सीएम योगी दिवाली से पहले इस शहर को देंगे सौगात, आम लोगों के लिए खुल जाएगा शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर
UP News: दिवाली से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ के लोगों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं. जिससे उन्हें जाम की समस्या से निजात मिलेगी. इसका सबसे ज्यादा फायदा पुराने शहर के लोगों को होगा. जहां हर दिन लोगों को ट्रैफिक जाम की परेशानी से जूझना पड़ता है. बता दें कि लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर तैयार किया गया है. जिसे इसी साल दिवाली से पहले खोने की तैयारी है. इस फ्लाईओवर के शुरू होने से डालीगंज से पक्का पुल तक का सफर करीब दो मिनट में पूरा किया जा सकेगा.
एलडीए उपाध्यक्ष ने किया फ्लाईओवर का निरीक्षण
इस फ्लाईओवर का काम लगभग पूरा कर लिया गया है. मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निरीक्षण किया. इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को बचे हुए काम को तय समयसीमा में पूरा करने और फ्लाईओवर के आसपास यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान टीले वाली मस्जिद के पास इंटीग्रेटेड रोटरी विकसित करने पर भी जोर दिया गया.
एक किलोमीटर से लंबा है ये फ्लाईओवर
बता दें कि इस पुल का निर्माण पक्का पुल यानी हर्डिंग ब्रिज से डालीगंज रोटरी के बीच किया जा रहा है. इस फ्लाईओवर की लंबाई करीब 1.1 किलोमीटर है. इस फ्लाईओवर को दो लेन का बयाना गया है. रेलवे ब्रिज के ऊपर निर्मित होने की वजह से इस फ्लाईओवर की ऊंचाई लगभग 25 मीटर है. एलडीए के मुताबिक फ्लाईओवर का मुख्य स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है. फिलहाल सड़क पर डामरीकरण, स्ट्रीट लाइट और अन्य जरूरी काम किए जा रहे हैं. अक्टूबर के अंत तक फ्लाईओवर का बाकी काम पूरा कर लिया जाएगा. जिससे इस फ्लाईओवर को दीपावली से पहले इसे यातायात के लिए खोल दिया जाए.
पुराने लखनऊ की करीब 10 लाख आबादी को फायदा
इस फ्लाईओवर के चालू होने के बाद पक्का पुल से समतामूलक चौराहे की ओर जाने वाले वाहनों को सीधा और तेज रास्ता मिलेगा. इससे पुराने लखनऊ के बड़े हिस्से में यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है. एलडीए अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से करीब 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुविधा मिलेगी. खास तौर पर डालीगंज, पक्का पुल और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को इसका फायदा होगा.
टीले वाली मस्जिद के पास बनेगी नई रोटरी
फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने वाले वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए इंटीग्रेटेड रोटरी तैयार की जाएगी. इसके तहत टीले वाली मस्जिद के पास नई रोटरी विकसित करने की योजना है. वहीं, मरी माता मंदिर के पास पहले से मौजूद रोटरी को भी नए ट्रैफिक पैटर्न के मुताबिक री-मॉडल किया जाएगा. यहां वाहनों की आवाजाही के लिए चार लेन का पैसेज तैयार किया जाएगा. एलडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक, ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आईआईटी बीएचयू और वीएनआईटी नागपुर की संयुक्त टीम से सर्वे कराया गया है. इसी अध्ययन के आधार पर इंटीग्रेटेड रोटरी की डिजाइन तैयार की गई है.
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पक्का पुल पर वाहनों की आवाजाही हो सकती है बंद
गोमती नदी पर पक्का पुल के नजदीक एक नया पुल भी बनाया जा रहा है. इसके चालू होने के बाद पुराने पक्का पुल से वाहनों की आवाजाही बंद करने की योजना है. एलडीए की ओर से पक्का पुल को भविष्य में पैदल यात्रियों के लिए पेडेस्ट्रियन ब्रिज के तौर पर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे पुराने ऐतिहासिक पुल को संरक्षित रखते हुए लोगों के लिए अलग पैदल मार्ग उपलब्ध कराया जा सकेगा. निरीक्षण के दौरान पीआईयू प्रभारी एके सिंह सेंगर, जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार और मनोज सागर समेत कई अधिकारी व अभियंता मौजूद रहे.
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आरबीआई की रेपो रेट बढ़ोतरी से महंगे हो सकते हैं होम लोन, बढ़ सकती है ईएमआई
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की कर्ज लागत बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन आमतौर पर रेपो रेट और अन्य बाजार आधारित बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव का सीधा असर ऐसे कर्जों पर पड़ता है। भारत में अधिकांश खुदरा होम लोन ग्राहक फ्लोटिंग रेट विकल्प को चुनते हैं क्योंकि यह आमतौर पर फिक्स्ड रेट लोन की तुलना में 1 से 2.5 प्रतिशत तक सस्ता होता है।
वहीं, जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक आमतौर पर ऋण दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं और बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल देते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में वृद्धि या चुकौती अवधि में वृद्धि हो सकती है।
यदि कोई ग्राहक अभी 8 प्रतिशत ब्याज दर पर होम लोन चुका रहा है, तो पूर्ण प्रभाव पास होने की स्थिति में उसकी ब्याज दर बढ़कर लगभग 8.25 प्रतिशत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में बैंकों के पास आम तौर पर दो विकल्प होते हैं। वे या तो ग्राहक की मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ा सकते हैं या फिर ईएमआई को समान रखते हुए ऋण अवधि (टेन्योर) बढ़ा सकते हैं। अंतिम प्रभाव बैंक की नीति और ग्राहक के लोन समझौते पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या बैंक से प्राप्त सूचनाओं पर नजर रखें, क्योंकि अलग-अलग बैंक दरों में संशोधन और उसके प्रभाव को अलग तरीके से लागू कर सकते हैं।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं।
आरबीआई ने इस बैठक में सिर्फ रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ही नहीं किया, बल्कि अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी संतुलित सख्ती भी कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट कहा है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। आगे की नीतिगत कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार या तो दरों में और बढ़ोतरी या फिर यथास्थिति के रूप में हो सकती है।
--आईएएनएस
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