Stock Market Live update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
Stock Market Live update: बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे है। गिफ्ट निफ्टी 80 प्वाइंट नीचे है। इधर फेड मिनट्स में एक और रेट हाइक के संकेत के चलते अमेरिकी बाजारों की 4 दिनों की तेजी पर ब्रेक लगा।
Guru Pradosh Vrat 2026: आज रखा जाएगा गुरु प्रदोष व्रत, भगवान शिव को चढ़ाएं ये 5 चीजें, आएगी सुख-समृद्धि
Guru Pradosh Vrat 2026: आज यानी 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को अक्टूबर का पहला प्रदोष व्रत रखा जाने वाला है. आज गुरुवार का दिन है. इसलिए, इसे गुरु प्रदोष का व्रत कहा जा रहा है. गुरु प्रदोष व्रत रखने से आपको देवो के देव महादेव और देवगुरु बृहस्पति, दोनों की कृपा प्राप्त होने वाली है. प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत करना होता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. आज प्रदोष व्रत के दिन ये 5 चीजों को अर्पित करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
गुरु प्रदोष 2026 शुभ मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 अक्टूबर को रात 11:16 पर होगा. इस तिथि का समापन 8 अक्टूबर को रात 10:15 पर होगा. गुरु प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 से लेकर रात 08:27 मिनट तक रहेगा.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से लेकर 05:18 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या- सुबह 04:54 से लेकर सुबह 06:07 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:37 से लेकर दोपहर 12:25 तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:55 से लेकर 06:20 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 03:01 मिनट से लेकर दोपहर 04:36 मिनट तक
गुरु प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?
गुरु प्रदोष को बृहस्पति प्रदोष भी कहते हैं. गुरु प्रदोष का व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. विवाह, संतान, शिक्षक, ज्येष्ठ भ्राता, पिता, दान आदि का कारक भी बृहस्पति को ही माना जाता है. गुरु प्रदोष का व्रत रखने से मनुष्य परोपकारी बनता है. इस व्रत को करने से क्षेत्रों में उन्नति की प्राप्ति होती है.
गुरु प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें
1.बेलपत्र- भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है. इसलिए, गुरु प्रदोष के दिन शिवजी को बेलपत्र जरूर अर्पित करें.
2.चंदन- गुरु प्रदोष व्रत के दिन यानी आज आपको शिवलिंग पर आठ जगहों पर पीला चंदन लगाना चाहिए. पीला चंदन भी उन्हें बहुत प्रिय होता है.
3.शहद- गुरु प्रदोष पर आपको शिवलिंग पर शहद लगाना चाहिए. शिव जी को शहद चढ़ाने से भाग्य का साथ मिलता है.
4.कच्चा दूध- आज आपको शिवलिंग पर कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. ऐसा करने से सुख-समृद्धि आती है.
5.पंचामृत- प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए. इससे जीवन में शुभता आती है.
महादेव के इन मंत्रों का जाप करें
1.शिव पंचाक्षर मंत्र
ऊं नमः शिवाय
2.महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
3.शिव गायत्री मंत्र
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात
4.लघु शिव मंत्र
ऊं शिवाय नमः, ऊं महेश्वराय नमः और ऊं शंभवे नमः
5.दक्षिणामूर्ति शिव मंत्र
ऊं नमो भगवते दक्षिणामूर्तये।
मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥
श्री शिव चालीसा (Shree Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
दोहा
नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥
मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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