SSC CHSL 10+2 Online Form 2026 for 2536 Post
SSC 10+2 CHSL Recruitment 2026 Apply Online Form Post Update Date: 07-10-2026 Short Description : Staff Selection Commission has released notification for SSC CHSL Combined Higher Secondary (10+2) Level Examination, 2026 in which there are 2536 Post . Eligible candidates can apply online between 07/09/2026 to 07/10/2026. All the SSC CHSL 2026 Job related information ...
UN में OIC पर बरसा भारत, Biplab Deb बोले पीड़ित और दोषी में फर्क समझे संगठन
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, सात अक्टूबर भारत ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा है कि यह समूह ‘‘पीड़ित और दोषी के बीच फर्क करने में असमर्थ’’ है। पश्चिम त्रिपुरा से लोकसभा सदस्य बिप्लब कुमार देब ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के उन्मूलन के उपाय’ विषय पर मंगलवार को भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। देब 15 सांसद के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं जो संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली से परिचित होने के लिए आयोजित एक सप्ताह के कार्यक्रम में भाग लेने यहां पहुंचा है।
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री देब ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करने वाले ओआईसी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘अब मैं ओआईसी के अध्यक्ष की ओर से दिए गए उस बयान का भी जवाब देना चाहता हूं जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की लक्षित और संयमित कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की इन्हीं स्थानों से योजना बनाई गई और उन्हें निर्देशित किया गया।’’ देब ने कहा, ‘‘यह खेदजनक है कि यह बयान देने वाले लोग तथ्य और कल्पना के बीच तथा पीड़ित और दोषी के बीच फर्क नहीं कर पा रहे।’’ उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और आतंकवाद में शामिल होने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। देब ने ओआईसी द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का ‘‘अनुचित उल्लेख’’ किए जाने भी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘ओआईसी के अध्यक्ष के लिए बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान द्वारा, खासकर रावलकोट में किए गए अवैध कब्जे पर ध्यान दें जहां अंधाधुंध हत्याएं, बर्बर हिंसा और वहां रहने वाले लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जाना साफ दिखाई देता है।
इस तरह जानबूझकर आंखें मूंदना केवल कट्टरता और असहिष्णुता को दर्शाता है।’’ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कई महीनों से 12 विवादित शरणार्थी सीट को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा की कानूनी मामलों से संबंधित छठी समिति में ओआईसी की ओर से सऊदी अरब ने यह बयान दिया था। ओआईसी ने ‘‘दक्षिण एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने’’ और ‘‘पाकिस्तान में कई स्थानों पर किए गए अनुचित हमलों’’ का उल्लेख किया लेकिन उसने भारत का नाम नहीं लिया।
भारत ने पिछले साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए जघन्य आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे। यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है।
ओआईसी के बयान में जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया। देब ने कहा कि भारत अपने ‘‘कड़वे अनुभव’’ से इस बात को समझता है कि आतंकवाद का खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि ‘‘लगातार और रोजमर्रा की वास्तविकता’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोग सीमा पार आतंकवाद का दशकों से सामना कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पहलगाम आतंकवादी हमला हमारी संप्रभुता पर सोची-समझी चोट था।
इसकी योजना बनाने और इसे अंजाम देने का काम उन नेटवर्क ने किया जिन्हें हमारी पश्चिमी सीमा के पार से अब भी सरकारी संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और सामग्री एवं साजो-सामान संबंधी सहायता मिलती है।’’ देब ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद का हर रूप मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसका अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा मानवाधिकारों पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हर मनुष्य के सबसे बुनियादी मानवाधिकार-जीवन के अधिकार- पर हमला करता है। आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के विपरीत है।
आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच कोई फर्क नहीं है।’’ देब ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस टिप्पणी का उल्लेख किया कि भारत के लिए आतंकवाद की एक घटना भी अस्वीकार्य है और इसमें एक व्यक्ति की जान जाना भी बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवादी हमलों को मानवता पर हमला मानता है।
उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन भर्ती करने, कट्टरपंथ फैलाने, दुष्प्रचार करने, हमलों की योजना बनाने और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। देब ने कहा, ‘‘इन प्रौद्योगिकियों के जरिए पहचान छिपाना आसान होता है और इनकी वैश्विक पहुंच तथा तेज गति आतंकवादियों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बच निकलने और कमजोर युवाओं को निशाना बनाने में मदद करती है।’’ भारत ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी प्रयासों में एक ‘‘प्रमुख कमी’’ की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि 1996 में भारत द्वारा मसौदा पेश किए जाने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) अब तक अस्तित्व में नहीं आया है। देब ने कहा, ‘‘भारत दोहराता है कि सीसीआईटी को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने से आतंकवाद का व्यापक रूप से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा मजबूत होगा।
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