Air Pollution & Lung Health: बढ़ते प्रदूषण में ऐसे रखें सांसों की सेहत का ख्याल: धूल-धुएं से बचने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय
Air Pollution & Lung Health: बढ़ते प्रदूषण के इस दौर में सांसों की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो गया है. धूल और धुएं से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए लोग अक्सर महंगे इलाज या दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ आसान घरेलू उपाय भी आपको इस समस्या से निजात दिला सकते हैं? इन उपायों को अपनाकर आप न सिर्फ अपनी सांसों को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से भी खुद को बचा सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रभावी घरेलू नुस्खों के बारे में.
29 नवंबर को दुनिया देखेगी RSS की ताकत, Centenary Year के तहत सालभर चले अभियान का Delhi में बड़े आयोजन के साथ होगा समापन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का सालभर चला अभियान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है। पिछले साल विजयादशमी से शुरू हुई गतिविधियों का समापन 29 नवंबर को नई दिल्ली में एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के साथ प्रस्तावित है, जिसे संघ प्रमुख मोहन भागवत संबोधित करेंगे। संघ की योजना के मुताबिक इस आयोजन में करीब एक लाख स्वयंसेवक गणवेश में और लगभग 50 हजार आमंत्रित नागरिक शामिल हो सकते हैं।
हम आपको बता दें कि संघ ने अपने सौवें वर्ष को केवल स्मरण और उत्सव तक सीमित रखने की बजाय देशव्यापी जनसंपर्क और सामाजिक संवाद के अभियान के रूप में आगे बढ़ाया। इसकी योजना में गांव-गांव और बस्ती-बस्ती संपर्क, सामाजिक समरसता बैठकें, हिंदू सम्मेलन, प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद तथा युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम शामिल किए गए। वर्ष की शुरुआत से ही संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे को व्यापक सामाजिक संपर्क से जोड़ने पर जोर दिया।
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इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक समरसता रहा। संघ की घोषित योजना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के मंडलों और शहरी बस्तियों में सम्मेलन आयोजित किए गए, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक सद्भाव बैठकों के माध्यम से जाति, क्षेत्र और सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर संवाद का प्रयास किया गया। संघ की योजना में 11,360 खंडों और नगरों में सामाजिक सद्भाव बैठकों तथा 924 जिलों में प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद का उल्लेख किया गया था।
सालभर चले इस अभियान की पहुंच का अंदाजा संघ द्वारा जारी आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। संघ के अनुसार, देशभर में 62,555 विजयादशमी कार्यक्रमों में 32 लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने गणवेश में भाग लिया। संघ ने यह भी बताया कि एक लाख से अधिक स्थानों पर उसकी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इन आंकड़ों को संघ अपने बढ़ते सामाजिक विस्तार और स्वयंसेवकों की भागीदारी के संकेत के रूप में प्रस्तुत करता है।
इस शताब्दी वर्ष का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में भी संघ से जुड़े संगठनों के माध्यम से संवाद और सामाजिक संपर्क के कार्यक्रम हुए। सितंबर 2026 में मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क, टोरंटो और लंदन में विभिन्न समुदायों, धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों और भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद किया। संघ के अनुसार इन कार्यक्रमों का केंद्र सामाजिक समरसता, सेवा, सांस्कृतिक संवाद और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा रही।
देश के भीतर भी इस पूरे वर्ष को संघ ने सेवा, सामाजिक संपर्क, परिवार, पर्यावरण, आत्मनिर्भरता और नागरिक दायित्व जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया। संघ के 2025-26 के वार्षिक विवरण के अनुसार देशभर में बड़ी संख्या में सेवा गतिविधियां शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में संचालित की गईं।
साथ ही युवा पीढ़ी से संवाद भी इस शताब्दी वर्ष की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा है। खास तौर पर जेन-जी और जेनरेशन अल्फा के साथ संवाद के जरिए संघ ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने की बजाय उसकी बात सुनना और उसके सवालों का तार्किक उत्तर देना भी जरूरी है। मुंबई में युवाओं के साथ संवाद के दौरान मोहन भागवत ने लोकतंत्र में विरोध और असहमति को भी संवाद का हिस्सा बताया तथा युवाओं को देश की अगली पीढ़ी के रूप में देखने की बात कही।
संघ के दृष्टिकोण से देखें तो राष्ट्र निर्माण में युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन, सेवा और नागरिक जिम्मेदारी को जोड़ना उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसी क्रम में समकालीन मुद्दों पर संघ प्रमुख का सार्वजनिक संवाद भी लगातार दिखाई देता रहा है, चाहे सामाजिक समरसता का प्रश्न हो, परिवार और पर्यावरण का विषय हो, आत्मनिर्भरता हो या नागरिक दायित्व। संघ स्वयं अपने शताब्दी वर्ष के प्रमुख लक्ष्यों में सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक जिम्मेदारी को रखता है। यही वजह है कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा केवल संगठन के विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की यात्रा है।
बहरहाल, आरएसएस का शताब्दी वर्ष केवल सौ वर्ष पूरे होने का समारोह नहीं, बल्कि संगठन के लिए अपने सामाजिक आधार, संपर्क अभियान और वैश्विक संवाद को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर रहा है। अब निगाहें 29 नवंबर के दिल्ली कार्यक्रम पर हैं, जहां सालभर की गतिविधियों को एक बड़े सार्वजनिक मंच पर समेटने की तैयारी है।
-नीरज कुमार दुबे
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