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दिवाली पर पहली बार डेढ लाख दियों से सजेगा रामलला का दरबार, अयोध्या में 33 लाख दीप जलाने की तैयारी

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस बार अयोध्या में भव्य दिवाली मनाने की तैयारी कर रही है. भगवान राम की नगरी अयोध्या में इस बार दीपोत्सव कई मायनों में खास होगा. क्योंकि योगी सरकार पहली बार राम जन्मभूमि के पूरे परिसर को एक साथ दीपों से सजाने की तैयारी कर रही है. करीब 70 एकड़ में फैले परिसर में मुख्य राम मंदिर से लेकर परकोटे, सप्तमंडपम और कुबेर टीले तक दीप जलाए जाएंगे.

इस दौरान करीब डेढ़ लाख दीप जलाए जाने की योजना है. बता दें कि राम जन्मभूमि परिसर में बने सभी 18 मंदिरों में अब विग्रहों की स्थापना हो चुकी है. साथ ही यहां नियमित पूजा-अर्चना भी शुरू हो गई है. ऐसे में इस बार दीपोत्सव के दौरान इन सभी मंदिरों को एक साथ रोशन करने की तैयारी की जा रही है.

राम मंदिर में घी के दीप, खुले हिस्सों में तेल के जलेंगे दिए

इस बार दीपोत्सव के लिए परिसर के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरह के दीपों की व्यवस्था की जा रही है. मुख्य राम मंदिर और रामदरबार में विशेष सजावट की जाएगी. गर्भगृह में शुद्ध देशी घी के दीप प्रज्वलित करने की योजना है तो वहीं मंदिर के पत्थर से बने हिस्सों पर मोम के दीप लगाए जाएंगे. वहीं खुले स्थानों पर सरसों के तेल के दीप जलाए जाने की तैयारी है. इससे पूरे परिसर में रोशनी का अलग-अलग स्वरूप देखने को मिलेगा.

परकोटे से कुबेर टीले तक होगी रोशनी

इसके अलावा योगी सरकार इस बार दीप सज्जा का दायरा केवल मुख्य राम मंदिर तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि राम जन्मभूमि परिसर के परकोटे में स्थित छह मंदिरों के अलावा सप्तमंडपम के सात मंदिरों में भी दीप जलाए जाएंगे. इसके साथ ही शेषावतार मंदिर और कुबेर टीले पर स्थित कुबेश्वर महादेव मंदिर भी दीपों से जगमगाएगा. सभी प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद यह पहला दीपोत्सव होगा, जब पूरे राम जन्मभूमि परिसर को एक साथ दीपों से सजाया जाएगा.

18 मंदिरों में दिखेगी दीपों की रोशनी

इसके अलावा दिवाली के अवसर पर इस बार राम मंदिर और रामदरबार के साथ-साथ राम मंदिर परिसर में भगवान शिव, कुबेश्वर महादेव, भगवान गणेश, भगवान सूर्य, मां दुर्गा, मां अन्नपूर्णा और हनुमानजी के मंदिरों में भी दीप जलाए जाएंगे. इसके साथ ही शेषावतार लक्ष्मण, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, माता अहिल्या, माता शबरी, निषादराज और संत तुलसीदास से जुड़े मंदिरों को भी दीपों से सजाया जाएगा.

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पूरी अयोध्या नगरी में 33 लाख दीप जलाने का लक्ष्य

दिवाली के अवसर पर योगी सरकार ने इस बार पूरी अयोध्या नगरी को रोशन करने की योजना बनाई है. राम जन्मभूमि परिसर की भव्य दीप सज्जा के साथ पूरी अयोध्या को भी रोशन करने की तैयारी जोरों पर है. इस साल रामनगरी में 33 लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है. दीपोत्सव की तैयारियों के तहत करीब 96 हजार लीटर तेल और लगभग 64 लाख बत्तियों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है. सरयू के घाटों के साथ अयोध्या के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी दीप सजाए जाएंगे. राम जन्मभूमि परिसर से लेकर सरयू तट तक रोशनी की यह श्रृंखला दीपोत्सव के दौरान अयोध्या के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को और भव्य बनाएगी.

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Explainer: रश्मिका-विजय की ‘राणाबाली’ में दिखेगा ‘द ग्रेट मद्रास अकाल’, क्या थी 1876 की वो भयानक त्रासदी?

Ranabaali 'Great Madras Famine': रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) और विजय देवरकोंडा (Vijay Deverkonda) की फिल्म ‘राणाबाली’ इन दिनों चर्चा में है. फिल्म का बैकग्राउंड कोई आम पीरियड कहानी नहीं है, बल्कि ये भारत के उस दौर के इतिहास को दिखाएगी जब दक्षिण भारत के बड़े हिस्से ने भयानक अकाल और भूख का सामना किया था.फिल्म की कहानी 1876-78 के 'द ग्रेट मद्रास अकाल'  पर बेस्ड है. तो चलिए जानते हैं, फिल्म से जुड़ी जानकारी.

फिल्म में विजय देवरकोंडा एक ऐसे योद्धा के रोल में नजर आएंगे, जो अपने लोगों और इलाके को बचाने के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़ा होता है. वहीं, रश्मिका मंदाना फिल्म में जयम्मा का किरदार निभा रही हैं. फिल्म का निर्देशन राहुल सांकृत्यायन ने किया है और ये 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

क्या था द ग्रेट मद्रास अकाल?

द ग्रेट मद्रास अकाल (Great Madras Famine) को 1876-78 का ग्रेट फेमिन भी कहा जाता है. ये दक्षिण भारत के सबसे भयानक अकालों में से एक था, जिसकी शुरुआत साल 1876 में हुई थी और करीब दो साल तक इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला था. उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था और इस अकाल का सबसे ज्यादा असर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम भारत के लोगों पर पड़ा था. मद्रास प्रेसीडेंसी के अलावा बॉम्बे प्रेसीडेंसी, मैसूर और हैदराबाद के कई इलाके भी इसकी चपेट में आ थे. धीरे-धीरे इसका असर मध्य भारत और देश के कुछ उत्तरी हिस्सों तक भी पहुंच गया था. बताया जाता है कि करीब 6.7 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके और लगभग 5.85 करोड़ लोग इस अकाल से प्रभावित हुए थे.

बारिश न होने की वजह से पड़ा अकाल

इस अकाल की सबसे बड़ी वजह बारिश का कम होना था. साल 1876 में मानसून कमजोर रहा और कई इलाकों में जरूरत के मुताबिक बारिश नहीं हुई था. वहीं, दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पहले से ही पानी की कमी और खेती से जुड़ी परेशानियां थीं. ऐसे में बारिश कम हुई तो खेतों में फसलें खराब होने लगी थी. कई इलाकों में हालात इतने खराब हो गए कि लोगों के सामने भूख और भुखमरी का संकट खड़ा हो गया.

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अकाल के बीच भी जारी रहा अनाज का निर्यात

वहीं, उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था और अनाज का बड़े स्तर पर कारोबार होता था. अकाल के दौरान भी भारत से अनाज बाहर भेजा जाता था. ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उस दौर में इंग्लैंड को भी बड़ी मात्रा में गेहूं भेजा गया था. ऐसे समय में, देश के कई हिस्सों में लोग खाने की कमी से ज्यादा परेशान रहे. इसके अलावा किसानों को ऐसी फसलें उगाने पर ज्यादा जोर दिया जाता था, जिन्हें बाजार में बेचकर पैसा कमाया जा सके.  इससे स्थानीय लोगों के लिए खाने का अनाज जुटाना और मुश्किल हो गया था. 

रायलसीमा पर क्यों पड़ा सबसे ज्यादा असर?

‘राणाबाली’ की कहानी की बात करे तो इसमें रायलसीमा के इलाके पर ज्यादा फोकस किया गया है. आज रायलसीमा आंध्र प्रदेश का हिस्सा है और ये पहले से ही बारिश और पानी की कमी से जूझता रहा है. ऐसे में जब 1876 में बारिश कम हुई, तो यहां खेती पर इसका सीधा असर पड़ा और लोगों की मुश्किलें बढ़ गई थी. 

फसल खराब होने से किसानों की कमाई रुक गई और खाने के सामान के दाम भी बढ़ने लगे थे. लोगों के पास खाने के लिए भी अनाज नहीं बचा. हालात इतने बिगड़ गए थे कि लोग काम और खाने की तलाश में अपना घर छोड़कर दूसरे इलाकों में जाने लगे थे. भूख के साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया था. विजय और रश्मिका की फिल्म‘राणाबाली’ इसी दौर की परेशानियों और लोगों के संघर्ष को बड़े पर्दे पर दिखाने जा रही है. 

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कितने लोगों की गई जान?

इस अकाल में लगभग 56 लाख से 96 लाख के बीच लोगों की मौत हुई है. खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग और गरीब परिवार इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे. इस दौरान सामने आए मानवीय संकट ने ब्रिटिश प्रशासन की अकाल नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे. बाद में अकालों से निपटने के लिए सरकार ने एक Famine Commission बनाया, जो 1880 में सामने आया था.

राहत के लिए क्या किया गया था?

अकाल के हालात बिगड़ने के बाद ब्रिटिश सरकार ने लोगों की मदद के लिए राहत कैंप और राहत काम शुरू किए.  लोगों को काम करने के बदले पैसे और खाने का सामान दिया जाता था. लेकिन इन राहत योजनाओं को लेकर भी काफी सवाल उठे थे. उस समय ‘टेंपल वेज’ नाम की राहत व्यवस्था का भी जिक्र किया जाता था. इसमें राहत के लिए काम करने वाले लोगों को तय मात्रा में खाना और कुछ पैसे दिए जाते थे. लेकिन राहत पाने के लिए कई नियम और शर्तें भी होती थी, वहीं लोगों को काफी मुश्किल और मेहनत वाला काम करना पड़ता था. 

‘राणाबाली’ का इतिहास वाला एंगल?

भारतीय सिनेमा में आजादी की लड़ाई और ब्रिटिश शासन पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन 1876-78 के मद्रास अकाल जैसे मुद्दें आम दर्शकों के बीच उतने चर्चित नहीं रही है. ऐसे में ‘राणाबाली’ एक ऐसे दौर की कहानी को सामने ला रही है, जिसमें भूख, सूखा, गरीबी, ब्रिटिश नीतियां और लोगों का विरोध एक साथ दिखाए जाएंगे. फिल्म का बैकग्राउंड में भी ये झलक देखने को मिली है कि  इतिहास सिर्फ राजाओं और युद्धों की कहानी नहीं है. आम लोगों ने भी इतिहास के कई बेहद मुश्किल दौर झेले हैं.

सिनेमाघरों में कब रिलीज होगी फिल्म?

राणाबाली’ में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना लीड रोल में नजर आएंगे. इसके अलावा हॉलीवुड एक्टर अर्नोल्ड वॉस्लू भी अहम रोल निभा रहे हैं. फिल्म का निर्देशन राहुल सांकृत्यायन ने किया है, जबकि इसका प्रोडक्शन Mythri Movie Makers के बैनर तले किया गया है. ये फिल्म एक पीरियड एक्शन ड्रामा है, जिसकी कहानी 1876-78 के ग्रेट मद्रास फेमिन से जुड़ी है. ‘राणाबाली’ की रिलीज की बात करे तो ये फिल्म  16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. 

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  Sports

WTC में अब दिखेंगी 12 टीमें? जिम्बाब्वे-अफगानिस्तान को भी मिलेगा टेस्ट का बड़ा मंच

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के अगले सत्र को लेकर बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबकि अगले सत्र में टीमों की संख्या बढ़ाकर 12 की जा सकती है. आईसीसी पर विचार कर रहा है. ऐसे में अगर टीमों की संख्या बढ़ती है तो फिर अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे को भी टेस्ट में बड़ा मंच मिलेगा. Wed, 7 Oct 2026 19:40:27 +0530

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