RBI रेपो दर बढ़ाने से शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 429 अंक लुढ़का
मुंबई, सात अक्टूबर नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में करीब चार साल बाद पहली बार बढ़ोतरी होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण स्थानीय शेयर बाजार लगातार दो दिन की तेजी के बाद बुधवार को गिरकर बंद हुए। सेंसेक्स में 429 अंक की गिरावट आई जबकि निफ्टी 173 अंक टूट गया। विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करने के फैसले से बाजार में गिरावट आई।
इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी दबाव डाला। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 599.09 अंक गिरकर 72,468.72 अंक पर आ गया था।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी भी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,603.05 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 26 के शेयर नुकसान में रहे। टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में प्रमुख रूप से गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी तरफ, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर लाभ में रहे। आरबीआई ने बुधवार को रेपो दर को 0.25 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया जो करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर ‘सोच-समझकर सख्ती’ वाला कर दिया, जिससे निकट अवधि में दरों में कटौती की संभावना खत्म हो गई है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.41 प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 2,961.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘नीतिगत दर बढ़ोतरी उम्मीद के अनुरूप ही थी, लेकिन नीतिगत रुख में बदलाव से बाजार पर अधिक असर पड़ा।
वृद्धि के अनुमान में बढ़ोतरी से घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला, लेकिन महंगाई के ऊंचे अनुमान और मूल्य स्थिरता पर आरबीआई के जोर ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।’’ एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में भी दोपहर के कारोबार के दौरान गिरावट रही। अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
मंगलवार को सेंसेक्स 685.34 अंक बढ़कर 73,067.81 अंक और निफ्टी 220.35 अंक चढ़कर 22,776.10 अंक पर बंद हुआ था।
MDR शुल्क से UPI लेनदेन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, बोले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा
मुंबई, सात अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) के रूप में मामूली शुल्क लगाए जाने से यूपीआई लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद यहां केंद्रीय बैंक के मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘फिलहाल हमें लेनदेन की मात्रा में कोई गिरावट नहीं दिख रही है। और मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि मामूली शुल्क का लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।’’ उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने पिछले महीने व्यक्ति से व्यापारियों को होने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने घोषणा की थी।
यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा। मल्होत्रा ने कहा कि बैंकों की कर्ज वृद्धि आगे भी मजबूत बनी रहेगी और इससे व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई अत्यधिक नकदी के बीच कर्ज देने वाली गैर-बैंकिंग कंपनियों (एनबीएफसी) की संपत्ति की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से अवगत है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में बैंकों में अतिरिक्त नकदी देखी गयी है लेकिन यह लंबे समय तक नहीं बनी रहेगी। मल्होत्रा ने यह भी कहा कि रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत प्रवासी भारतीयों से करीब 133 अरब अमेरिकी डॉलर की जमा राशि जुटाया जाना एफसीएनआर (बी) योजना और देश की व्यापक आर्थिक बुनियाद की मजबूती को बताता है।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, केंद्रीय बैंक को भरोसा है कि बैंक इस राशि का उपयोग सूझ-बूझ के साथ करेंगे। मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के कारण पूंजी प्रवाह में कमी आई है और चालू खाते पर बना दबाव अस्थायी समस्या है। उन्होंने भरोसा जताया कि भुगतान संतुलन जल्द ही अधिशेष की स्थिति में लौट आएगा।
मल्होत्रा ने आरबीआई द्वारा टाटा संस के एनबीएफसी लाइसेंस वापस करने के अनुरोध को खारिज करने और उच्च श्रेणी (अपर लेयर) की एनबीएफसी से जुड़े नियमों के अनुपालन के लिए देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने को कहे जाने के संबंध में पूछे गये सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
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