ग्रामोफोन की दुकान से भारत रत्न तक: पंडित भीमसेन जोशी का सुरों से भरा सफर
मुंबई, 3 जनवरी (आईएएनएस)। कई बार इतिहास की बड़ी कहानियां बहुत छोटी जगहों से जन्म लेती हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान साधक पंडित भीमसेन जोशी की कहानी मामूली सी ग्रामोफोन की दुकान से शुरू हुई। बचपन में स्कूल से लौटते वक्त ग्रामोफोन पर बजते गानों को सुनना उनकी एक ऐसी तैयारी थी, जिसने आगे चलकर उन्हें सुरों की दुनिया का बादशाह बना दिया। उसी दुकान में खड़े होकर सुने गए रागों ने उनके अंदर संगीतकार बनने के आत्मविश्वास को मजबूत किया।
ग्रामोफोन की दुकान से भारत रत्न तक: पंडित भीमसेन जोशी का सुरों से भरा सफर
मुंबई, 3 जनवरी (आईएएनएस)। कई बार इतिहास की बड़ी कहानियां बहुत छोटी जगहों से जन्म लेती हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान साधक पंडित भीमसेन जोशी की कहानी मामूली सी ग्रामोफोन की दुकान से शुरू हुई। बचपन में स्कूल से लौटते वक्त ग्रामोफोन पर बजते गानों को सुनना उनकी एक ऐसी तैयारी थी, जिसने आगे चलकर उन्हें सुरों की दुनिया का बादशाह बना दिया। उसी दुकान में खड़े होकर सुने गए रागों ने उनके अंदर संगीतकार बनने के आत्मविश्वास को मजबूत किया।
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