High Court के आदेश के बाद OSD पर CBI FIR, Bajwa ने Punjab CM Office पर उठाए सवाल
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) प्रताप सिंह बाजवा ने बुधवार को चंडीगढ़ में मान के कैंप ऑफिस पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की छापेमारी को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का सामना करना चाहिए। बाजवा ने कहा कि कल चंडीगढ़ में हुई CBI की छापेमारी के लिए मैं सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को ज़िम्मेदार मानता हूं। ED ने डायरेक्टर जनरल को चार पत्र लिखे थे। अगर उन्होंने खुद इन लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की होती या उनमें से कुछ को गिरफ़्तार भी किया होता तो वे खुद को बचा सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके ये बयान CBI द्वारा मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन और पांच अन्य लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने और चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस समेत आठ जगहों पर तलाशी लेने के एक दिन बाद आए हैं।
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एजेंसी ने कहा कि यह मामला कथित तौर पर पैसे या अन्य फायदे के बदले पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, पॉलिसी बनाने, प्रशासनिक मंज़ूरी, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और ज़मीन से जुड़े मामलों में हेर-फेर या प्रभाव डालने जैसे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। CBI की यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें एजेंसी को केस दर्ज करने और आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट का यह आदेश वकील निखिल सराफ की ओर से दायर एक PIL पर आया था, क्योंकि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) द्वारा उठाए गए आरोपों पर पंजाब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। बाजवा ने कहा कि राज्य के अधिकारियों द्वारा FIR दर्ज न किए जाने के बाद हाई कोर्ट ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद एक वकील ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाया। भ्रष्टाचार के बहुत गंभीर आरोप हैं। ज़मीन, ग्राम पंचायतों, ट्रांसफर और कॉन्ट्रैक्ट देने से जुड़े करोड़ों-अरबों रुपयों के घोटाले शामिल हैं।
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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और मान के करीबी परिवार के सदस्यों पर आरोप लगे हैं, और कहा कि जांच से यह पता चलना चाहिए कि इन आरोपों में कोई सच्चाई है या नहीं। बाजवा ने कहा, "आप भले ही यह दिखावा करने की कोशिश करें कि 'हम ईमानदार हैं और बाकी सब भ्रष्ट हैं', लेकिन सवाल यह है कि अगर भगवंत मान ने कुछ गलत नहीं किया है, तो जांच का सामना करने में क्या दिक्कत है?" CBI ने FIR में घुमन, कथित बिचौलिये नितिन गोहल, जतिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आर.एस. नागरा के साथ-साथ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के नाम शामिल किए हैं। एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं और कथित रिश्वतखोरी व गड़बड़ी के सबूतों के लिए उनकी जांच की जा रही है।
Rajasthan Panchayat Chunav से पहले Congress का दावा, BJP खत्म कर रही है जमीनी लोकतंत्र
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले नगर निकाय चुनावों के दौरान पुलिस और प्रशासन के ज़रिए दबाव बनाया था। उन्होंने दावा किया कि अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो सत्ताधारी पार्टी को पूरी तरह हार का सामना करना पड़ता। ANI से बात करते हुए रंधावा ने आरोप लगाया कि राज्य में नौकरशाहों और प्रशासन ने खुलकर BJP का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने पंचायती राज चुनावों से पहले ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र के कामकाज को लेकर चिंता जताई। रंधावा ने कहा कि पहले हुए नगर निकाय चुनावों में देखिए कि हमारा वोट शेयर कितना ज़्यादा था। और अगर उन्होंने पुलिस या प्रशासन के ज़रिए दबाव नहीं बनाया होता, तो BJP का पूरी तरह से सफाया हो जाता। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि राजस्थान में सरकार और प्रशासन की तरफ से नौकरशाहों ने खुलकर BJP की मदद की है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
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रंधावा ने आगे आरोप लगाया कि BJP स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है और कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी जिससे लोगों के वोटिंग अधिकारों पर असर पड़े। उन्होंने कहा कि ज़मीनी स्तर का लोकतंत्र, जहाँ पंचायतों को न्याय करने वाला माना जाता है - वे उसी व्यवस्था को खत्म कर रहे हैं जहाँ लोग अपने प्रतिनिधि खुद चुनते हैं और अपने फैसले खुद लेते हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। रंधावा ने कहा BJP ने इस लोकतंत्र को खत्म करने का मन बना लिया है, लेकिन देश की जनता और कांग्रेस पार्टी ने भी यह ठान लिया है कि हमें मिली आज़ादी और वोटिंग अधिकारों को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। उनके ये बयान राजस्थान में चार चरणों में होने वाले पंचायती राज चुनावों से पहले आए हैं। राज्य चुनाव आयोग ने ज़िला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए वोटिंग 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को तय की है, जबकि पंच और सरपंच पदों के लिए वोटिंग 25 अक्टूबर से शुरू होकर चार चरणों में होगी। इसमें चार करोड़ से ज़्यादा वोटर हिस्सा ले सकते हैं और राज्य भर में 45,384 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इससे पहले 4 अक्टूबर को कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि किसान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कामकाज से नाखुश हैं और पंचायत चुनावों में अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करेंगे।
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