'भारत के ऊपर स्टारलिंक की सैटेलाइट बीम बंद कर दी गई', एलन मस्क को क्यों देनी पड़ गई सफाई?
Elon Musk: स्पेसएक्स के सीईओ एलोन मस्क ने एक बयान जारी कर बताया कि भारत भारत के ऊपर स्टारलिंक की सैटेलाइट बीम बंद कर दी गई हैं. अब सवाल है कि आखिर उन्हें यह बयान क्यों देना पड़ा. यह बयान एक आरोप से जुड़ा है. जिसमें आरोप है कि स्टारलिंक इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल भारत में विद्रोही समूह कर रहे है.
स्पेसएक्स के सीईओ एलोन मस्क ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि भारत में विद्रोही समूह स्टारलिंक इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं. मस्क ने कहा कि भारत के ऊपर स्टारलिंक की सैटेलाइट बीम बंद हैं. मस्क ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत के ऊपर स्टारलिंक बीम बंद हैं. इसलिए यह दावा कि किसी ने भी किसी भी कारण से उनका इस्तेमाल किया, बिल्कुल गलत है.
The claim that militants used Starlink in India makes no sense.
— DogeDesigner (@cb_doge) October 7, 2026
Starlink satellite beams are turned off over India. With the beams off, no Starlink device can connect in India.
Even Elon Musk himself has confirmed this.
Stop spreading misinformation. https://t.co/pXOq3EJLml pic.twitter.com/6PVA11Be3u
डोगे-डिजाइनर की पोस्ट का दिया जवाब
मस्क ने यह बात X पर डोगे-डिजाइनर अकाउंट की एक पोस्ट के जवाब में कही. इस पोस्ट में एक अन्य पोस्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि भारतीय सुरक्षा बलों ने मणिपुर के पास म्यांमार सीमा पर सक्रिय विद्रोही समूहों से स्टारलिंक के टर्मिनल बरामद किए हैं.
डोगे-डिजाइनर ने इन दावों को बेबुनियाद बताया. पोस्ट में कहा गया कि भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट बीम बंद होने के कारण कोई भी स्टारलिंक डिवाइस यहां इंटरनेट से कनेक्ट नहीं हो सकता. पोस्ट में यह भी कहा गया कि मस्क ने खुद इसकी पुष्टि की है. स्टारलिंक, स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है, जो सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपलब्ध कराती है.
ट्रंप नहीं करा पाए युद्ध खत्म, अब भारत की पहल से जगी शांति की उम्मीद; क्या बनेगी बात?
रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से ज्यादा समय से जारी युद्ध को खत्म कराने की कोशिशें अब एक बार फिर तेज होती नजर आ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच शांति कायम नहीं हो सकी. ऐसे में भारत की ओर से सामने आए युद्धविराम प्रस्ताव ने शांति की नई उम्मीद जगाई है. भारत ने युद्ध को रोकने के लिए तीन सूत्रीय प्रस्ताव सामने रखा है. इस पहल पर रूस और यूक्रेन की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं. रूस ने भारत की भूमिका का स्वागत किया है, जबकि यूक्रेन ने भी भारतीय प्रस्ताव को व्यापक बताया है.
रूस ने भारत की पहल का किया स्वागत
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत यूक्रेन से जुड़े मौजूदा हालात के समाधान में व्यावहारिक योगदान देने के लिए तैयार है. उन्होंने भारत की इस पहल और सुझावों के लिए आभार जताया. पेस्कोव से उन मीडिया रिपोर्टों को लेकर सवाल किया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए तीन चरणों वाला नया प्रस्ताव दिया है. इस पर उन्होंने कहा कि भारत ने मौजूदा स्थिति के समाधान में योगदान देने की अपनी इच्छा जाहिर की है.
यूक्रेन ने भी भारतीय प्रस्ताव को बताया व्यापक
इससे पहले यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी भारत के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया था. उन्होंने बताया था कि युद्धविराम को लेकर चार अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं और इनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है. यूक्रेन ने ऊर्जा क्षेत्र और काला सागर में युद्धविराम को लेकर अपनी सहमति जताई है. हालांकि, उसका कहना है कि इन दोनों क्षेत्रों में युद्धविराम को एक साथ लागू किया जाना चाहिए. भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और अमेरिका की ओर से भी प्रस्ताव सामने आए हैं.
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भारत के तीन सूत्रीय प्रस्ताव में क्या है?
भारत की पहल में युद्ध के उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है, जिनका रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के दौरान बड़ा असर पड़ा है. प्रस्ताव के तीन प्रमुख बिंदु हैं.
ऊर्जा और जरूरी बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना
भारत ने दोनों पक्षों से एक-दूसरे के ऊर्जा संयंत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाने की अपील की है.
काला सागर में व्यापार जारी रखना
प्रस्ताव में काला सागर के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही गई है.
वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा
काला सागर में आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले और गोलाबारी रोकने का प्रस्ताव रखा गया है.
क्या भारत की पहल से खत्म होगी जंग?
रूस और यूक्रेन की ओर से भारतीय पहल को लेकर आए सकारात्मक संकेतों से शांति की उम्मीद जरूर बढ़ी है. हालांकि, चार साल से ज्यादा समय से जारी इस युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति बनना जरूरी होगी. भारत का प्रस्ताव इस दिशा में बातचीत का एक नया रास्ता खोल सकता है.
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