नेपियर का वो आखिरी मैच और 4 साल का इंतजार... जानें 'स्विंग के किंग' भुवनेश्वर कुमार के आखिरी मुकाबले का रोमांच
IND vs NZ: न्यूजीलैंड दौरे के लिए मंगलवार, 6 अक्टूबर को जब भारतीय टीम के टी20 स्क्वाड का ऐलान किया गया, तो एक नाम देखकर क्रिकेट फैंस खुशी से झूम उठे. बीसीसीआई की सेलेक्शन कमेटी ने स्टार तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को टी20 टीम में शामिल कर सभी को चौंका दिया. भुवी की करीब 4 साल के लंबे समय बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. अब इस बात की भी पूरी संभावना जताई जा रही है कि भुवी की वनडे टीम में भी वापसी होने जा रही है और वह अगले साल वर्ल्ड कप का हिस्सा हो सकते हैं. बता दें कि बीसीसीआई जब न्यूजीलैंड दौरे पर होने वाली वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड का ऐलान करेगा, तो हो सकता है कि वनडे टीम में भी भुवी का नाम हो. तो चलिए जानते हैं कि भुवनेश्वर कुमार का उनके आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच में प्रदर्शन कैसा रहा था.
भुवनेश्वर कुमार ने कब और किसके खिलाफ खेला था आखिरी मैच?
भुवनेश्वर कुमार ने आखिरी बार टी20 इंटरनेशनल मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था और अब उनकी वापसी भी इसी टीम के खिलाफ हो रही है. टी20 वर्ल्ड कप 2022 के ठीक बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी. इस सीरीज का तीसरा और आखिरी टी20 मैच 22 नवंबर 2022 को नेपियर के मैकलीन पार्क में खेला गया था. यह मुकाबला भुवनेश्वर कुमार का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ, जिसके बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया था.
कैसा रहा था आखिरी मैच में भुवनेश्वर कुमार का प्रदर्शन?
नेपियर में खेले गए उस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. भुवनेश्वर कुमार ने भारतीय गेंदबाजी की शुरुआत की थी, लेकिन उस दिन वह अपनी स्विंग से कीवी बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान नहीं कर पाए. भुवनेश्वर कुमार ने अपने स्पेल में 4 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें उन्होंने 35 रन खर्च किए और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. उनका इकॉनमी रेट 8.75 का रहा था.
इस मैच में न्यूजीलैंड ने पहले खेलते हुए 160 रन बनाए थे. जवाब में जब भारतीय टीम बल्लेबाजी कर रही थी, तब बारिश आ गई. भारत ने 9 ओवर में 4 विकेट खोकर 75 रन बनाए थे. डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम के तहत स्कोर बराबर होने के कारण यह मैच टाई घोषित किया गया था और भारत ने यह सीरीज 1-0 से जीती थी.
आखिरी कुछ मैचों में रहा था निराशाजनक फॉर्म
साल 2022 के एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भुवनेश्वर कुमार अपने फॉर्म से जूझते नजर आ रहे थे. विशेष रूप से डेथ ओवर्स में रन लुटाने को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी. वर्ल्ड कप के बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज के दो मैचों में भी वे पूरी तरह विकेटलेस (बिना कोई विकेट लिए) रहे थे. इसी खराब फॉर्म और गिरती गति के कारण चयनकर्ताओं ने युवाओं को मौका देने का फैसला किया और भुवी को टीम से दरकिनार कर दिया गया.
IPL 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन से की शानदार वापसी
4 साल तक टीम से बाहर रहने के बावजूद भुवनेश्वर कुमार ने हार नहीं मानी. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की तरफ से खेलते हुए आईपीएल 2026 में भुवी ने 16 पारियों में शानदार गेंदबाजी करते हुए 28 विकेट चटकाए और पर्पल कैप की रेस में दूसरे स्थान पर रहे. उनके इसी जादुई कमबैक और अनुभव को देखते हुए चयनकर्ताओं ने एक बार फिर अक्टूबर 2026 में न्यूजीलैंड दौरे के टी20 स्क्वाड में 36 साल की उम्र में उनकी वापसी कराई है. फैंस को उम्मीद है कि वह एक बार फिर मैदान पर अपनी स्विंग का जलवा बिखेरेंगे.
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सुप्रीम कोर्ट चुनाव-आयुक्तों की नियुक्ति वाले फैसले की जांच करेगा:सुनवाई कर रहे जजों में सहमति नहीं थी; आयुक्तों के नियुक्ति पैनल से CJI को हटाने का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े अपने फैसले की फिर से जांच करेगा। 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने के मुद्दे पर अलग-अलग राय दी थी। जस्टिस दत्ता ने कहा था कि मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की जरूरत नहीं है। वहीं, जस्टिस शर्मा ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने का समर्थन किया था। लेकिन इस फैसले पर अर्जी में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा को लेकर पक्षपात की आशंका जताई गई है। उनके बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। केंद्र के फैसला पर सुनवाई का मामला पूरा मामला 2023 के केंद्र सरकार के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा फैसला बदला था। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने अर्जी रखी थी। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। 2023 के में बदला नियुक्ति का कानून 2023 से पहले: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संसद का कोई अलग कानून नहीं था। केंद्र सरकार (कैबिनेट) अपनी पसंद के नाम तय करती थी और राष्ट्रपति की मंजूरी से उनकी सीधी नियुक्ति हो जाती थी, यानी पूरा फैसला अकेले सरकार का होता था। 2023 के बाद क्या बदला: संसद ने नया कानून बनाया, जिसके तहत 3 सदस्यों की चयन समिति तय की गई। अब इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री मिलकर नाम तय करते हैं, जिससे नियुक्ति में विपक्ष की भागीदारी तो जुड़ी, लेकिन सरकार के पास 2 सदस्यों का बहुमत बना रहा। समझें पूरा मामल, 4 सवाल … मामला क्या है? जवाब: सरकार ने नया नियम बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने वाली समिति से देश के मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया है। लोगों ने अदालत में अर्जी लगा दी कि इससे चुनाव आयोग पर सरकार का पूरा असर रहेगा। अदालत में क्या हुआ? जवाब: सर्वोच्च अदालत के दो जजों ने इस मामले को सुना, लेकिन दोनों की राय एक जैसी नहीं रही। एक ने कहा कि इसे बड़ी अदालत के पास भेजा जाए, दूसरे ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। नया विवाद क्या है? जवाब: राय आने के बाद यह पता चला कि जिन एक जज (जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा) ने यह मामला सुना था, उनके अपने बेटे खुद चुनाव आयोग के ही वकील हैं। अब आगे क्या? जवाब: अब लोगों ने अदालत से कहा है कि जब जज साहब के बेटे उसी महकमे के वकील हैं, तो फैसला बिना किसी पक्षपात के कैसे माना जाए? इसलिए उस पिछली राय को पूरी तरह रद्द किया जाए। अदालत ने इस बात की पड़ताल करने के लिए हामी भर दी है। ----------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट में 3 नए जजों ने शपथ ली:चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पद की शपथ दिलाई; संख्या बढ़कर 37 हुई सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को 3 नए जज मिले। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट के जज पद की शपथ दिलाई। पूरी खबर पढ़ें…
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