पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे, जापान, भूटान समेत दुनिया भर के नेताओं ने दी बधाई
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक जीवन में एक बड़ा राजनीतिक पड़ाव पूरा कर लिया. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2001 को शपथ लेने के बाद से वह लगातार सरकार के प्रमुख की भूमिका में हैं. इस तरह गुजरात से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर अब 25 साल पूरे कर चुका है.
इस अवसर पर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी. विदेशी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और भारत के साथ अपने देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए पीएम मोदी की तारीफ की.
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने दी पीएम मोदी को बधाई
पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने उन्हें बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि गुजरात से लेकर नई दिल्ली तक सरकार के मुखिया के रूप में लगातार 25 साल पूरे करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इसके साथ ही उन्होंने भारत और बेल्जियम के बीच संबंधों का भी जिक्र किया. बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले महीने भारत की सफल यात्रा के बाद वह दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं.
I warmly congratulate Prime Minister @narendramodi on 25 years of continuous leadership in government, from Gujarat to New Delhi. Following my productive visit to India last month, I look forward to further deepening the strong partnership between our two countries. pic.twitter.com/ymMBQ1Ew1m
— Bart De Wever (@Bart_DeWever) October 7, 2026
डोमिनिका के प्रधानमंत्री ने बताया खास दोस्त
वहीं डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने भी प्रधानमंत्री मोदी को व्यक्तिगत तौर पर बधाई दी. उन्होंने मोदी को अपना प्रिय मित्र बताते हुए सरकार के प्रमुख के रूप में 25 सालों की सेवा को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. स्केरिट ने भारत और डोमिनिका के संबंधों की मजबूती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा दोस्ती को वह काफी महत्व देते हैं और भविष्य में इस रिश्ते को और मजबूत करने की उम्मीद रखते हैं. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा और भारत की जनता की सेवा में निरंतर सफलता की कामना भी की.
My dear friend, Prime Minister @narendramodi, I warmly congratulate you on 25 years of continuous service as Head of Government, a journey that began in Gujarat and has continued through your leadership of India.
— Roosevelt Skerrit (@SkerritR) October 7, 2026
As you mark this milestone, I wish to express my appreciation for… pic.twitter.com/uC8aCq51Rv
नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने भी दी शुभकामनाएं
इसके साथ ही नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू की ओर से भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए विशेष संदेश जारी किया गया. राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में टिनुबू ने पीएम मोदी को सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करने पर बधाई दी. बयान में कहा गया कि 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस राजनीतिक सफर के 25 वर्ष पूरे हुए, जिसकी शुरुआत 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी. नाइजीरियाई राष्ट्रपति ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए भारत और नाइजीरिया के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी जाहिर की.
On behalf of the Government and people of the Federal Republic of Nigeria, and on my own behalf, I extend warm and fraternal congratulations to His Excellency Shri Narendra Modi @narendramodi, Prime Minister of the Republic of India, on a truly historic milestone.
— Bola Ahmed Tinubu (@officialABAT) October 7, 2026
Today, 7… pic.twitter.com/4zJ0i2dOnL
क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट? जिसके बढ़ने-घटने से आपकी EMI पर पड़ता है सीधा असर
What are the Repo Rate and Reverse Repo Rate: जब भी भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को लेकर कोई फैसला करता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं रहता. इसका सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है. खासकर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले लोगों के लिए रेपो रेट बेहद अहम होता है.
अक्सर आपने खबरों में सुना होगा कि RBI ने रेपो रेट बढ़ा दिया या घटा दिया. लेकिन सवाल है कि आखिर रेपो रेट क्या होता है और इसका आपकी EMI से क्या संबंध है? इसी तरह रिवर्स रेपो रेट क्या है और यह बैंकिंग सिस्टम में किस तरह काम करता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर बैंक RBI से आमतौर पर अल्पकालिक अवधि के लिए धन उधार लेते हैं.
इसके बदले बैंक पात्र प्रतिभूतियों को गिरवी रखते हैं. RBI के अनुसार, रेपो रेट मौद्रिक नीति का एक प्रमुख संकेतक है और इसके लिए जरिए बैंकिंग सिस्टम में पैसे की उपलब्धता को प्रभावित किया जाता है.
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए किसी बैंक को अपने ग्राहकों की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त पैसे की आवश्यकता है. बैंक RBI से निर्धारित दर पर पैसा ले सकता है. अगर रेपो रेट बढ़ जाता है तो RBI से पैसा लेना बैंक के लिए महंगा हो सकता है. इसका असर आगे बैंक की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है.
रेपो रेट बढ़ने पर क्या होता है?
जब RBI महंगाई को नियंत्रित करने या अर्थव्यवस्था में पैसे की उपलब्धता को प्रभावित करने के लिए रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए RBI से मिलने वाली फंडिंग की लागत बढ़ सकती है.
ऐसे में बैंक अपनी लोन ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं. इसका असर खास तौर पर उन कर्ज पर पड़ सकता है जिनकी ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती है.
उदाहरण के लिए, अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लिया है और आपके बैंक की ब्याज दर बढ़ती है, तो आपकी EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है. यानी रेपो रेट बढ़ा तो लोन महंगा होने की संभावना बढ़ जाती है.
रेपो रेट घटने पर क्या फायदा?
इसके उलट जब RBI रेपो रेट में कटौती करता है तो बैंकों के लिए फंडिंग की लागत कम होने की संभावना रहती है. बैंक अपनी लोन दरों में कटौती करते हैं तो नए ग्राहकों को सस्ता कर्ज मिल सकता है और फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा ग्राहकों को भी राहत मिल सकती है. ऐसे में होम लोन की EMI कम हो सकती है या ग्राहक समान EMI के साथ कम समय में लोन चुका सकता है.
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि RBI के रेपो रेट में बदलाव के बाद आपकी EMI उसी दिन और उसी अनुपात में बदल जाए. इसका असर बैंक की ब्याज दर, लोन के प्रकार औऱ आपके लोन के बेंचमार्क पर निर्भर करता है.
अब समझिए रिवर्स रेपो रेट क्या है?
रिवर्स रेपो रेट को समझना भी काफी आसान है. यह रेपो रेट के उलट दिशा में होने वाला लेनदेन है. इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त रकम RBI के पास रखते हैं और उसके बदले ब्याज प्राप्त करते हैं. RBI के दस्तावेजों के अनुसार, रिवर्स रेपो का इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त तरलता यानी liquidity को सोखने के लिए किया जाता है.
इसे ऐसे समझें कि अगर बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा उपलब्ध है, तो वे उस रकम को RBI के पास रखकर रिटर्न हासिल कर सकते हैं. इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त पैसे की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
रेपो और रिवर्स रेपो में क्या अंतर है?
दोनों को एक आसान तरीके से समझा जा सकता है.
रेपो रेट: बैंक RBI से पैसा लेते हैं और उसके लिए ब्याज चुकाते हैं.
रिवर्स रेपो रेट: बैंक अपनी अतिरिक्त रकम RBI के पास रखते हैं और उस पर ब्याज प्राप्त करते हैं.
इस तरह रेपो रेट का इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में पैसे की उपलब्धता और उधारी की लागत को प्रभावित करने के लिए किया जाता है, जबकि रिवर्स रेपो का पारंपरिक उपयोग अतिरिक्त liquidity को absorb करने के लिए किया जाता है.
आपकी EMI पर कैसे पड़ता है असर?
अब सबसे जरूरी सवाल इस पूरे सिस्टम का आपकी EMI से क्या लेना-देना है?
मान लीजिए आपने 20 साल के लिए फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लिया है. RBI की नीति में बदलाव के बाद बैंक अपनी ब्याज दर में बदलाव करता है. अगर आपके लोन की ब्याज दर बढ़ती है तो बैंक आपकी EMI बढ़ा सकता है या लोन की अवधि बढ़ा सकता है.
इसके विपरीत, ब्याज दर घटने पर आपकी EMI कम हो सकती है या समान EMI के साथ लोन जल्दी खत्म हो सकता है.
हालांकि, हर ग्राहक पर इसका असर एक जैसा नहीं होता. आपके लोन की ब्याज दर किस बेंचमार्क से जुड़ी है, बैंक ने कितना बदलाव किया है और लोन की बाकी अवधि कितनी है—इन सभी बातों से वास्तविक असर तय होता है.
सिर्फ EMI ही नहीं, बचत और निवेश पर भी असर
RBI की ब्याज दरों में बदलाव का असर केवल कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता. ब्याज दरों में बदलाव का प्रभाव बैंक की जमा दरों, बाजार की liquidity, निवेश और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है.
जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो कर्ज लेना महंगा हो सकता है और लोग खर्च तथा निवेश के फैसलों पर दोबारा विचार कर सकते हैं. वहीं, ब्याज दरों में कमी से कर्ज की लागत घटने और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना रहती है.
क्यों महत्वपूर्ण है रेपो रेट?
रेपो रेट RBI के प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है. इसके जरिए केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग सिस्टम में liquidity को प्रभावित करने की कोशिश करता है.
इसलिए अगली बार जब आप खबर में सुनें कि RBI ने रेपो रेट बढ़ाया या घटाया है, तो इसे सिर्फ बैंकिंग सेक्टर की खबर न समझें. इसका असर आपकी होम लोन EMI, कार लोन, पर्सनल लोन और बैंक की ब्याज दरों तक पहुंच सकता है. यही वजह है कि RBI की हर मौद्रिक नीति बैठक पर आम लोगों, बैंकिंग सेक्टर और बाजार की नजर रहती है.
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