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दिल्ली: रोहिणी में नकली नोट बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड, चार आरोपी गिरफ्तार

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ममदानी की जीत ने बदली यूरोप की राजनीति:वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को मुद्दा बनाया; बर्लिन में जीत मिली

न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी की जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं। वहीं, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड के वामपंथी नेता भी ममदानी की राजनीति पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममदानी ने यूरोप के वामपंथ को चुनाव लड़ने का नया तरीका दे दिया है। 1. जर्मनी: सस्ते घरों का वादा किया, सबसे ज्यादा सीटें मिलीं अगर यूरोप में किसी एक नेता को ममदानी से सबसे सीधे तौर पर जोड़ा जा सकता है, तो वह एलिफ एराल्प हैं। 45 साल की एराल्प वकील हैं और तुर्की मूल के परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता 1980 के तुर्की सैन्य तख्तापलट के बाद जर्मनी आए थे। एराल्प 2017 में द लिंक से जुड़ी थीं। पिछले महीने हुए चुनाव में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा- महंगा शहर और महंगा किराया। एराल्प ने बर्लिन में निजी कंपनियों के पास मौजूद करीब 2.2 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने की मांग की। इसका फायदा द लिंक को मिला। वह चुनाव में करीब 25.7% वोट मिले और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। 2. ब्रिटेन: जैक पोलांस्की ने ममदानी की कैंपेन टीम से सीखा ब्रिटेन में ममदानी से सबसे ज्यादा तुलना जैक पोलांस्की की होती है। वे ग्रीन पार्टी के नेता हैं। यह पार्टी मुख्य रूप से पर्यावरण और जलवायु के मुद्दों पर राजनीति करती रही है। लेकिन पोलांस्की ने पार्टी के मुद्दों का दायरा बढ़ाया है। पोलांस्की महंगाई, महंगे घर, बढ़ते किराए, रोजमर्रा के खर्च और अमीरों पर ज्यादा टैक्स जैसे मुद्दों को पर्यावरण की राजनीति से जोड़ते हैं। पोलांस्की इसे ‘इको-पॉपुलिज्म’ कहते हैं। ममदानी की तरह पोलांस्की भी सोशल मीडिया को राजनीति का अहम माध्यम बना रहे हैं। पोलांस्की ने बताया कि उनकी वीडियो टीम ममदानी के वीडियो बनाने वाली टीम से टिप्स ले रही है। दिलचस्प बात यह है कि पोलांस्की इस समय लंदन की होलबॉर्न सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के सांसद पद से हटने के बाद 8 अक्टूबर को यहां उपचुनाव हो रहा है। दो साल पहले हुए चुनाव में ग्रीन पार्टी को यहां सिर्फ 10 फीसदी वोट मिले थे। कुछ सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि इस बार ग्रीन को 40 फीसदी वोट मिल सकता है। 3. स्पेन: 87 साल की महिला को घर से निकाला, सरकार गिरी स्पेन में महंगा घर और बढ़ता किराया इस समय बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले महीने मैड्रिड में 87 साल की मारिकर्मेन अबास्कल को 70 साल से रह रहे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह मामला स्पेन के आवास संकट का प्रतीक बन गया। मामला इतना बढ़ा कि सरकार पर आवास संकट से निपटने का दबाव बढ़ गया। संसद में सरकार के आवास संबंधी प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने 29 नवंबर को समय से पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। यानी स्पेन में भी घर और किराया अब सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं रहे। वे सीधे चुनावी राजनीति का मुद्दा बन चुके हैं। 4. फ्रांस: पेरिस में 60 हजार सस्ते घर बनाने का वादा फ्रांस की राजधानी पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। वे इसी साल मेयर चुने गए हैं। उनकी राजनीति में महंगा घर और बढ़ता किराया बड़ा मुद्दा है। ग्रेगोयर पेरिस में ज्यादा सस्ते घर बनाने, खाली पड़े मकानों को लोगों के लिए इस्तेमाल करने और किराए पर नियंत्रण बढ़ाने की बात करते हैं। उनकी सरकार का मकसद 60 हजार नए सस्ते घर बनाना है। ममदानी की जीत से पहले भी फ्रांस के कुछ वामपंथी नेता उनके अभियान से सीखने की बात कर चुके थे। ब्रिटेन की तरह यहां भी ममदानी की चुनावी शैली और सीधे मैसेज देने के तरीके पर नजर रखी गई। 5. नीदरलैंड: घर की कमी को मुद्दा बनाया, सबसे बड़ी पार्टी बनी नीदरलैंड में ममदानी की जीत से पहले ही घर और किराए का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ चुका था। 2025 के राष्ट्रीय चुनाव में D66 के नेता रॉब येटन ने आवास संकट को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। उस समय देश में करीब 4 लाख घरों की कमी थी। घर खरीदना महंगा हो चुका था और किराए लगातार बढ़ रहे थे। यानी लाखों लोगों के सामने सवाल था। सरकार महंगाई कब कम करेगी से पहले घर मिलेगा कब? येटन की पार्टी D66 ने हर साल 1 लाख नए घर बनाने और 10 नई टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा। चुनाव में इसका फायदा भी मिला। पार्टी 2023 की 9 सीटों से बढ़कर 2025 में 26 सीटों पर पहुंच गई और सबसे बड़ी पार्टियों में शामिल हुई। यानी नीदरलैंड में सस्ता घर और कम किराया यूरोप में ममदानी की जीत से पहले ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका था। ममदानी की जीत ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया।

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  Sports

Sports News: राजस्थान के शूटरों ने दिल्ली में मचाया धमाल, तनुज ने जीते 2 सिल्वर तो इनाया ने 2 गोल्ड पर जमाया कब्जा

India Open Shotgun Championship: राजस्थान के युवा और अनुभवी शूटरों ने नई दिल्ली में आयोजित 11वीं इंडिया ओपन शॉटगन चैम्पियनशिप में अपनी निशानेबाजी का दम दिखाया है. डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में चल रही प्रतियोगिता में राजस्थान के खिलाड़ियों ने क्ले पिजन स्कीट और ट्रैप के अलग-अलग वर्गों में पदक हासिल किए. तनुज राज सिंह ने दो सिल्वर मेडल जीतकर खास उपलब्धि हासिल की, जबकि इनाया यादव ने दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए. पदमजा राठौड़, युगांतर देवसिंह, दिव्यदत्त, प्रिंस नदवानी और भवानी सिंह कालवी ने भी अपने-अपने इवेंट में पदक जीते. खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर राजस्थान राइफल एसोसिएशन ने सभी पदक विजेताओं को शुभकामनाएं दी हैं. Thu, 8 Oct 2026 08:08:41 +0530

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कैसे हुई Nana Patekar की मौत? | Nana Patekar Passes Away | Mumbai | Bollywood #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-08T04:30:08+00:00

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