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जन सेवा से देश सेवा के 25 वर्ष

विष्णु दत्त शर्मा

7 अक्टूबर 2001 को जब नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह शुरुआत भारतीय राजनीति का स्वर्णिम भविष्य बनेगी। एक कर्मयोगी की 25 वर्ष पहले शुरू हुई यह यात्रा गुजरात से दिल्ली और दिल्ली से वैश्विक मंचों तक पहुँच चुकी है। इस कालखंड को केवल शासन की निरंतरता कहना पर्याप्त नहीं बल्कि इसे समझने की कुंजी तीन शब्दों में है: सेवा, सुशासन और संकल्प। वस्तुतः यह एक कर्मयोगी की देश सेवा से जन सेवा की महायात्रा है, जिसमें पग-पग संकल्प दिखता है।

इस महायात्रा का पहला पड़ाव था, शासन को फाइलों से निकालकर परिणामों से जोड़ना। गुजरात में कृषि, सिंचाई, बिजली, सड़क, उद्योग और निवेश को साथ लेकर विकास को जनभागीदारी से जोड़ा गया। यही अनुभव 2014 में राष्ट्रीय शासन-दृष्टि का आधार बना-ऐसा विकास, जिसमें किसान से कारीगर और गाँव से महानगर तक हर नागरिक भागीदार बने।

मोदी जी के कर्मपथ के केंद्र में सदा गरीब और वंचित रहे हैं। मई 2014 की जनधन योजना से शुरू हुई यात्रा डीबीटी, पीएम आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि, मुद्रा और अटल पेंशन जैसी पहलों तक पहुँची। इन प्रयासों ने करोड़ों लोगों को औपचारिक आर्थिक व्यवस्था और अवसरों से जोड़ा। संदेश स्पष्ट था- गरीब केवल सहायता का पात्र नहीं, अवसर का हकदार है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का यही मर्म है और यही अंत्योदय के संकल्प का साकार रूप। आज किसी भी गाँव से गुजरिए, प्रधानमंत्री आवास की दीवारें गरीब के मन की मुस्कान बयां करती हैं और आयुष्मान कार्ड संजीवनी बनकर उसका आत्मविश्वास बढ़ा रहा है।

भ्रष्टाचार की मार से कराह रहे देश में मोदी जी ने सुशासन की नई कसौटी सुनिश्चित की और सरकार तथा नागरिक के बीच की दूरी घटती चली गई। कभी कहा जाता था कि दिल्ली से गरीब के लिए भेजे गए एक रुपये में से मात्र 15 पैसे ही उस तक पहुँचते हैं। डिजिटल सेवाओं, डीबीटी और डिजिटल भुगतान ने इस कहानी को पलट दिया। लाभ सीधे खाते में पहुँचे और बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई। इस अर्थ में आज सुशासन दफ्तरों की कार्यकुशलता भर नहीं, नागरिक के जीवन में सरलता, पारदर्शिता और भरोसा पैदा करने की प्रक्रिया बना है। सेवा-संकल्प की असली कसौटी वहीं है, जहाँ व्यवस्था की पहुँच सबसे कम होती है। दशकों से संस्थागत ऋण से दूर रेहड़ी-पटरी वालों को प्रधानमंत्री स्वनिधि ने पूंजी और डिजिटल लेन-देन से जोड़ा। विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों को पहचान, प्रशिक्षण, आधुनिक औजार, ऋण और बाजार का सहारा दिया। दोनों के पीछे एक ही विचार था कि जिसके पास श्रम और कौशल है, उसे अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।

जनसेवा का सुफल है कि स्वच्छ भारत अभियान ने गाँव-गाँव शौचालय पहुँचाए और स्वच्छता को आदत बनाया। ‘फिट इंडिया’ और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने करोड़ों युवाओं को स्वस्थ जीवन शैली की राह दिखाई। एक दर्जन से अधिक नए एम्स खुले, मेडिकल कॉलेज और आईआईटी दोगुने हुए और लंबी प्रतीक्षा के बाद देश को नई शिक्षा नीति मिली। यह सफलता हमें बताती है कि सुशासन का अर्थ स्वस्थ, शिक्षित और स्वच्छ समाज का निर्माण भी है।

नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत का विचार इसी संकल्प को आर्थिक विस्तार देता है। विपक्षी आलोचनाओं को आईना दिखाते हुए मोदी जी ने सिद्ध किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से कट जाना नहीं, बल्कि अपनी उत्पादन क्षमता, तकनीक, कौशल और उद्यमिता को मजबूत करके आत्मविश्वास के साथ विश्व से बराबरी करना है। ‘लोकल से ग्लोबल’ इसी भाव का नारा है। एमएसएमई, स्टार्टअप, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रक्षा उत्पादन इसके स्तंभ है।

देश सेवा के इस महायात्रा में महिला सशक्तिकरण का स्वर भी बदला है। ‘लखपति दीदी’ की अवधारणा महिलाओं को निष्क्रिय लाभार्थी नहीं, आर्थिक गतिविधि की सक्रिय इकाई के रूप में देखती है। स्वयं सहायता समूह उन्हें उद्यम से जोड़ते हैं और महिला आरक्षण राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाता है। तीन तलाक की कुप्रथा के अंत ने भी करोड़ों महिलाओं के जीवन को नया आयाम दिया। जब महिला आय के साथ निर्णयों में भी हिस्सेदार बनती है, तो बदलाव की गति कई गुना बढ़ जाती है, यो मोदी जी ने सिद्ध किया है।

हमारे गाँव सदा चुनावी वादों के केंद्र रहे, लेकिन सच्ची सुध किसी ने नहीं ली। पहली बार ‘स्वामित्व’ योजना ने ड्रोन सर्वेक्षण और संपत्ति कार्ड के जरिए परिवारों को उनकी संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड दिया। यह कागज़ का टुकड़ा भर नहीं, आर्थिक सुरक्षा, ऋण की संभावना और अगली पीढ़ी की नींव है। जल मोदी जी के सुशासन का एक और सूत्र है। नर्मदा का पानी कच्छ तक पहुँचाने की कहानी हो या बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली केन-बेतवा परियोजना, दोनों में जल-सुरक्षा और विकास का गहरा रिश्ता दिखता है।

ढाई दशक की महायात्रा का एक पक्ष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का भी है। स्वतंत्रता के बाद तुष्टिकरण की राजनीति के कारण अनेक श्रद्धा केंद्र विकास की राह ताकते रहे। मोदी युग में उनकी तस्वीर बदली। श्रीराम मंदिर का दशकों पुराना स्वप्न साकार हुआ और अयोध्या विश्वस्तरीय नगर के रूप में आकार ले चुकी है। केदारनाथ का कायाकल्प हुआ, चारधाम यात्रा सुगम हुई और काशी की संकरी गलियों में विश्वनाथ धाम कॉरिडोर जैसी कल्पनातीत परियोजना मूर्त हुई। सोमनाथ, पावागढ़, मोढेरा और उज्जैन के महाकाल लोक तक यही कड़ी दिखती है। इन स्थलों पर केवल मंदिर परिसर नहीं सँवरे, सड़क, हवाई अड्डे, पर्यटन और रोजगार की संभावनाएँ भी खुलीं। आध्यात्म-संस्कृति के नए सवेरे के साथ विकास की नई गंगा प्रवाहित हुई। यही नहीं, अबूधाबी के भव्य मंदिर से बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर तक, विदेशों में भी भारतीय आस्था को सम्मान मिला।

राष्ट्र-सेवा की आधारशिला केवल आर्थिक प्रगति नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा भी है, और इसकी कुंजी रक्षा में आत्मनिर्भरता है। स्वदेशी रक्षा कवच, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें और अंतरिक्ष तकनीक भारत की सामरिक शक्ति के प्रतीक है। आतंकवाद के विरुद्ध कठोर रुख, बालाकोट एयर स्ट्राइक, अभिनंदन की बिना शर्त वापसी और डोकलाम की दृढ़ता के साथ विश्व शक्तियों की आँख में आँख डालकर धारा 370 की विदाई ने भारत के बदले तेवर का एहसास कराया। नक्सलवाद ने दशकों तक वनांचलों को विकास से वंचित रखा। आज सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई और आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के साथ सड़क, संचार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएँ इन क्षेत्रों तक पहुँच रही हैं। आंतरिक मोर्चे पर नक्सल प्रभावित जिले 2014 के 126 से घटकर 2 रह गए हैं और सर्वाधिक प्रभावित जिले शून्य हो गए हैं। बस्तर के लगभग 70 सुरक्षा कैंप अब सेवा केंद्रों में बदले जाएंगे, जो सुरक्षा और विकास के परस्पर पूरक होने का प्रमाण है।

मोदी की देश सेवा के 25 वर्षों का एक उल्लेखनीय पक्ष भारत की बढ़ी हुई वैश्विक भूमिका है। G20 की अध्यक्षता और हाल के ब्रिक्स सम्मेलन ने भारत को वैश्विक विमर्श की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया। आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी। कोविड संकट में जब बड़ी शक्तियाँ सहम गई, तब मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने अपने नागरिकों को निःशुल्क टीका दिया और अनेक देशों तक वैक्सीन पहुंचाकर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतारा। आज ग्लोबल साउथ की आवाज़ और डिजिटल अवसंरचना से भारत वैश्विक व्यवस्था का हिस्सा नहीं, उसका निर्माता बन रहा है।

कर्मयोगी नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल बीते 25 वर्षों की कहानी नहीं, आने वाले 25 वर्षों का संकल्प है। गरीब कल्याण से आर्थिक सशक्तीकरण तक, स्ट्रीट वेंडर से विश्वकर्मा तक, लखपति दीदी से महिला प्रतिनिधित्व तक, स्वामित्व से संपत्ति के अधिकार तक और आस्था के पुनरुद्धार से वैश्विक नेतृत्व तक, हर कड़ी में एक ही सूत्र पिरोया है- शासन को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना। मोदी जी की जनसेवा-यात्रा हमें सिखाती है कि जब सेवा कर्म बने, कर्म सुशासन से जुड़े और सुशासन समाज को सशक्त करे, तभी परिवर्तन स्थायी होता है। गुजरात से आरंभ हुई यह महायात्रा आज विकसित भारत के संकल्प तक पहुंची है, जो 2047 में अवश्य पूर्ण होगी।

-लेखक राष्ट्रीय संयोजक प्रकोष्ठ संकुल भाजपा एवं खजुराहो लोकसभा से सांसद हैं

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नरेन्द्र मोदी ने रचा 25 वर्षों के स्‍वर्णिम सुशासन का कीर्तिमान

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर 2026 को अपनी अनवरत राष्‍ट्रसेवा के कीर्तिमान गढ़ने जा रहे हैं। यह वह ऐतिहासिक दिन होगा, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री और तत्पश्चात देश के प्रधानमंत्री के रूप में 7 अक्‍टूबर 2026 को अपनी राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण करेंगे। यह भारत के राजनैतिक परिदृश्‍य में नया रिकार्ड होगा। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में तथा 26 मई 2014 को देश के प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था।

मोदी के दौर में गुजरात की विकास यात्रा

श्री नरेन्‍द्र मोदी के मुख्‍यमंत्री रहते हुए गुजरात में अभूतपूर्व विकास हुआ। बुनियादी ढांचे, जल, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में सराहनीय कार्य हुए, जिसने एक आत्मविश्वासी, प्रगतिशील और आकांक्षी गुजरात की नींव रखी। 2003 में शुरू हुए वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में निवेशकों, बड़े उद्यमियों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाया गया, जिससे संयुक्त उपक्रमों, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिला। गुजरात में प्रारंभ ज्योतिग्राम योजना ने 1,290 करोड़ रुपये के निवेश के माध्यम से 18,000 से अधिक गांवों में 24 घंटे तीन-फेज बिजली पहुंचाई। गुजरात 2003-04 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना लागू करने तथा 2006 में अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना। 2001 और 2014 के बीच गुजरात के विकास ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी परियोजनाओं के साथ जन-केंद्रित पहलों को जोड़ा और दीर्घकालिक विकास की नींव रखी। मोदी जी के कुशल नेतृत्व में गुजरात में विकास की ऐसी ठोस बुनियाद रखी गई, जिसे कालांतर में ‘गुजरात माडल’ के रूप में जाना गया।

संकल्‍प से सिद्धि तक : श्री नरेन्‍द्र मोदी की राष्‍ट्रसेवा यात्रा

श्री नरेन्‍द्र मोदी ऐसे तपे-तपाए जननेता हैं, जिनमें कुंदन की कठोरता भी है और चंदन की शीतलता भी विद्यमान है। उनके चिंतन में राष्‍ट्र, राष्‍ट्रबोध एवं राष्‍ट्रहित सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने तमाम ऐसे फैसले लिए जो राष्‍ट्र के लिए हितकारी थे। चाहे धारा 370 की समाप्ति हो, भव्‍य श्री राम मंदिर का निर्माण हो या सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा हो। चंद्रयान-3 व ब्रिक्‍स सम्‍मेलन की सफलता से लेकर मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत तक, उनके हर कदम ने भारत को सशक्त बनाया है। स्वच्छ भारत से जल जीवन मिशन तक, उज्‍जवला योजना से आयुष्मान भारत तक, किसान सम्मान निधि से लखपति दीदियों की आत्मनिर्भरता तक, हर योजना का एक ही ध्येय रहा है कि सबका जीवन बेहतर हो और भारत समर्थ बने। रक्षा के क्षेत्र में तो भारत पूर्णत: आत्‍मनिर्भर बन चुका है। श्री नरेन्‍द्र मोदी की जनसेवा के ये 25 वर्ष सिर्फ सत्ता के उपभोग के नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के विश्वास पर खरा उतरने, उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने और भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने के हैं।

श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल पर नज़र डालें तो स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए मोदी जी के मार्गदर्शन में युवाओं में नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ाने के लिए स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और डिजिटल स्किल इंडिया जैसी योजनाओं का सूत्रपात हुआ। आज भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। हमारी जीडीपी वृद्धि दर भी 7.8% है। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश के करोड़ों परिवारों को पक्के घर दिए गये। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लाखों शौचालयों का, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कराया गया। उज्जवला योजना के माध्यम से गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान कर उनके स्‍वास्‍थ्‍य और गरिमा की रक्षा की गई। बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा के मद्देनजर आयुष्‍मान भारत योजना शुरू की गई, जिससे 60 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्‍य बीमा का सुरक्षा कवच मिला। जल जीवन मिशन से हर घर को नल से जल उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया जा रहा है। सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है। ग्रामीण भारत में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में मेट्रो और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं मूर्तरूप ले रही हैं।

मोदी जी के नेतृत्‍व वाली केन्‍द्र सरकार का सिद्धांत है- रिफार्म, परफार्म एवं ट्रांसफॉर्म। इस सरकार ने गरीबों के सम्‍मान, युवाओं के सामर्थ्‍य, किसानों की समृद्धि व महिलाओं के सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण का विशेष आधार बनाया। मोदी जी ने किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए अनेक योजनाओं का प्रावधान किया। महिला सशक्तिकरण मोदी के विकास एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। तीन तलाक कानून की समाप्ति से मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। मातृवंदन योजना, नारी शक्ति वंदन और 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद जगी है। केन्‍द्र सरकार का लक्ष्‍य तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का है, जिनमें से डेढ़ करोड़ से अधिक लखपति दीदी अपना गरिमामय जीवन जी रही हैं। ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बेटियों का आत्‍मसम्‍मान बढ़ा है।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी का सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र प्रथम का संकल्प आज उनकी समावेशी राजनीति की पहचान बन चुका है। उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं से भारत समरस विकास के नये सोपान नापते हुए सतत् गतिमान है। मोदी जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति पर उनकी नजर सबसे पहले पहुंचती है। सर्वहारा वर्ग के दिल की बात की जाए तो जिसको किसी ने नहीं पूछा, उसे हमारे कर्मयोगी प्रधानमंत्री श्री नरेंन्द्र मोदी ने पूजा

व्‍यक्तित्‍व एवं कृतित्‍व : एक युगदृष्‍टा की पहचान

मोदी जी के 25 वर्षों की इस अनवरत राष्‍ट्रसेवा के कालखण्‍ड में उनके व्‍यक्तित्‍व में तपस्‍वी, युगदृष्‍टा और जननायक के दर्शन होते हैं। उनकी अविराम राष्‍ट्रसेवा संकल्प से सिद्धि का प्रतिबिम्‍ब है। उन्‍होंने बीते 25 वर्षों के दौरान एक दिन भी अवकाश नहीं लिया। अपने बहुआयामी और विराट व्यक्तित्व से आज मोदी जी समूचे विश्व में शीर्ष नेता के रूप में जाने-पहचाने जाते हैं। मोदी जी को 36 देशों ने अपने सर्वोच्‍च सम्‍मान से विभूषित किया है। उन्‍होंने अपने कुशल नेतृत्‍व में विगत 25 वर्षों में वाइब्रेंट गुजरात से लेकर भारत को विश्‍व मंच पर प्रतिष्‍ठापित किया है। श्री मोदी की जब हम 25 वर्षों की सुशासन यात्रा को देखते हैं तो यह स्‍पष्‍ट होता है कि यह भारत के पुनरुत्‍थान की यात्रा है। मुख्‍यमंत्री के रूप में उन्‍होंने सिखाया कि राज्‍य का विकास कैसे होता है और प्रधानमंत्री के रूप में उन्‍होंने दिखाया कि देश कैसे विकसित होता है। देश के नव निर्माण के शिल्पकार दूरदर्शी श्री नरेन्द्र मोदी ”सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्‍वास” का संकल्प लेकर भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने में अहर्निश लगे हुए हैं।

सुरेश पचौरी
(लेखक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं)

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