BPSC Pre 2026: बिहार 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा एकबार फिर टली, नई तारीख का जल्द होगा ऐलान
BPSC Pre 2026: बिहार लोक सेवा आयोग की 72वीं BPSC प्री 2026 परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए जरूरी सूचना है. दरअसल, बिहार लोक सेवा आयोग की तरफ से 72nd बीपीएससी प्री 2026 परीक्षा एक बार फिर से स्थगित हो गई है. बता दे कि प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 25 अक्टूबर को किया जाने वाला था. वहीं, इससे पहले यह परीक्षा 26 जुलाई को आयोजित करवाई जाने वाली थी.
कब होगी बहत्तरवीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा?
BPSC की तरफ से फिलहाल नई परीक्षा तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है. मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार बीपीएससी की ओर से नई एग्जाम डेट्स को अगले हफ्ते तक जारी किया जा सकता है.
पहले भी स्थगित हो चुकी है परीक्षा
बिहार लोक सेवा आयोग की 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को एक बार फिर स्थगित कर दिया गया है. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है. आयोग की ओर से परीक्षा की नई तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है. ऐसे में अभ्यर्थियों को नई एग्जाम डेट के ऐलान का इंतजार करना होगा.
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जुलाई में होने वाली थी परीक्षा
बता दें कि BPSC 72वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा पहले 26 जुलाई 2026 को आयोजित की जानी थी. हालांकि, आयोग ने निर्धारित तारीख पर परीक्षा कराने के बजाय इसे स्थगित कर दिया था. इसके बाद परीक्षा की नई तारीख 25 अक्टूबर 2026 तय की गई थी. उम्मीदवार इस तारीख के अनुसार अपनी तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब एक बार फिर परीक्षा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. परीक्षा की नई तारीख कब घोषित की जाएगी, इस संबंध में आयोग की ओर से आधिकारिक अपडेट का इंतजार है. अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिस को ही मान्य मानें. साथ ही, उम्मीदवारों को अपनी तैयारी जारी रखने और समय-समय पर आयोग की वेबसाइट चेक करते रहने की सलाह दी जाती है.
1,186 पदों पर होगी भर्ती
BPSC 72वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के जरिए बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी. आयोग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 1,186 पदों को भरा जाएगा. प्रारंभिक परीक्षा इस भर्ती प्रक्रिया का पहला चरण है. इसमें सफल होने वाले उम्मीदवार आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे. ऐसे में परीक्षा की तारीख में बदलाव के बावजूद अभ्यर्थियों के लिए अपनी तैयारी को नियमित रखना बेहद जरूरी है.
सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा की नई तारीख, एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी निर्देशों से संबंधित अपडेट चेक करते रहें.
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तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो की दक्षिण भारत में की गई कार्रवाई में 101 गिरफ्तार
हैदराबाद, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) ने दक्षिण भारत में चलाए गए एक समन्वित और व्यापक बहु-राज्यीय साइबर अपराध अभियान में 18 महिलाओं सहित 101 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही लगभग 17 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेनदेन का पता लगाया गया है।
टीजीसीएसबी की निदेशक शिखा गोयल ने बुधवार को बताया कि दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभियान 23 सितंबर को शुरू हुआ और केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी राज्यों में चलाया गया। इसका लक्ष्य विभिन्न प्रकार के साइबर वित्तीय अपराधों में शामिल व्यक्तियों और नेटवर्क को निशाना बनाना था।
टीजीसीएसबी द्वारा चलाया गया यह दूसरा समवर्ती बहु-राज्यीय अभियान है, जो राज्य सीमाओं के पार काम करने वाले और कई अधिकार क्षेत्रों का फायदा उठाने वाले साइबर अपराध नेटवर्क की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
गोयल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि समन्वित जमीनी कार्रवाई के लिए 100 से अधिक टीजीसीएसबी कर्मियों वाली छह विशेष टीमें तैनात की गईं।
गिरफ्तार किए गए लोगों में से 19 की पहचान एजेंट के रूप में और 81 की पहचान अवैध लेन-देन खाताधारकों के रूप में हुई।
केरल से 35 गिरफ्तारियां हुईं, जबकि आंध्र प्रदेश से 22, कर्नाटक से 17, तमिलनाडु से 14, तेलंगाना से 12 और पुडुचेरी से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
इस अभियान के परिणामस्वरूप कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक भी जब्त किए गए, जिनका कथित तौर पर विभिन्न धोखाधड़ी वाले लेन-देन में इस्तेमाल किया गया था।
लगभग 17 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेन-देन का पता फर्जी खातों के माध्यम से लगाया गया।
जांच से पता चला कि आरोपी विभिन्न आयु वर्ग, पेशे और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से थे। अधिकांश आरोपी, 82 प्रतिशत, 20-50 वर्ष आयु वर्ग के थे, जबकि 17 प्रतिशत 50 वर्ष से अधिक आयु के थे।
व्यापार/स्वरोजगार सबसे बड़ा समूह था (23 प्रतिशत), इसके बाद निजी रोजगार (13 प्रतिशत), गृहिणी/घरेलू महिलाएं (10 प्रतिशत), ड्राइवर/ऑपरेटर (7 प्रतिशत), और बिक्री/विपणन (5 प्रतिशत) थे।
शैक्षिक दृष्टि से, 26 प्रतिशत ने इंटरमीडिएट शिक्षा प्राप्त की थी, 24 प्रतिशत स्नातक/डिग्री धारक थे, 16 प्रतिशत ने माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी, 11 प्रतिशत अशिक्षित थे, 7 प्रतिशत के पास डिप्लोमा/आईटीआई योग्यताएं थीं, और 4 प्रतिशत ने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थीं, जबकि 3 प्रतिशत स्नातकोत्तर और 3 प्रतिशत के पास बी.टेक और नर्सिंग जैसी व्यावसायिक/अन्य योग्यताएं थीं।
इस अभियान में देश भर में साइबर अपराध से जुड़े कई आरोपियों की पहचान की गई, जिनमें एक प्रमुख कंपनी का कर्मचारी भी शामिल है। इस कर्मचारी ने कथित तौर पर कमीशन के बदले साइबर अपराध करने वालों के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने में एजेंट की भूमिका निभाई। इसके अलावा, मुद्रा विनिमय व्यवसाय में लगा एक स्नातक भी कमीशन के आधार पर फर्जी खाते खोलने में सहायक रहा। एक पूर्व सैनिक भी साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल था और देश भर में छह साइबर अपराध मामलों से जुड़ा हुआ था।
--आईएएनएस
एमएस/
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