'मैं ऐसा इंसान नहीं हूं', MS धोनी ने मोबाइल फोन पर बात करने को लेकर दिया ऐसा बयान
MS Dhoni: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को संन्यास लिए 6 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका उनकी फैन फॉलोइंग पर कोई असर नहीं हुआ है. वह आज भी लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं. हाल ही में माही ने जतिन सप्रू के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय दी. इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया कि फोन पर बात करना उन्हें कुछ खास पसंद नहीं है. कहीं न कहीं इसीलिए वह फोन पर अधिक बात नहीं करते हैं.
फोन पर बात करने को लेकर क्या बोले एमएस धोनी?
एमएस धोनी से अक्सर कई पूर्व क्रिकेटर्स शिकायत करते हैं कि वो फोन नहीं उठाते हैं. कई बार तो इस बात को लेकर काफी विवाद भी हुआ. मगर, कभी ये नहीं पता चल सका था कि आखिर माही ऐसा क्यों करते हैं. मगर, अब धोनी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया है कि उन्हें फोन पर बात करना कुछ खास पसंद नहीं है.
Dhoni said "I am not good in that way of communicating. I like to sit across & speak to people. I am not someone who is very good over the phone because I cannot see a face so I am a very awkward guy when it comes to speaking on the phone". [Jatin Sapru] pic.twitter.com/0DdUU7AJ98
— Johns. (@CricCrazyJohns) February 4, 2026
धोनी ने टीवी प्रेजेंटर जतिन सप्रू के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कहा, 'मैं उस तरह से बात करने में अच्छा नहीं हूं. मुझे सामने बैठकर लोगों से बात करना पसंद है. मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो फोन पर बहुत अच्छे से बात करता हो, क्योंकि मैं चेहरा नहीं देख पाता, इसलिए जब फोन पर बात करने की बात आती है तो मैं बहुत अजीब महसूस करता हूं.'
विराट-रोहित को खेलना चाहिए या नहीं विश्व कप
Jatin sapru indirectly took a dig at virat kohli in the very first question asked to Ms dhoni ???? pic.twitter.com/56cL5knO7C
— ADITYA (@wXtreme18) February 4, 2026
जब जतिन सप्रू ने इंटरव्यू के दौरान विराट कोहली और रोहित शर्मा के विश्व कप 2027 में खेलने को लेकर सावल किया. इसपर माही ने जवाब देते हुए कहा, 'क्यों नहीं. किसी को विश्व कप क्यों नहीं खेलना चाहिए? मेरे लिए उम्र कोई पैमाना नहीं है. मेरे लिए प्रदर्शन और फिटनेस ही मापदंड हैं. मेरा मानना है कि किसी को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि सबके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा. जब मैंने डेब्यू किया तब मैं 24 साल का था. किसी ने मुझे कुछ नहीं कहा और अब जब मैं 10 साल या 20 साल से भारत के लिए खेल रहा हूं, तो किसी को आकर मेरी उम्र के बारे में बताने की जरूरत नहीं है.'
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यूएन प्रमुख ने ‘न्यू स्टार्ट’ संधि के खत्म होने को अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा के लिए 'गंभीर क्षण' बताया
संयुक्त राष्ट्र, 5 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली संधि ‘न्यू स्टार्ट’ की अवधि खत्म होना, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकेत है।
गुटेरेस ने कहा कि आधी सदी से भी अधिक समय में यह पहली बार है जब दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां रूस और अमेरिका के रणनीतिक परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी और बाध्यकारी सीमा नहीं रह जाएगी। ये दोनों देश मिलकर दुनिया के अधिकतर परमाणु हथियारों के भंडार के मालिक हैं।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि रूस और अमेरिका के तैनात परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों की संख्या पर रोक लगाती थी। यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है।
शीत युद्ध के समय और उसके बाद के वर्षों में, इन दोनों देशों के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण ने दुनिया को बड़े संकट से बचाए रखने में अहम भूमिका निभाई। इससे स्थिरता बनी और कई बार गलत आकलन से होने वाली भारी तबाही को रोका जा सका। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस प्रक्रिया के जरिए दोनों देशों ने अपने भंडार से हजारों परमाणु हथियार कम किए।
गुटेरेस के अनुसार, रणनीतिक हथियार नियंत्रण से पूरी दुनिया की सुरक्षा बेहतर हुई, खासकर अमेरिका और रूस की जनता के लिए।
उन्होंने कहा कि ‘न्यू स्टार्ट’ की समाप्ति ऐसे समय पर हो रही है, जब बीते कई दशकों में पहली बार परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा सबसे ज्यादा है। इससे खराब समय और कोई नहीं हो सकता। गुटेरेस ने कहा, फिर भी इस अनिश्चितता के क्षण में, हमें उम्मीद ढूंढनी चाहिए। यह रीसेट करने और तेजी से बदलते माहौल के लिए उपयुक्त हथियार नियंत्रण व्यवस्था बनाने का एक अवसर है।
उन्होंने यह भी स्वागत किया कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने माना है कि परमाणु हथियारों की होड़ दुनिया को अस्थिर करती है और इसे रोकना जरूरी है। अब दुनिया रूस और अमेरिका से यह उम्मीद कर रही है कि वे सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाएं।
गुटेरेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे बिना देरी किए बातचीत की मेज पर लौटें और एक ऐसी नई व्यवस्था पर सहमत हों, जिसमें परमाणु हथियारों पर जांच योग्य सीमाएं हों, जोखिम कम हो और वैश्विक सुरक्षा मजबूत बने।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि वर्ष 2011 में लागू हुई थी। यह रूस और अमेरिका के बीच आखिरी बड़ी हथियार नियंत्रण संधि थी, क्योंकि अमेरिका इससे पहले वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि से हट गया था।
--आईएएनएस
एएस/
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