नेटफ्लिक्स की नई लीगल ड्रामा सीरीज IKKA:सनी देओल बनाम अक्षय खन्ना, मजबूरी में मर्डर आरोपी का केस लड़ता ईमानदार वकील, रिश्ते उसूल दांव पर
नेटफ्लिक्स ने अपनी आने वाली ओरिजिनल लीगल ड्रामा सीरीज ‘IKKA’ का ऐलान कर दिया है। इस सीरीज में सनी देओल और अक्षय खन्ना पहली बार एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आएंगे। कहानी एक ऐसे मशहूर और ईमानदार वकील के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे मजबूरी में एक मर्डर केस के आरोपी का बचाव करना पड़ता है। खास बात यह है कि यही आरोपी वह शख्स है, जिसका करियर वकील ने अतीत में तबाह कर दिया था। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब यह वकील हालात के दबाव में अपने ही उसूलों से समझौता करने पर मजबूर हो जाता है। केस हारने की कीमत इतनी भारी है कि उसे अपनी प्रतिष्ठा, परिवार और जिंदगी की सबसे अहम चीजें खोने का डर सताने लगता है। ऐसे में वह कानून के हर दांव-पेंच का इस्तेमाल करता है, चाहे वह नैतिक हो या नहीं। सीरीज को डायरेक्ट किया है सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने, जबकि इसकी स्क्रिप्ट अल्थिया कौशल और मयंक तिवारी ने लिखी है। ‘IKKA’ को Alchemy Films के बैनर तले प्रोड्यूस किया गया है। इससे पहले यही टीम नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘महाराज’ पर भी काम कर चुकी है। कास्ट की बात करें तो सनी देओल और अक्षय खन्ना के अलावा सीरीज में दिया मिर्जा, तिलोत्तमा शोम, संजीदा शेख, शिशिर शर्मा और आकांक्षा रंजन अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। कहानी सिर्फ कोर्टरूम बहस तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें निजी रिश्तों, पुराने जख्मों और वैचारिक टकराव को भी अहम जगह दी गई है। सीरीज का टीजर पहले ही रिलीज हो चुका है, जिसमें कोर्टरूम की सख्त बहस, किरदारों के बीच तनाव और इमोशनल कॉन्फ्लिक्ट की झलक मिलती है। ‘IKKA’ में एक पिता की अपने परिवार को बचाने की जद्दोजहद को भी दिखाया गया है, जहां हर फैसला उसे सही और गलत के बीच खड़ा कर देता है। नेटफ्लिक्स की यह सीरीज लीगल ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक इंटेंस और गंभीर कहानी लेकर आ रही है, जिसमें हर मोड़ पर नया सवाल खड़ा होता नजर आएगा
सुप्रीम कोर्ट बोला- क्रिकेट संघों में गैर-खिलाड़ी क्यों:बैट पकड़ना न जानने वालों के हाथ में खेल; MCA चुनाव पर रोक से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट और अन्य खेल संघों के संचालन पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि खेल संस्थाओं का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जो खेल को समझते हों। क्रिकेट संघों में रिटायर्ड क्रिकेटरों को जगह मिलनी चाहिए, न कि ऐसे लोगों को जो बैट तक पकड़ना नहीं जानते। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के चुनाव पर रोक लगाई गई थी। ये चुनाव 6 जनवरी को होने थे, लेकिन उनमें भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगे थे। MCA में अचानक से सदस्य बढ़ें सुनवाई के दौरान CJI ने MCA की सदस्यता में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 1986 से 2023 तक एसोसिएशन में 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद अचानक बड़ी संख्या में नए सदस्य जोड़ दिए गए। CJI ने पूछा कि इतने सालों में सीमित सदस्य और फिर अचानक ‘बंपर ड्रॉ’ कैसे हो गया। MCA और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रक्रिया देखी थी और कुछ आवेदनों को खारिज भी किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि चैरिटी कमिश्नर ने बिना कैबिनेट से सलाह लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए था- CJI CJI ने कहा कि अगर सदस्य संख्या 300 तक बढ़ानी थी तो उसमें नामी और रिटायर्ड अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए था। दे कोर्ट ने साफ कहा कि खेल खिलाड़ियों की वजह से हैं, प्रशासकों की वजह से नहीं। क्रिकेट क्रिकेटरों से जाना जाता है, उसी तरह हर खेल उसके खिलाड़ियों से। केदार जाधव ने आरोप लगाया था मामला तब शुरू हुआ जब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भाजपा नेता केदार जाधव ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 401 नए सदस्यों को जोड़कर वोटर लिस्ट में हेरफेर की गई। याचिका में कहा गया कि इनमें से कई लोग NCP-SP विधायक रोहित पवार के रिश्तेदार या कारोबारी सहयोगी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दी और सभी आपत्तियां बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने रखने को कहा। कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले का जल्द फैसला करने का अनुरोध किया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 


















