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IND vs PAK Asian Game Highlights: आखिरी ओवर में कैसे जीता भारत, देखें 20वें ओवर की एक-एक गेंद का रोमांच

भारत vs पाकिस्तान एशियन गेम्स फाइनल लाइव 2026: अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा के तूफानी अर्धशतकों की मदद से भारत ने हसन नवाज की आक्रामक पारी के बावजूद रोमांचक फाइनल में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19 रन से हराकर शनिवार को यहां एशियाई खेलों के पुरुष क्रिकेट में अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया. मैच में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए भारत ने पाकिस्तान के सामने 212 रन का असंभव लक्ष्य रखा. जवाब में पाकिस्तानी टीम छह विकेट खोकर 196 रन ही बना पाई.

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वडनगर से वैश्विक मंच तक नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा

17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। गुजरात के छोटे से शहर वडनगर से शुरू हुई उनकी जीवन-यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक, भारतीय जनता पार्टी के संगठनकर्ता, गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने तक पहुंची। नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति में लंबे समय तक चर्चा और विश्लेषण का विषय रहा है। उनके समर्थक उन्हें निर्णायक नेतृत्व, विकास योजनाओं और भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने वाला नेता मानते हैं, जबकि आलोचक आर्थिक नीतियों, रोजगार और सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं। नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ। उनका बचपन एक सामान्य परिवार में बीता। युवावस्था में उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं कीं और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। वर्ष 1972 में वे संघ के प्रचारक बने। आपातकाल के दौर में भी वे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। संगठन के प्रति उनकी कार्यशैली, अनुशासन और व्यापक संपर्क क्षमता ने उन्हें धीरे-धीरे भाजपा के संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचाया। 1987 में वे भाजपा की गुजरात इकाई में संगठन की भूमिका से जुड़े और 1990 के दशक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में भी उनकी भूमिका बढ़ती गई। 1998 में वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बने।  7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला और मई 2014 तक इस पद पर रहे। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, सड़क, बिजली, सिंचाई, शहरी विकास और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया गया। वर्ष 2003 में गुजरात में ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट’ की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर बड़े निवेश और व्यापार सम्मेलन के रूप में विकसित हुआ। गुजरात मॉडल को लेकर जहां समर्थकों ने आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं आलोचकों ने विकास के लाभों के समान वितरण और सामाजिक मुद्दों पर भी सवाल उठाए।

2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया और 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2019 में भाजपा ने अपना प्रदर्शन और मजबूत करते हुए 303 सीटें जीतीं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बहुमत प्राप्त हुआ और नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की एक प्रमुख पहचान बड़े पैमाने पर लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाएं, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे का विस्तार रही है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहे लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में भूमिका निभाई। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता और शौचालय निर्माण को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने आवास, कृषि सहायता, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे क्षेत्रों को नीति के केंद्र में रखा।  इसी दौर में डिजिटल भुगतान और आधार आधारित सेवाओं का विस्तार भी तेजी से हुआ। यूपीआई ने डिजिटल लेन-देन को आम नागरिकों की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के जरिए विनिर्माण, उद्यमिता, कौशल और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। दूसरी ओर, इन नीतियों के प्रभाव को लेकर रोजगार, छोटे कारोबार, ग्रामीण आय और आर्थिक असमानता जैसे सवाल भी सार्वजनिक बहस में बने रहे। इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार के आर्थिक और कल्याणकारी कार्यक्रमों का मूल्यांकन केवल योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक और दीर्घकालिक प्रभाव से किया जाना चाहिए।

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बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी मोदी सरकार के वर्षों में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और डिजिटल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर रहा। इन परियोजनाओं ने संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। साथ ही, बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश की उपयोगिता, उसके क्षेत्रीय वितरण और उससे रोजगार सृजन जैसे प्रश्न भी नीति-विश्लेषण का हिस्सा बने हुए हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर मोदी सरकार के दौरान भारत की सक्रियता और वैश्विक प्रभाव दोनों बढ़े। जी-20 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की भूमिका मजबूत हुई, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान-इजरायल संघर्ष और अमेरिका के साथ बदलते संबंधों के बीच भारत ने रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए ऊर्जा सुरक्षा को भी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में रखा गया। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति और अमेरिकी टैरिफ ने भारत के सामने आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती खड़ी की, जिसके बीच भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत और वैकल्पिक आर्थिक साझेदारियों पर जोर दिया। इस तरह मोदी सरकार की विदेश नीति में कूटनीति के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हित और बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरणों के बीच संतुलन प्रमुख तत्व बनकर उभरे।

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें संगठन से लेकर सरकार के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की एक लंबी प्रक्रिया दिखाई देती है। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2014 में देश के प्रधानमंत्री और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक उन्होंने भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनके कार्यकाल में जनधन, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आवास, किसान सहायता, स्वास्थ्य सुरक्षा, जल जीवन मिशन और डिजिटल भुगतान जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है। साथ ही आर्थिक विकास, रोजगार, महंगाई, सामाजिक समावेशन और नीतियों के प्रभाव को लेकर बहस भी जारी है। अंततः, नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों या सत्ता की राजनीति के संदर्भ में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह यात्रा बदलते भारत की राजनीतिक चेतना, शासन-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में आए व्यापक बदलावों की भी कहानी है। वडनगर से शुरू हुआ यह सफर आज भारत के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर वैश्विक कूटनीति तक अपनी छाप छोड़ चुका है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन ने भारतीय राजनीति और शासन की दिशा को प्रभावित किया है। आने वाले समय में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का मूल्यांकन केवल उनके कार्यकाल की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि उन्होंने भारत की राजनीति, शासन और वैश्विक भूमिका को किस हद तक नई दिशा दी। इतिहास के पन्नों में उनकी विरासत इस सवाल के साथ दर्ज होगी कि उनके नेतृत्व में बदला भारत आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रभावशाली आधार तैयार कर सका।

- डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत

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