Maharashtra के 265 तालुकों में सूखा, जमीनी जायजा लेने 8 अक्टूबर को पहुंचेगी Central Team
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत ज़्यादा से ज़्यादा मदद की मांग की। एक्स पर एक पोस्ट में फडणवीस ने कहा कि उन्होंने शाह को महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों और सूखे से प्रभावित इलाकों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी। फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के 265 से ज़्यादा तालुकाओं में सूखा घोषित किया गया है और सूखे से राहत के उपाय भी घोषित किए गए हैं। ऐसे में, उनसे NDRF की ओर से ज़्यादा से ज़्यादा मदद देने का अनुरोध किया गया। उन्होंने आगे कहा कि शाह ने भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र को हर संभव मदद देगी और उन्हें बताया कि केंद्र सरकार की एक टीम हालात का जायज़ा लेने के लिए 8 से 11 अक्टूबर तक राज्य का दौरा करेगी।
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फड़णवीस ने इस भरोसे के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार जताते हुए कहा केंद्र सरकार मजबूती से महाराष्ट्र के साथ खड़ी रहेगी। केंद्र ने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए पहले ही एक अंतर-मंत्रालयी टीम गठित कर दी है; राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। इस टीम की अगुवाई कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल कर रहे हैं और इसमें कई केंद्रीय विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उम्मीद है कि यह टीम फसल के नुकसान, पानी की कमी और सूखे के समग्र प्रभाव का आकलन करेगी और फिर अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी ताकि राहत और पुनर्वास उपायों (जिसमें आपदा-प्रतिक्रिया कोष के तहत सहायता भी शामिल है) पर विचार किया जा सके। महाराष्ट्र सरकार ने मॉनसून की कम और अनियमित बारिश के बाद सितंबर में 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था और प्रभावित इलाकों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की थी। सूखा-प्रभावित ये तालुक राज्य के कुल 358 तालुकों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा हैं।
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सूखे का यह आकलन प्रभावित इलाकों में फसल के नुकसान और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच किया जा रहा है। राज्य सरकार फसल के नुकसान का आकलन कर रही है और हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र से मदद मांगी है। फड़णवीस ने पहले कहा था कि सूखे की शुरुआती सूची में शामिल न किए गए कुछ इलाकों को भी राहत के लिए विचार किया जा सकता है, क्योंकि अनियमित बारिश और सूखे के दौर का फसलों पर असर पड़ा है, भले ही ये इलाके 'सूखा प्रबंधन कोड, 2016' के तहत तय 'ट्रिगर-1' के मानकों को पूरा न करते हों।
Siang Project को लेकर अरुणाचल के मंत्री बोले, सुरक्षा और स्थानीय हित दोनों जरूरी
ईटानगर, सात अक्टूबर अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ओजिंग तासिंग ने बुधवार को कहा कि प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना भारत की जल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थानीय समुदायों के हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए। इस जलविद्युत परियोजना का सियांग क्षेत्र के स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि इससे विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण से जुड़े जोखिमों के कारण उनकी पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने सियांग नदी पर प्रस्तावित परियोजना के लिए जारी प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियों और सर्वेक्षण कार्य को तत्काल रोकने तथा परियोजना से प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबलों को वापस बुलाने की मांग की है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह परियोजना राज्य और देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी तथा जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी। खासकर नदी के ऊपरी हिस्से में चीन द्वारा प्रस्तावित विशाल बांध को लेकर चिंता के मद्देनजर इसे महत्वपूर्ण बताया गया है।
राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ओजिंग तासिंग ने बुधवार को कहा, ‘‘यह परियोजना भारत की जल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब चीन नदी के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है, भारत को अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार रहना चाहिए कि हमारे जल संसाधन कभी भी हमारे देश पर दबाव बनाने का साधन न बनें।’’ सियांग जिले की पांगिन विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले तासिंग ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय हित और लोगों का कल्याण साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। देश के भविष्य को सुरक्षित करते हुए समान रूप से हमारी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक नागरिक और समुदाय के अधिकारों, हितों और कल्याण की रक्षा की जाए।’’ उन्होंने कहा कि सियांग के ऊपरी हिस्से में चीन द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे बुनियादी ढांचा विकास की अनदेखी भारत नहीं कर सकता।
तिब्बत में इस नदी को यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है, जो भारत में सियांग के नाम से प्रवेश करती है और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र कहलाती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में टकराव के बजाय विश्वास, परामर्श और विकास पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए तथा सुरक्षित राष्ट्र और संरक्षित समुदाय सरकार की नीति के केंद्र में होने चाहिए। राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना को केवल प्रस्ताव के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और पहले तकनीकी तथा अन्य वैधानिक आकलन पूरे करने होंगे।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि अगर प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन के बाद परियोजना तकनीकी रूप से अव्यवहार्य पाई गई तो इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। खांडू ने कहा कि अगर यह व्यवहार्य पाई गई तो सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव के अध्ययन सहित आगे के आकलन किए जाएंगे।
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