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Urban Maoist नेटवर्क पर कड़ा प्रहार जरूरी, Bombay High Court से याचिकाएं खारिज करने की मांग

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय को बताया है कि महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम इसलिए लागू किया गया है क्योंकि राज्य शहरी माओवादी गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जहां 64 सक्रिय फ्रंटल संगठन कार्यरत हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। मंगलवार को दायर हलफनामे में सरकार ने कहा कि यह कानून गैरकानूनी, विध्वंसक और चरमपंथी गतिविधियों को रोकने और उनसे निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करने के लिए लाया गया है। यह हलफनामा महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया था। ये याचिकाएं कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दायर की गई हैं, जिन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून कार्यपालिका को अस्पष्ट और अति व्यापक परिभाषाओं के आधार पर संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की व्यापक शक्तियां देता है।

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सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र भर में "शहरी माओवादी" नेटवर्क की बढ़ती उपस्थिति ने गैरकानूनी और विध्वंसक गतिविधियों से निपटने के लिए एक विशेष कानूनी ढांचे को आवश्यक बना दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों पर भरोसा करते हुए, हलफनामे में कहा गया है कि महाराष्ट्र "शहरी माओवादी गतिविधियों का केंद्र" बनकर उभरा है और दावा किया गया है कि राज्य में 64 सक्रिय फ्रंटल संगठन काम कर रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक संख्या है। हलफनामे में कहा गया है यह कानून मौलिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था एवं राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करने के राज्य के कर्तव्य के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।" सरकार ने उच्च न्यायालय से याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है, यह तर्क देते हुए कि याचिकाकर्ताओं को कोई प्रत्यक्ष कानूनी क्षति नहीं हुई है।

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मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं को सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। राज्य विधानसभा द्वारा पिछले जुलाई में पारित और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिसंबर में स्वीकृत इस अधिनियम का उद्देश्य वामपंथी उग्रवादी संगठनों या इसी तरह के निकायों की कुछ गैरकानूनी गतिविधियों की प्रभावी रोकथाम करना है। कानून में चार अपराधों का उल्लेख है जिनके लिए किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है: गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना; सदस्य न होते हुए भी ऐसे संगठन के लिए धन जुटाना; इसके प्रबंधन में सहायता करना; या गैरकानूनी गतिविधि करना। यह राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध संगठन को "गैरकानूनी संगठन" घोषित करने का अधिकार भी देता है।

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Tamil Nadu में वोटर लिस्ट विवाद पर DMK ने Rahul Gandhi के रुख पर उठाए सवाल

चेन्नई, सात अक्टूबर तमिलनाडु में विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए इस दक्षिणी राज्य में कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर उनकी ‘‘चुप्पी’’ पर सवाल उठाया। द्रमुक के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाया। अन्नादुरई ने कांग्रेस सांसद पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इस कवायद को लेकर ‘‘असंगत रुख अपनाने’’ का आरोप लगाया और पूछा कि तमिलनाडु में हुई घटनाओं को निर्वाचन आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान जितनी ही तवज्जो क्यों नहीं मिली।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने मंगलवार को दिल्ली में संसद से निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। द्रमुक ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग की एसआईआर कवायद के दौरान तमिलनाडु की मतदाता सूचियों से लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। द्रमुक प्रवक्ता ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम से दिए गए एक बयान का सार्वजनिक रूप से समर्थन क्यों नहीं किया।

खरगे के हवाले से कथित तौर पर कहा गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद निर्वाचित राज्य सरकारों को भंग कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता ने तमिलनाडु में इस मुद्दे को उठाने से इसलिए परहेज किया क्योंकि वह ‘‘विजय से बात करने को लेकर डरते हैं।’’ उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद दशकों पुराना द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन टूट गया। कांग्रेस ने अपने लंबे समय से सहयोगी द्रमुक से संबंध तोड़कर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सरकार बनाने में समर्थन दिया, जिसके बाद दोनों दलों के बीच कड़वाहट बढ़ गई।

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द ग्रेट खली ने डब्ल्यूडब्ल्यूई में कब किया था डेब्यू, जानें किस रेसलर के खिलाफ लड़ा था पहला मैच

The Great Khali first WWE fight: द ग्रेट खली की डब्ल्यूडब्ल्यूई में एंट्री बेहद खतरनाक और सनसनीखेज रही थी. मार्क हेनरी और अंडरटेकर के मैच में दखल देते हुए खली ने अंडरटेकर को चारों खाने चित कर दिया था. जापान के सुपरस्टार फुनाकी के खिलाफ अपना सिंगल डेब्यू जीतने वाले खली ने 27 अप्रैल 2018 को डब्ल्यूडब्ल्यूई से संन्यास ले लिया था. वर्तमान में वह पंजाब के जालंधर में अपनी रेसलिंग एकेडमी कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट चला रहे हैं. Thu, 8 Oct 2026 23:24:19 +0530

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