बैंकों को डिजिटल पहुंच बढ़ानी चाहिए और लोन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनानी चाहिए: डीएफएस सचिव
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया ने मंगलवार को कहा कि सरकार की विभिन्न प्रमुख योजनाओं के माध्यम से देश में वित्तीय समावेशन को गहरा करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन बैंकों को अपनी डिजिटल पहुंच और बढ़ाने तथा ऋणों की एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
संजय लोहिया ने राष्ट्रीय राजधानी में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों और प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों (पीवीबी) के कार्यकारी निदेशकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वित्तीय सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान सूक्ष्म उद्यमों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए यूपीआई-आधारित क्रेडिट लाइन और क्रेडिट कार्ड फॉर माइक्रो एंटरप्राइजेज (सीसीएमई) जैसे माध्यमों पर भी चर्चा की गई। उद्देश्य छोटे कारोबारों तक आसान और त्वरित ऋण पहुंच सुनिश्चित करना है।
लोहिया ने वित्तीय समावेशन योजनाओं में बैंकों द्वारा की गई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और निजी क्षेत्र के बैंकों से इन योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि जन सुरक्षा बीमा योजनाओं के तहत दावा पात्रता के बारे में लोगों के बीच अधिक जागरूकता पैदा की जाए, ताकि लाभार्थी की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की स्थिति में नामांकित व्यक्ति को समय पर दावा राशि प्राप्त हो सके।
साथ ही उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से संबंधित शिकायतों के निपटारे में विशेष सावधानी बरती जाए और दावों के मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
डीएफएस सचिव ने बैंकों से यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के सभी नए लाभार्थियों का पंजीकरण जन सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से किया जाए। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल को सभी बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा की गुणवत्ता और संचालन की सुगमता दोनों बेहतर होंगी।
बैठक में अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के परसिस्टेंसी रेशियो यानी योजना में लाभार्थियों की निरंतर भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
इस दौरान कई प्रमुख सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया, पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा, पीएम सूर्य घर योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) शामिल रहे।
बैठक में बैंक शाखाओं के विस्तार और बैंकिंग सेवाओं से वंचित गांवों में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (बीसी) की तैनाती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर हिस्से तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो और डिजिटल वित्तीय समावेशन को और मजबूत किया जा सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
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भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे में शामिल होंगे 5 नए देश? फ्रांस ने दिल्ली में किया खुलासा
India Middle East Europe Economic Corridor: भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारेक को लेकर हलचल तेज हुई है. अब इस योजना में 5 नए देश शामिल होना चाहते हैं. इसका खुलासा खुद फ्रांस ने किया है. साल के अंत में मंत्रिस्तीय बैठक होने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले नए देशों की शामिल होने की इच्छा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए गेरार्ड मेस्ट्रेलेट को विशेष दूत बनाया है. मेस्ट्रेलेट 5 से 7 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं. विशेष दूत गेरार्ड मेस्ट्रेलेट ने मंगलवार को बताया कि मिस्र, लेबनान, ओमान, ग्रीस और साइप्रस ने इस परियोजना में शामिल होने में रुचि दिखाई है. उन्होंने कहा कि आईएमईसी में नए देशों को शामिल करने पर चर्चा के लिए इस साल के अंत में मंत्रिस्तरीय बैठक होने की उम्मीद है.
कैसे होगा फैसला?
दिल्ली दौरे के दौरान मेस्ट्रेलेट आईएमईसी परियोजना को आगे बढ़ाने और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में फ्रांस-भारत सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं. मेस्ट्रेलेट ने कहा कि आईएमईसी के मौजूदा आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष ही इस बात का फैसला करेंगे कि कॉरिडोर में नए देशों को शामिल किया जाए या नहीं. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में आईएमईसी के दायरे को बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है.
ग्रीस और साइप्रस पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक
मेस्ट्रेलेट ने बताया कि मिस्र, लेबनान और ओमान आईएमईसी के साथ काम करने या इसमें शामिल होने में रुचि रखते हैं. वहीं, ग्रीस और साइप्रस भी इस परियोजना के पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक हैं. मेस्ट्रेलेट के मुताबिक, ये दोनों यूरोपीय देश आईएमईसी में शामिल होने को लेकर खास तौर पर रुचि दिखा रहे हैं.
जॉर्डन और इजरायल पर क्या है स्थिति?
मेस्ट्रेलेट ने जॉर्डन और इजरायल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि दोनों देश मूल आठ हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं हैं, लेकिन शुरुआती समझौते में उनका जिक्र किया गया था. उनके मुताबिक, उस समय जॉर्डन और इजरायल के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे, इसलिए उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.
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