17 हजार फीट पर इंडिगो विमान पर गिरी आकाशीय बिजली, नोज को पहुंचा नुकसान, पायलट ने लखनऊ में कराई लैंडिंग
पटना से अहमदाबाद जा रही इंडिगो की फ्लाइट बुधवार शाम खराब मौसम के दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आ गई। जिससे करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के अगले हिस्से यानी नोज को नुकसान पहुंचा। इसके बाद पायलट ने विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारा। विमान में 150 यात्री सवार थे और सभी सुरक्षित हैं। वहीं तकनीकी जांच के बाद यात्रियों को दूसरे विमान से अहमदाबाद भेजा गया।
दरअसल इंडिगो की फ्लाइट ने बुधवार दोपहर 3:10 बजे पटना एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। विमान को शाम 5:05 बजे लखनऊ से अहमदाबाद के लिए आगे रवाना होना था। इसी दौरान रास्ते में खराब मौसम के बीच विमान करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर बिजली की चपेट में आ गया। घटना के बाद विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारने का फैसला लिया गया।
आगे की उड़ान के लिए रोक दिया गया विमान
विमान शाम 4:05 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर उतर गया जबकि इसके 4:20 बजे पहुंचने का समय था। लैंडिंग के बाद विमान को तकनीकी दिक्कत के चलते आगे की उड़ान के लिए रोक दिया गया। इंडिगो ने यात्रियों के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की और सभी 150 यात्रियों को शाम 6:22 बजे अहमदाबाद के लिए रवाना किया गया।
नोज के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई
वहीं लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद विमान की जांच की गई तो उसके अगले हिस्से यानी नोज के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। विमान को आगे उड़ाने के बजाय एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। इंजीनियरों की टीम विमान की तकनीकी जांच कर रही है, ताकि बिजली गिरने से हुए नुकसान का पता लगाया जा सके। इस घटना के दौरान विमान में सवार किसी यात्री के घायल होने की जानकारी नहीं है। पायलट ने खराब मौसम के बीच विमान को सुरक्षित लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाया। यात्रियों को लंबे समय तक उसी विमान में बैठाए रखने के बजाय इंडिगो की ओर से दूसरे विमान की व्यवस्था की गई। इसके बाद शाम 6:22 बजे यात्रियों को अहमदाबाद के लिए रवाना किया गया।
विमान पर आकाशीय बिजली गिरने से कितना नुकसान होता है?
दरअसल उड़ान के दौरान विमान के बिजली की चपेट में आने की स्थिति में आमतौर पर करंट विमान की बाहरी सतह से होकर गुजरता है। आकाशीय बिजली अक्सर विमान के नोज या विंगटिप जैसे हिस्से से टकरा सकती है और फिर बाहरी सतह के रास्ते पीछे की तरफ निकल जाती है। विमान की बाहरी संरचना इस तरह तैयार की जाती है कि बिजली का प्रभाव अंदर बैठे यात्रियों तक सीधे न पहुंचे।
इंदौर में पैक्ड घी के 28 सैंपल फेल, 10 में तय सीमा से ज्यादा सीसा, जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में पैक्ड घी के सैंपल फेल होने के मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब “मिलावट” के नए मायने सामने आ रहे हैं। उन्होंने इसे मिलावट, लापरवाही, व्यवस्था की विफलता और सरकारी टालमटोल से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं।
दरअसल, जुलाई से सितंबर के बीच इंदौर में पैक्ड घी के सैंपलों की जांच की गई थी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 28 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 24 सैंपल अनसेफ और 4 सब-स्टैंडर्ड पाए गए। अनसेफ सैंपलों में से 16 की सीसा जांच कराई गई, जिनमें 10 सैंपलों में सीसे की मात्रा तय सीमा से अधिक मिली।
जांच रिपोर्ट आने से पहले बाजार पहुंचा घी
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सीसे की मात्रा 0.1 से 0.21 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक मिली, जबकि इसकी स्वीकार्य सीमा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है। यानी कुछ सैंपलों में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से 5 से 10.5 गुना तक ज्यादा पाई गई। इन 24 अनसेफ सैंपलों से करीब 17 हजार लीटर घी का स्टॉक जुड़ा हुआ है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक कार्रवाई से पहले इस स्टॉक का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा बाजार में पहुंच चुका था। अनुमान के मुताबिक यह मात्रा लगभग 2,550 से 3,400 लीटर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित कंपनियों को चिन्हित बैच का घी बाजार से वापस बुलाने के लिए पत्र भेजे हैं।
विभाग ने साफ किया है कि कार्रवाई पूरे ब्रांड के सभी उत्पादों के खिलाफ नहीं है। फिलहाल जांच में सामने आए उन्हीं सैंपलों और संबंधित बैच को लेकर कार्रवाई की जा रही है। भोपाल स्तर से गुजरात, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों के संबंधित अधिकारियों को भी पत्र भेजे गए हैं ताकि वहां भी संबंधित ब्रांड और बैच की जांच कराई जा सके।
कांग्रेस ने किए ‘मिलावट’ पर सवाल
इस मामले को लेकर जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरा है। उन्होंने कहा कि इंदौर के प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उनके प्रभार वाले शहर में खाद्य पदार्थों में मिलावट और सीसा मिलने के मामले ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में अब “मिलावट” के नए मुहावरे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ घी के सैंपल फेल होने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल है कि असुरक्षित घी जांच रिपोर्ट आने से पहले बाजार तक कैसे पहुंच गया और उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके स्टॉक को लेकर क्या कार्रवाई की गई है।
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में
"मिलावट" के नए मुहावरे!मि – मिलावट.
ला – लापरवाही.
व – व्यवस्था की विफलता.
ट – टालमटोल की सरकारी नीति.वही #Indore जिसके प्रभारी मंत्री CM डॉ. मोहन यादव हैं! अब सवाल प्रभारी मंत्री की निगरानी में मिली "मिलावट" का भी है!@DrMohanYadav51 pic.twitter.com/Thg9ecDmnu
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 8, 2026
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