PM Kisan: कब आएगी 24वीं किस्त? ₹2000 पाने के लिए जरूरी है ये जानकारी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भारत सरकार की एक अहम योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत एलिजिबल किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।
ठाणे MACT ने मेट्रो साइट हादसे में मृतक मजदूर के परिजनों को 34.54 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश
ठाणे, छह अक्टूबर महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने मई 2021 में मेट्रो रेल परियोजना स्थल पर करंट लगने से जान गंवाने वाले 24-वर्षीय एक मजदूर के परिवार को 34.54 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण के सदस्य आर. वी. मोहिते ने सोमवार को हाइड्रा क्रेन के मालिक और उसके बीमाकर्ता को संयुक्त रूप से तथा अलग-अलग मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। इस राशि पर याचिका दायर किए जाने की तारीख से भुगतान होने तक नौ प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।
दावे की याचिका के अनुसार, यह घटना 18 मई 2021 को ठाणे-भिवंडी रोड पर मेट्रो लाइन पांच की परियोजना स्थल पर हुई थी, जहां मृतक मोहम्मद नजरे आलम शेख मजदूर के रूप में काम कर रहा था। याचिका के मुताबिक, शेख हाइड्रा क्रेन की मदद से सीमेंट के ब्लॉक हटाने के दौरान क्रेन पर खड़ा था और बूम के हुक से जुड़े तार के रस्से को पकड़े हुए था। क्रेन चालक ने बूम को ऊपर उठाया, जिसके कारण वह ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज वाली बिजली की चालू लाइन के संपर्क में आ गया।
इससे शेख को करंट लग गया और उसकी मौत हो गई। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए के तहत साइट इंजीनियर और क्रेन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वाहन के इस्तेमाल और सुरक्षा संबंधी चूक को लेकर बीमा कंपनी की दलील पर अधिकरण के सदस्य मोहिते ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 92(ए) में ‘मोटर वाहन का इस्तेमाल’ ऐसे हादसों को भी शामिल करता है, जो वाहन के चलने के दौरान या उसके खड़े होने की स्थिति में होते हैं।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना का मोटर वाहन के इस्तेमाल से जुड़ा होना जरूरी है, लेकिन यह संबंध प्रत्यक्ष और तत्काल होना जरूरी नहीं है। अधिकरण ने कहा कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना वाहन मालिक की जिम्मेदारी थी। साथ ही, क्रेन चालक का भी यह दायित्व था कि वह जांच और निगरानी करे कि परियोजना स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों ने सुरक्षा उपकरण पहने हैं या नहीं।
अधिकरण ने पीड़ित की पत्नी, मां, नाबालिग भाई और बेटी को कुल 34.54 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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