। अमेरिकी सैनिकों को होटल-दफ्तरों में रहना पड़ा ईरानी हमलों का असर इतना ज्यादा हुआ कि कई अमेरिकी सैनिकों को अपने सैन्य ठिकाने छोड़कर होटल और दफ्तरों में जाना पड़ा। यहीं से अमेरिका के सामने नई समस्या खड़ी हुई। ईरान ने यह पता लगाना शुरू कर दिया कि अमेरिकी सैनिक कहां रह रहे हैं। कुछ सैनिक ऐसे होटलों में भी रह रहे थे, जहां सुरक्षा बहुत कम थी। इसके बाद ईरान ने इन जगहों को भी निशाना बनाना शुरू किया। सऊदी अरब में CIA के एक ठिकाने को भी नुकसान पहुंचा। मिडिल ईस्ट में अमेरिका जिन 13 बड़े सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करता था, उनमें से कई हमलों के बाद रहने और काम करने लायक नहीं रहे। पेंटागन के अंदर अब कुछ ठिकानों को फिर से बनाने की बजाय उन्हें और दूर ले जाने पर विचार हो रहा है। ड्रोन हमले ने अमेरिका की सोच बदल दी इस युद्ध से अमेरिका को एक नई बात समझ आई है। पहले माना जाता था कि अगर अमेरिकी सैनिकों और विमानों को दुश्मन की मिसाइलों की पहुंच से दूर रखा जाए तो वे सुरक्षित रहेंगे। लेकिन ड्रोन ने यह सोच बदल दी है। ड्रोन छोटे होते हैं, उन्हें छिपाना आसान है और उन्हें बहुत दूर से भी हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन ने पिछले साल रूस के खिलाफ इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। उसने ड्रोन को ट्रकों में छिपाकर रूस के अंदर तक पहुंचाया और वहीं से उन्हें उड़ाकर सैन्य विमानों पर हमला किया। अब अमेरिका को डर है कि इसी तरह की रणनीति उसके सैन्य ठिकानों के खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकती है। ईरानी सेना कमजोर हुई, लेकिन उसने अमेरिका को रोक दिया ट्रम्प का कहना है कि शुरुआती हमलों में ईरान की पूरी नौसेना खत्म हो गई और उसकी वायुसेना भी काम करने की स्थिति में नहीं है। फिर भी ईरान ने अमेरिकी सेना को कई जगह पीछे हटने पर मजबूर किया है। यही इस युद्ध की सबसे बड़ी विडंबना है। ईरान की सेना को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन वह अमेरिकी सैनिकों को ईरान के करीब मौजूद ठिकानों पर टिकने नहीं दे रहा। अमेरिकी सैनिकों को अब पहले से ज्यादा दूर रहना पड़ रहा है। अमेरिका लंबे समय से मिडिल ईस्ट में अपनी सेना की मौजूदगी को इस दलील से सही ठहराता रहा है कि इससे दुनिया के अहम समुद्री रास्ते सुरक्षित रहते हैं। लेकिन अब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर के कुछ हिस्सों में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की पूरी गारंटी नहीं दे पा रहा है। अमेरिका को अपने सैनिक और भी दूर ले जाने पड़ सकते हैं पेंटागन अब इजराइल और जॉर्डन में नए सैन्य ठिकाने बनाने पर विचार कर रहा है। लेकिन यह आसान काम नहीं है। नए ठिकानों के लिए अमेरिकी कांग्रेस से पैसा लेना होगा। इसके बाद निर्माण और तैयारी में कई साल लग सकते हैं। इस बीच अमेरिका को अपने मौजूदा सैनिकों और हथियारों को दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर रखना होगा। यही वजह है कि अमेरिका अब अपने देश के अंदर भी एक बड़े नए सैन्य ठिकाने की योजना पर सोच रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल में अमेरिकी सैनिकों से बात करते हुए मिडिल ईस्ट के क्षतिग्रस्त ठिकानों की बजाय अमेरिका के अंदर नया बड़ा बेस बनाने की बात की। सबसे बड़ा सवाल: क्या अमेरिका पहले जैसा दबदबा रखता है? अमेरिका के सामने अब तीन बड़ी समस्याएं हैं। अमेरिका के लिए यह सिर्फ एक सैन्य समस्या नहीं है। इसका राजनीतिक असर भी हो सकता है। ईरान को कमजोर माना जाता है, फिर भी उसके हमलों के कारण अमेरिका को अपने सैनिक और विमान बार-बार पीछे हटाने पड़ रहे हैं। इससे दूसरे देशों को यह संदेश मिल सकता है कि सीधे अमेरिकी सेना से भिड़ने के बजाय उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भी उसे पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है। यही इस युद्ध का सबसे बड़ा उलटा असर है। ट्रम्प ईरान को झुकाने के लिए युद्ध में उतरे थे। लेकिन अब अमेरिका को ही यह तय करना पड़ रहा है कि ईरान के करीब अपनी सेना को सुरक्षित कैसे रखा जाए। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति जोहरान ममदानी ने पिछले साल नवंबर में न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीता था। उनकी जीत में महंगाई, बढ़ता किराया और रोजमर्रा का खर्च बड़े मुद्दे रहे। पूरी खबर पढ़ें…
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