Responsive Scrollable Menu

जंतर-मंतर हाईवोल्टेज ड्रामे की 10 PHOTO: इधर पुलिस मनाती रही, उधर इग्नोर करते रहे राहुल गांधी

7 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। विरोध कर रहे सांसदों को पुलिस ने जबरन बस में बैठाया।

Continue reading on the app

Delhi High Court ने गलत तथ्य देने पर CBI के पांच अधिकारियों पर झूठी गवाही की कार्यवाही का दिया निर्देश

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में कथित तौर पर तथ्यात्मक रूप से गलत बयान देने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पांच अधिकारियों के खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने छह अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सीबीआई अधिकारियों और विशेष लोक अभियोजक ने 2016 में दाखिल एक जवाब को ‘‘तैयार करने, उसमें बदलाव करने, उसकी जांच, प्रक्रिया, मंजूरी या दाखिल करने’’ में हिस्सा लिया था। इस जवाब में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में पूर्व आईआरएस अधिकारी के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई करने के लिए विधि मंत्रालय के साथ ‘पत्राचार’ होने का गलत दावा किया गया था, जबकि अधिकारियों को ‘वास्तविक स्थिति’ की जानकारी थी कि यह मामला एजेंसी के स्तर पर केवल आंतरिक विचार-विमर्श के चरण में था।

एक निचली अदालत ने 2016 में पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल को वैध मंजूरी नहीं होने के आधार पर मामले से मुक्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जब्त दस्तावेजों को वापस किए जाने की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल किया था। सीबीआई ने आवेदन के जवाब में निचली अदालत में दावा किया था कि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई के संबंध में प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार ‘जारी’ है और इसलिए इस स्तर पर जब्त दस्तावेजों को वापस करना उचित नहीं होगा।

न्यायमूर्ति जैन ने अधिकारियों के खिलाफ अग्रवाल की याचिका पर झूठी गवाही की कार्रवाई करने से इनकार करने संबंधी निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सीबीआई को अपने आंतरिक प्रस्ताव को मंत्रालय के साथ पत्राचार के रूप में पेश करने का कोई अधिकार नहीं था। अदालत ने कहा कि मंत्रालय पहले ही यह राय दे चुका था कि उच्चतर मंच के समक्ष मामले को आगे बढ़ाने के लिए कोई उचित आधार नजर नहीं आता।

अदालत ने कहा, ‘‘वर्तमान मामले में जारी पत्राचार के संबंध में किए गए दावे का इस्तेमाल अपीलकर्ता के अनुरोध का विरोध करने और उसके दस्तावेजों को अपने पास बनाए रखने के लिए तथ्यात्मक आधार के रूप में किया गया। जवाब को तैयार करने, उसमें बदलाव करने, उसकी जांच, प्रक्रिया, मंजूरी और दाखिल करने से संबंधित कार्यों के साथ-साथ पूर्व के मसौदों और फाइल में दर्ज टिप्पणियों से सामने आई जानकारी प्रथम दृष्टया यह मानने का उचित आधार देती है कि संबंधित अधिकारियों ने ऐसे दावे को आगे बढ़ाने में भाग लिया, जिसके मौजूदा स्थिति के विपरीत होने की उन्हें जानकारी थी।’’ अदालत ने कहा कि अग्रवाल द्वारा विशेष न्यायाधीश के समक्ष दायर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 340 के तहत आवेदन स्वीकार किया जाता है। अदालत ने विशेष न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वह सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 191 के साथ धारा 193 तथा धारा 209 के तहत कथित अपराधों के लिए लिखित शिकायत दर्ज करें और फैसले की प्रति मिलने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर इसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाली मजिस्ट्रेट अदालत को भेजें।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत इस मामले में स्वतंत्र रूप से कार्यवाही करेगी और उसके समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की किसी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगी।

Continue reading on the app

  Sports

टीम इंडिया में इन खिलाड़ियों की फिर होगी एंट्री? न्यूजीलैंड दौरे के लिए सेलेक्टर्स की है नजर

भारतीय टीम को न्यूजीलैंड दौरे पर 5 मैच की वनडे सीरीज खेलनी है लेकिन इसके लिए 2 स्क्वॉड चुने जाने की संभावना है, जिसमें कुछ ऐसे खिलाड़ियों को चुना जाएगा, जो सिर्फ आखिरी 2 मैच का हिस्सा होंगे. Wed, 07 Oct 2026 23:19:12 +0530

  Videos
See all

GST Council Meeting : GST में बड़ा बदलाव होने वाला है! | GST Update | Tax Update | Top News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-07T20:30:10+00:00

France student protests : फ्रांस में आंदोलन हुआ बेकाबू, 4000 नाबालिग गिरफ्तार! | France Protest | #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-07T20:00:25+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers