UP Election 2027: बलरामपुर की चारों सीटों पर क्या भाजपा का किला रहेगा बरकरार?
UP Election 2027: नेपाल सीमा से सटा बलरामपुर जिला अपने देवीपाटन मंदिर और राजसी इतिहास के लिए जाना जाता है. सियासी तौर पर भी यह जिला हमेशा दिलचस्प रहा है. दरअसल, यहां हिंदू-मुस्लिम मतदाताओं का लगभग बराबरी का अनुपात है. जो हर चुनाव को कड़े मुकाबले में तब्दील कर देता है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा समीकरण क्या है.
प्रति हजार पुरुषों पर 928 महिलाएं हैं, साक्षरता दर है 60%
जनगणना 2011 के मुताबिक बलरामपुर जिले की कुल आबादी करीब 21 लाख 49 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 11 लाख 15 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 10 लाख 34 हजार दर्ज हुई. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 928 महिलाएं हैं. साक्षरता के मामले में यह जिला प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में गिना जाता है, यहां कुल साक्षरता दर सिर्फ करीब 50 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 60 प्रतिशत और महिला साक्षरता मुश्किल से 38 प्रतिशत दर्ज हुई. वहीं, धार्मिक आबादी की बात करें तो यह जिला प्रदेश में सबसे दिलचस्प बनावट वाले जिलों में गिना जाता है. यहां हिंदू आबादी करीब 62 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 37 प्रतिशत है. बता दें जिले की करीब 92 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है.
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जिले में हैं 4 विधानसभा सीटें, जिसमें से 1 आरक्षित
बलरामपुर जिले में कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं, तुलसीपुर, गैंसड़ी, उतरौला और बलरामपुर (सदर). इनमें से बलरामपुर सदर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जबकि बाकी तीनों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में बलरामपुर जिले की चार सीटों में से तीन पर भाजपा और एक पर सपा ने जीत दर्ज की थी. आइए आपको हर सीट का ब्रीफ बताते हैं.
तुलसीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के कैलाशनाथ शुक्ला ने निर्दलीय प्रत्याशी जेबा रिजवान को करीब 36 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था. बता दें यह जिले की सबसे अधिक वोटों से जीत दर्ज की गई थी.
गैंसड़ी सीट पर सपा के डॉ. शिव प्रताप यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह "शैलू" को करीब 5 हजार 837 वोटों से हराया था.
उतरौला सीट पर भाजपा के रामप्रताप वर्मा (शशिकांत वर्मा) ने सपा के हसीब खान को करीब 21 हजार 769 वोटों से पराजित किया था.
बलरामपुर (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के पलटू राम ने सपा के जगराम पासवान को करीब 10 हजार 971 वोटों से हराया था.
2017 में भाजपा ने लगाया था क्लीन स्वीप, गैंसड़ी में हैं सपा की पुरानी जड़ें
2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के दौरान बलरामपुर जिले की सभी चार सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. बता दें तब विपक्ष का जिले में पूरी तरह सफाया हो गया था. मगर 2022 में गैंसड़ी सीट पर सपा ने यह किला भेद दिया था और पार्टी ने जीत का परचम लहराया था. गैंसड़ी सीट के इतिहास की बात करें तो यहां से डॉ. शिव प्रताप यादव 1993, 2002 और 2012 में भी सपा के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके थे, इसलिए इस सीट को सपा का परंपरागत गढ़ माना जाता रहा है. बता दें साल 2017 में पहली बार भाजपा ने यहां सेंध लगाई थी, मगर 2022 में शिव प्रताप यादव ने अपनी पुरानी सीट वापस छीन ली और विधानसभा पहुंचे थे.
"समाजवादी पार्टी के लोग संघर्ष और पसीने से कभी घबराते नहीं है।"
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- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/2cwtNvmziA
सपा का बड़ा हुआ है मनोबल, बीजेपी के भी जीत के दावे
2027 के चुनाव से पहले बलरामपुर जिले की राजनीति में एक और अहम मोड़ आया. दरअसल, गैंसड़ी सीट के विधायक डॉ. शिव प्रताप यादव के निधन के बाद नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा ने अपनी यह सीट बरकरार रखी जहां पार्टी के राकेश कुमार यादव ने भाजपा के शैलेश कुमार सिंह को करीब 9 हजार 437 वोटों से हराया. यह जीत सपा के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है क्योंकि इससे पार्टी ने जिले में अपनी इकलौती सीट को और मजबूत कर लिया. अब 2027 से पहले दोनों प्रमुख दल जिले में सक्रिय हो चुके हैं. अक्टूबर 2026 की शुरुआत में सपा ने बलरामपुर सदर सीट पर बड़ी पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) महापंचायत आयोजित की जिसमें पार्टी नेताओं ने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और हर परिवार तक पहुंच बनाने का आह्वान किया.
"हम सब विपक्ष के लोग अगर इलेक्शन कमीशन के खिलाफ बोल रहे हैं तो बीजेपी सामने क्यों आ रही है?"
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- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/5U6qYi6ELn
किस सीट पर क्या है जातीय समीकरण
बलरामपुर (सुरक्षित) सीट की बात करें तो यहां मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा समूह है. इसके बाद कंहार-प्रजापति-गौड़ समुदाय के बड़ी संख्या में वोट हैं.
तुलसीपुर सीट की बात करें तो यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव है.
गैंसड़ी सीट की बात करें तो यहां यादव और मुस्लिम मतदाताओं का पारंपरिक गठजोड़ इस सीट पर जीत और हार का प्रतिशत तय करता है.
उतरौला सीट की बात करें तो मुस्लिम आबादी जिले में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा यहां वर्मा समाज और अन्य पिछड़ी जातियां भी अपना असर रखती हैं.
भाजपा का सुशासन आया और बदल गया रामलला के दरबार का स्वरूप#BJP4UP #BJP4ViksitBharat pic.twitter.com/7dO14mzW9S
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FAQ
Q. बलरामपुर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. बलरामपुर जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं, तुलसीपुर, गैंसड़ी, उतरौला और बलरामपुर (सदर).
Q. इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
A. बलरामपुर सदर सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी तीनों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.
Q. 2022 चुनाव में बलरामपुर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A. भाजपा को तीन सीटें (तुलसीपुर, उतरौला, बलरामपुर सदर) मिलीं, जबकि गैंसड़ी सीट सपा के खाते में गई थी.
Q. बलरामपुर जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 62 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 37 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से काफी ज्यादा है.
Q. गैंसड़ी सीट पर अभी किसका कब्जा है?
A. 2022 में सपा के डॉ. शिव प्रताप यादव यहां से जीते थे, उनके निधन के बाद नवंबर 2024 के उपचुनाव में सपा के ही राकेश कुमार यादव ने यह सीट बरकरार रखी.
Q. जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. 2017 में भाजपा ने जिले की सभी चार सीटें जीती थीं, मगर गैंसड़ी सीट पर सपा का ऐतिहासिक तौर पर मजबूत आधार रहा है, जिसे पार्टी ने 2022 और फिर 2024 के उपचुनाव में भी बरकरार रखा.
Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. सपा जिले में पीडीए समीकरण को मजबूत करने के लिए लगातार बड़े कार्यक्रम कर रही है, जबकि भाजपा अपनी तीन सीटें बचाने और गैंसड़ी में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है.
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Navratri 2026: कश्मीर से कन्याकुमारी तक दिखते हैं नवरात्रि के अलग रंग, जानें देशभर की अनोखी परंपराएं
Navratri 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर 2026 से हो रहा है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ होने वाला है. क्या आप जानते हैं देशभर में एक ही नवरात्रि का त्योहार अलग-अलग राज्यों में काफी अलग होता है. क्योंकि कहीं दुर्गा मां की भव्य पूजा होती है, तो किसी जगह पर दशहरा मनाया जाता है. इसलिए, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात में भी नवरात्रि की धूम होती है. चलिए इस रिपोर्ट में जानते हैं देश के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि किस तरह मनाई जाती है और इनके पीछे क्या परंपराएं हैं.
कश्मीर में माता खीर भवानी की पूजा होती है
कश्मीर में नवरात्रि का त्योहार श्रद्धा और साधना के साथ मनाया जाता है. इस पर्व को कश्मीरी पंडित समुदाय द्वारा मनाया जाता है. इसमें इस समुदाय के लिए माता खीर भवानी के मंदिर में विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि के दौरान यहां भक्त माता की पूजा करते हैं. व्रत रखते हैं. माता खीर भवानी को समर्पित मंदिर कश्मीर की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है. नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की आस्था और भक्ति की धूम देखने को मिलती है.
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कन्याकुमारी में दिखता है नवरात्रि का सबसे खास रूप
देश के दक्षिणी छोर का शहर कन्याकुमारी भी अपनी नवरात्रि की खास परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां नवराभि के दौरान प्रमुख मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों और प्रतिमाओं से जुड़ी पारंपरिक यात्राएं निकाली जाती हैं. इन सभी धार्मिक यात्राओं में स्थानीय परंपराओं और दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है. मंदिरों में सजावट, पूजा-पाठ किया जाता है. शोभायात्राएं निकाली जाती है.
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के साथ सिंदूर खेला
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल में नवरात्रि के पर्व को दुर्गा पूजा का पर्व माना जाता है. यहां दुर्गा पूजा की धूम अलग ही होती है. यहां मां दुर्गा की विशाल मूर्तियां, आकर्षक पंडाल और विशेष पूजा का महोत्सव होता है. दशहरा के दिन यहां सिंदूर खेला की परंपरा मनाई जाती है. इस रस्म में सुहागिन महिलाएं पहलें दुर्गा मां को सिंदूर लगाती है और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. इस परंपरा को सुहाग और खुशहाली की कामना से जुड़ा माना जाता है.
गुजरात में डांडिया-गरबा से सजाई जाती हैं रातें
नवरात्रि त्योहार की गुजरात में अलग ही धूम होती है. यहां गरबा और डांडिया जैसे त्योहार पहले याद आते हैं. यहां नवरात्रि की नौ रातें संगीत, नृत्य और उत्साह से भरी होती हैं. लोग पारंपरिक गरबा वाली पोशाकें पहनते हैं. हाथों में डांडिया लेकर डांडिया और गरबा नृत्य करते हैं. यहां मां अंबा की आराधना करने का महत्व होता है. उनको याद करते हुए डांडिया शुरू करते हैं.
हिमाचल में नवरात्रि के साथ होता है कुल्लू दशहरा
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में नवरात्रि के मौके पर कुल्लू दशहरा मनाया जाता है. यह दशहरा का उत्सव होता है. यहां दशहरा देश के बाकी हिस्सों से काफी अलग तरीके से मनाया जाता है. कुल्लू में नवरात्रि खत्म होने के बाद दशहरे का भव्य आयोजन शुरू होता है. इस दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है और अलग-अलग क्षेत्रों से देवी-देवताओं की शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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