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Aaj Ka Panchang 08 October 2026: अक्टूबर का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
Aaj Ka Panchang 08 October 2026: आज यानी 8 अक्टूबर 2026 को गुरुवार के दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अरविंद त्रिपाठी के अनुसार, आज के दिन अक्टूबर मास का प्रथम प्रदोष व्रत भी रखा जा रहा है. यह गुरु प्रदोष व्रत है, आज के दिन त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध भी किया जा रहा है. वहीं नक्षत्रों की बात करें तो आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पूरे दिन रहेगा. चलिए अब जानते हैं आज का पंचांग क्या है.
पढ़ें आज का पंचांग 8 अक्टूबर 2026 (Today's Panchang 8 October 2026)
आज की तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग
- तारीख- 08 अक्टूबर 2026
- वार- गुरुवार
- तिथि- आश्विनी कृष्ण त्रयोदशी तिथि रात 10 बजकर 16 मिनट तक उसके बाद चतुर्दशी तिथि होगी.
- नक्षत्र- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रात 09 बजकर 20 मिनट तक उसके बाद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होगा.
- योग- शुक्ल योग और ब्रह्म योग
- करण- गर, वणिज और विष्टि करण
- दिशा शूल- दक्षिण दिशा
- दिशा शूल उपाय- दही या जीरा खाकर घर से निकलें.
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चंद्र गोचर
चंद्रमा का गोचर सिंह राशि में सुबह 03 बजकर 18 मिनट तक उसके बाद कन्या राशि में होगा.
संवत
- विक्रम संवत- 2083, रौद्र
- शक संवत- 1948, पराभव
चंद्रमास
- सूर्योदय- आज सुबह 06:17 पर हुआ है
- सूर्यास्त- आज शाम 05 बजकर 59 मिनट पर होगा
- चंद्रोदय- 08 अक्टूबर सुबह 03:58 बजे पर होगा
- चंद्र अस्त- 08 अक्टूबर को शाम 04:37 मिनट पर होगा
आज का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:53 मिनट से सुबह 05:42 मिनट तक
- अमृत काल- दोपहर 03 बजे से दोपहर 04:35 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक
आज का अशुभ समय
राहुकाल- दोपहर 01 बजकर 36 मिनट से दोपहर 03 बजे तक
यम गण्डक- सुबह 06:24 मिनट से सुबह 07:52 मिनट तक
गुलिक काल- सुबह 09:19 मिनट से सुबह 10:47 बजे तक
आज का दुर्मुहूर्त- सुबह 10:17 बजे से सुबह 11:04 बजे तक और दोपहर 02:57 मिनट से दोपहर 03:44 मिनट तक
व्रत
मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत
गुरुवार के नुस्खे
- मान्यता है कि गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और दान करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े दोष दूर होते हैं. यदि कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो तो व्यक्ति को विवाह में देरी, करियर में रुकावट, आर्थिक संकट और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
- ऐसे में गुरुवार की पूजा एक प्रभावी और सरल उपाय मानी जाती है. श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपायों से देवगुरु बृहस्पति शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं.
- गुरुवार के दिन श्रद्धा, विश्वास और संयम के साथ किए गए उपाय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. नियमित पूजा, व्रत और दान से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है. व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, स्थिरता और सौभाग्य का संचार भी होता है.
- गुरुवार के दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है. पीला रंग ज्ञान, शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पीले पुष्प अर्पित करना और पीले रंग के भोजन का सेवन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. गुरुवार की पूजा व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, विश्वास और सौभाग्य को बढ़ाने वाली होती है.
- गुरुवार की पूजा के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शुद्ध होना चाहिए. स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल या हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद साफ और पीले वस्त्र पहनें. इसके पश्चात घर और पूजा स्थल में गंगाजल छिड़ककर वातावरण को पवित्र करें.
- अब पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. पूजा में पीले फूल, चने की दाल, गुड़, बेसन के लड्डू और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद दीपक और धूप जलाकर मंत्र जाप करें.
- ऊं ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है. माना जाता है कि नियमित मंत्र जाप से बुद्धि, आत्मविश्वास और मानसिक शांति में वृद्धि होती है.
आपका दिन मंगलमय हो.
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